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ओशो सक्रिय ध्यानTM
एक घंटे की अवधि की यह विधि आपके दिन की जोशपूर्ण शुरुआत का एक शक्तिशाली ढंग है। इसे प्रात: करना श्रेयस्कर होगा। यह आपकी दबी भवनाओं तथा तनावों से मुक्ति दिलाकर आपके भीतर शक्ति का नव-संचार करती है।
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ओशो कुंडलिनी ध्यानTM
सक्रिय ध्यान की अनुजा के नाम से जानी जाने वाली इस विधि के 15-15 मिनट के चार चरण हैं। यह विधि कोमल होते हुए भी आपके शरीर में संग्रहीत तनाव को बड़े प्रभावशाली ढंग से मुक्त करती है।
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ओशो नटराज ध्यानTM
पूर्णतया नृत्यमय होकर अपने भीतर प्रविष्ट होना अति सुगम तथा सहज ढंग है। इस विधि के तीन चरण हैं तथा अवधि 65 मिनट।
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ओशो नादब्रह्म ध्यानTM
एक घंटा अवधि के इस बैठने वाले ध्यान में मुख के भीतर ही भीतर गुंजार तथा हस्त-मुद्रायें आंतरिक संतुलन व मौन पैदा करती है।
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ओशो देववाणी ध्यान TM
देववाणी अर्थात "दिव्य ध्वनि" जो कि ध्यानी के भीतर से गति करती है और बोलती है। इसमें ध्यानी एक खाली पात्र होता है, एक माध्यम। यह ध्यान जीभ का लातिहान* है। यह चेतन मन को गहराई से शिथिल करता है अत: नींद से पहले अगर इसे किया जाये तो यह निश्चित ही गहरी नींद लाता है।
* लातिहान यानी सहजस्फूर्त, अनियोजित गति।
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ओशो गौरीशंकर ध्यानTM
एक घंटे के इस रात्रि-ध्यान में श्वसन प्रक्रिया, ज्योति शिखा की ओर अपलक देखना तथा सौम्य शरीर क्रियाएं शामिल हैं।
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ओशो मंडल ध्यानTM
मंडल अर्थात वर्तुल। प्रत्येक वर्तुल का एक केंद्र होता है। इस विधि का उद्देश्य है ऊर्जा का एक ऐसा वर्तुल पैदा करना कि स्वयं ही केंद्रस्थता घट सके। अंत में व्यक्ति संपूर्ण मौन,संपूर्ण शांति में प्रवेश कर जाता है।"
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ओशो व्हिरलिंग ध्यानTM
" व्हिरलिंग ( सूफी दरवेश नृत्य)प्राचीनतम और सबसे शक्तीशाली विधियों में से एक है। यह इतनी गहन है कि एक अकेला अनुभव ही आपको बिलकुल बदल सकता दे सकता है। दोनों आंखें खुली रखकर एक स्थान पर गोल घूमो,जैसे छोटे बच्चे गोल घूमते हैं, जैसे कि तुम्हारे अंतर्प्राण एक केंद्र बन गए हों और तुम्हारा पूरा शरीर एक पहिया बनकर घूम रहा है,कुम्हार का चाक बन कर घूम रहा है। तुम केंद्र पर हो, परंतु सारा शरीर घूम रहा है।" ओशो
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NO DIMENSIONS MEDITATION
This is a powerful method for centering one's energy in the hara - the area just below the navel. The first stage is of dancing in a set of movements for thirty minutes. The second stage is of fifteen minutes of whirling, followed by fifteen minutes of lying down, still and silent, with eyes closed.
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श्रवण की कला
ओशो के ध्वनि-मुद्रित प्रवचन मौन को समझने की कुंजी हैं। इतिहास में पहली बार वाणी का प्रयोग श्रवण के अनुभव के तौर पर किया गया है। यह ज्ञान प्राप्त करने के लिये नहीं अपितु अपने शांत, मौन केंद्र तथा विश्रांत साक्षित्व का सीधा अनुभव करने के लिये है।
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जिबरिश व लेट-गो
जिबरिश ध्यान विधि में ध्वनि व शरीर -क्रियाओं का प्रयोग आपको तनाव मुक्त करता है। “मन की शुद्धि के लिये” ओशो इसे “सर्वोत्तम वैज्ञानिक ढंग” कहते हैं। इसके पश्चात सुझावों के साथ संपूर्ण विश्रांति तथा लेट-गो का चरण आता है।
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