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  • ध्यान... शीतल है
  • ध्यान… मनोरंजन है
  • ध्यान... आनंदपूर्वक जीना है
  • ध्यान… साक्षी है
  • ध्यान… मौन है
यदि आप अपने जीवन को संपूर्णता से जीना चाहते हैं तो पहले आपको अपनी संभावना के बारे में जानना होगा, यह जानना होगा कि आप कौन हैं। ध्यान इसी जानने की ओर एक कदम है। इस सजगता के विज्ञान की एक प्रक्रिया है।
 
आंतरिक विज्ञान का सौंदर्य यह है कि जो भी मार्ग तलाश रहा है, तथा अपने भीतर प्रयोग कर रहा है, यह उसे अपने एकांत में ऐसा करने में सहायता करता है। यह किसी भी बाह्य सत्ता पर निर्भरता, किसी संस्था के साथ जुड़ने की आवश्यकता को तथा किसी विचारधारा-विशेष को मानने की विवशता को समाप्त करता है। एक बार आपके कदम सध गये तो आप अपने, केवल अपने ढंग से अपने मार्ग पर चलने लगते हैं ।
कुछ ध्यान-विधियों में शांत व स्थिर बैठना आवश्यक है। परंतु हममें से अधिकतर लोगों के संग्रहीत मनोदैहिक तनाव के कारण ऐसा करना कठिन सा लगता है। इससे पहले कि हम अपनी चेतना के आंतरिक शक्ति-भंडार तक पहुंचने की आशा रखें, हमें पहले अपने तनावों से मुक्त होना होगा। ओशो ध्यान की सक्रिय -विधियोंTM का सृजन ऐसे वैज्ञानिक ढंग से हुआ है कि वे हमारे दमित भावों तथा भावनाओं को होशपूर्वक अभिव्यक्त करने तथा अनुभव करने में सहायता करती हैं व हमारी आदतों के ढांचों के प्रति सचेत होने के लिये एक नया ढंग देती हैं।
 
परंतु वास्तव में ध्यान है क्या?
और पहला कदम कैसे उठायें?

 

ध्यान...

ओशो...

और...