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आई-मेडिटेट

 
नाक से अराजकपूर्ण श्वास लें, श्वास तेज़, गहरी और अनियमित हो, उसमें कोई तरीका न हो और ज़ोर हमेशा श्वास बाहर फेंकने पर हो। शरीर स्वयं श्वास भीतर लेने की चिंता ले लेगा। श्वास फेफड़ों तक गहरी जानी चाहिये। श्वास जितनी शीघ्रता से और त्वरा से ले सकें, लें । और ध्यान रहे कि श्वास गहरी रहे। और फिर थोड़ी और त्वरा और तेज़ी लाएं जब तक कि आप वस्तुत: श्वास ही न हो जाएं। ऊर्जा को संगठित करने के लिये अपनी स्वाभाविक दैहिक क्रियाओं को प्रयोग में लायें। ऊर्जा को बढ़ता हुआ अनुभव करें परंतु पहले चरण में अपने को ढीला मत छोड़ें।

OSHO Dynamic Meditation

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  • 47 Meditators In Past 7 Days
  • 252 Meditators In Past 30 Days
यह ध्यान एक तेज, तीव्र और गहरा तरीका है शरीर- मन मे बने हुए पुराने , पैटर्न को तोड़ने का जो हमे अतीत में कैद रखता है और जो हमें स्वतंत्रता,साक्षी, मौन और शांति का अनुभव कराता है जो इन जेल की दीवारों के पीछे छिपा हुआ है।

यह ध्यान सुबह भोर में किया जाना चाहिये जब "पूरी प्रकृति जिंदा हो जाती है, रात चली गई है, सूरज ऊग रहा है और सब कुछ जागरूक और सतर्क हो जाता है।"

निर्देश

यह ध्यान एक घंटे का है और इसके पांच चरण हैं। अपनी आँखें पूरी समय बंद रखें,यदि आवश्यक हो, तो आंखों पर पट्टी का उपयोग कर सकते है।

यह ऐसा ध्यान है जिसमें आपको लगातार सतर्क,जागरूक,सचेत रहना होगा चाहे जो भी आप करें। साक्षी बनें रहें और जब आप चौथे चरण में पूरी तरह से स्थिर , निष्क्रिय हो गये हैं, तो यह सतर्कता अपने चरम पर आ जाएगी।