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इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
दिसंबर 2 0 1 2
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“हास्य को अपनी प्रार्थना बनाओ। अधिक हंसो। तुम्हारी जकड़ी हुई ऊर्जाओं को हास्य जिस तरह मुक्त करता है वैसे और कुछ नहीं करता। हास्य तुम्हें जितना निर्दोष बनाता है उतना और कुछ नहीं बनाता।" ओशो |
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ओशो.कॉम |
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दि अदर माइसैल्फ  |
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निर्दोषिता की ओर वापसी |
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“तुम जितने अधिक सजग होते हो, उतना ही क्रोध कम होगा, लोभ कम होगा और ईर्ष्या कम होगी|
मैं तुम्हें यह नहीं कहता : क्रोध मत करो, क्योंकि यही तुम्हें सदियों से कहा जाता रहा है| तुम्हारे तथाकथित महात्मा तुम्हें यही कहते रहे हैं--क्रोध मत करो| इसलिए तुमने क्रोध के दमन का मार्ग सीख लिया है|…" |
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बॉडी धर्म  |
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हास्य |
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“जब एक बच्चा पैदा होता है, पहली सामाजिक गतिविधि जो कि बच्चा सीखता है या शायद यह कहना सही नहीं है कि सीखता है, क्योंकि वह यह खुद के साथ लाता है, वह है मुस्कुराना। पहली सामाजिक गतिविधि। मुस्कुराहट के साथ वह समाज का हिस्सा बन जाता है। यह बहुत स्वाभाविक लगता है…" |
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इमोशनल इकोलॉजी  |
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भोग और दमन के पार |
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“दुख के लिए किसी प्रतिभा की आवश्यकता नहीं होती कोई भी इसे कर सकता है, सुख के लिए योग्यता, प्रतिभा, और सृजनात्मकता की आवश्यकता होती है|
केवल सृजनात्मक व्यक्ति ही प्रसन्न होते हैं|
इस बात को तुम्हारे ह्रदय में गहरे उतर जाने दो: केवल सृजनात्मक व्यक्ति ही प्रसन्न होते हैं|…" |
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माह का ध्यान  |
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तीन बार देखना |
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विधि
“
अगर कोई समस्या आती है, जैसे मान लो तुम अकस्मात काम वासना का अनुभव करते हो या लोभ या क्रोध की लहर दौड़ती है तो सिर्फ तीन बार देखो कि वह है। यदि क्रोध है तो तीन बार कहो, " क्रोध, क्रोध, क्रोध।" सिर्फ तीन बार पूरी तरह से ध्यान दो ताकि वह चेतना के सामने आए, इतना ही। फिर जो भी कर रहे थे …" |
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मल्टीमीडिया |
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ओशो प्रवचनों को यहां
देखें  |
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संवेदनशीलता को साझा किया जा सकता है |
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हर बच्चा संवेदनशील पैदा होता है, अत्यधिक संवेदनशील। लेकिन समाज नहीं चाहता कि इतने सारे संवेदनशील लोग दुनिया में हों, वह मोटी चमड़ी वाले लोग चाहता है। उसे जरूरत है मजदूरों की, सैनिकों की, वह हर तरह के कठोर लोग चाहता है जिन्होंने अपने दिल को दरकिनार किया हुआ है।…" |
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वोच ईट हीअर » |
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माह की ऑडियो सीरीज पुस्तक  |
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रामनाम जान्यो नहीं |
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“प्रेम, ध्यान, धर्म, धार्मिकता जैसे अनेक विषयों को ओशो ने इस प्रश्नोत्तर प्रवचनमाला द्वारा अपने अनूठे ढंग से समझाया है। वे कहते हैं, “और स्मरण रहे कि यह धार्मिकता कोई धारणा नहीं है“ यह सत्य की आंतरिक सुवास है।…“ |
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माह की ई पुस्तक  |
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याकुसान: स्ट्रेट टु दि प्वाइंट ऑफ एनलाइटनमेंट |
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“ज़ेन सद्गुरु याकुसान की कहानियों पर किए गए पांच प्रवचनों का संग्रह। ओशो इन कहानियों का उपयोग सत्य के बारे में ज़ेन नज़रिये में प्रवेश करने के लिए करते हैं। यह किताब ज़ेन के संबंध में नहीं है बल्कि हमारी आसपास की दुनिया को देखने का एक ज़ेन दृष्टिकोण है।… |
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