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About Meditation? ध्यान के ये प्रयोग मस्तिष्क पर तनाव डालते हैं, क्या समाधि के लिए विश्राम उचित न होगा?

ध्यान के ये प्रयोग मस्तिष्क पर तनाव डालते हैं, क्या समाधि के लिए विश्राम उचित न होगा?

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बिलकुल उचित है। बिलकुल जरूरी है। असल में समाधि विश्राम में ही उपलब्ध होती है। लेकिन हममें से अधिक लोग विश्राम भूल ही गए हैं, हम सिर्फ तनाव ही जानते हैं। तो हमारे लिए विश्राम का एक ही रास्ता है कि हम पूर्ण तनाव को उपलब्ध हो जाएं, जिसके आगे और तनाव संभव न हो। उस क्लाइमेक्स पर चले जाएं टेंशन और तनाव की जिसके आगे और तनने का उपाय न रहे। बस उसके बाद अचानक आप पाएंगे कि शिथिलता आ गई और विश्राम उपलब्ध हुआ। अगर मैं इस मुट्ठी को बांधता चला जाऊं, बांधता चला जाऊं, जितनी मेरी ताकत है, तो एक जगह मैं पाऊंगा कि मुट्ठी खुल गई। जहां मेरी ताकत पूरी हो जाएगी वहीं मुट्ठी खुल जाएगी।

समाधि तो विश्राम में ही उपलब्ध होगी। लेकिन विश्राम में जाने के लिए आपको पूरे तनाव से गुजरना पड़ेगा। तनाव हमारी आदत है। जैसे कि कोई आदमी रुक न सकता हो, तो उसे दौड़ाना पड़े। और वह दौड़ कर थक जाए और फिर रुकने के सिवाय कोई उपाय न रहे और वह रुक जाए। ठीक ऐसे ही। यह जो प्रयोग है, रिलैक्सेशन थ्रू टेंशन है। यह जो प्रयोग है, यह तनाव के द्वारा विश्राम का प्रयोग है। सौ में से शायद एकाध आदमी इस स्थिति में है कि सीधा विश्राम में, सीधा रिलैक्सेशन में जा सके। निन्यानबे आदमी इस स्थिति में नहीं हैं। ये निन्यानबे आदमी इतने तनाव में हैं कि अगर ये विश्राम की भी कोशिश करेंगे तो वह भी इनके लिए एक तनाव ही होने वाली है, और कुछ नहीं होने वाला है।

समझ लें कि एक आदमी को रात में नींद नहीं आ रही है। उसके पास दो उपाय हैं। एक तो वह नींद लाने की कोशिश करे। नींद लाने की कोशिश में क्या करेगा? बिस्तर पर लेटे, आंख बंद करे, करवट बदले, लाइट बुझाए, यह करे।

इस कोशिश से नींद शायद ही आए। क्योंकि नींद कोशिश से कभी नहीं आती, सब कोशिश नींद में बाधा बन जाती है। असल में नींद का मतलब यह है कि जब आप और कोई कोशिश करने में समर्थ नहीं रहे, तब नींद आती है। जब तक आप कोशिश कर सकते हैं तब तक नींद नहीं आती। तो यह रास्ता नहीं होगा।

अगर एक आदमी को नींद नहीं आ रही, तो बेहतर है कि एक चार मील का चक्कर लगा आए दौड़ कर, तनाव पूरा दे दे। इतना थक जाए कि कोशिश करने के लायक भी उपाय न रहे, बिस्तर पर लेटे तो करवट बदलने की भी इच्छा न रह जाए, तो नींद आ जाएगी। सीधे नींद लाना मुश्किल है। नींद के लाने का परोक्ष रास्ता है, इनडायरेक्ट, और वह है: थक जाना।

तो ये जो ध्यान के पहले तीन चरण हैं वे तनाव के हैं। और चौथा जो चरण है वह विश्राम का है। इसलिए मैं कहता हूं कि जो तीन में पूरी तरह दौड़ेगा और पूरी तरह थक जाएगा, वह चौथे को गहराई में उपलब्ध होगा। जो तीन में कंजूसी कर जाएंगे, चौथे चरण में वे इतने थके नहीं होंगे कि विश्राम को उपलब्ध हो सकें। इसलिए तीन में अपने को पूरी तरह थका ही डालना है।


ओशो: जो घर बारे आपना , #5

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