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आई-मेडिटेट

 
शरीर को ढीला छोड़ दें और पूरे शरीर को कंपने दें, अनुभव करें कि ऊर्जा पैर से ऊपर की ओर उठ रही है। सब और से नियंत्रण छोड़ दें और मात्र कंपन हो जायें।

आप अपनी आँखें खुली या बंद रख सकते हैं।

OSHO Kundalini Meditation

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ओशो कुंडलिनी ध्यान को ओशो सक्रिय ध्यान की 'बहन' कहते है और यह ध्यान या तो सूर्यास्त या फिर देर दोपहर को करना चाहिये। पहले और दूसरे चरण में पूरी तरह से कंपन और नृत्य मदद करते है आपके ' पत्थर' जैसे अस्तित्व को 'पिघल' जाने मे, और जहा भी ऊर्जा का प्रवाह दमित है या ठहरा हुआ है उसे प्रवाहित करने में । फिर वह ऊर्जा बह सकती है, नाच सकती है और आनंद और खुशी में रूपांतरित हो सकती है। दूसरे दो चरण इस ऊर्जा को ऊपर की ओर बहने में मदद करते हैं जिससे मौन घटित होता है। दिन के अंत में शिथिल होने का तनाव दूर करने का अत्यंत परिणाम कारी ऊपाय है।

निर्देश

यह ध्यान एक घंटे का है और इसके चार चरण हैं।