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About Meditation? क्या ध्यान का धर्म से कुछ लेना-देना है? -

क्या ध्यान का धर्म से कुछ लेना-देना है? -

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मैंने सारे धार्मिक अर्थों को मिटा दिया है - एक हिंदू हिंदू रह सकता है और फिर भी ध्यान कर सकता है - ताकि ध्यान बिना किसी शर्त सभी को उपलब्ध हो सके, चाहे वह हिंदू हो, यहूदी हो या ईसाई हो... कोई भी इसमें भाग ले सकता है।

इसका सौन्दर्य यह है कि यदि कोई व्यक्ति ध्यान करता है तो आज नहीं कल, उसका हिंदुत्व तिरोहित हो जाएगा। यह ध्यान के साथ उपस्थित नहीं रह सकता। अत: हिंदुत्व की चिंता क्यों करते हो जब हमारे पास एक रहस्य है जो हमारे मन के सभी अंधेरों को स्वत: मिटा देगा।

मैं ध्यान को सार्वभौमिक बनाना चाहता हूँ। यह केवल सार्वभौमिक तभी बन सकता है जब यह किसी धर्म से, किसी राजनीति से, किसी विचारधारा से जुड़ा न हो और यह जुड़ा हुआ नहीं है। यह एक साधारण विधि है। यहाँ तक कि एक अधार्मिक व्यक्ति भी इसे कर सकता है; इसमें कोई समस्या नहीं है। हम उसे परमात्मा में विश्वास करने को नहीं कहते, हम उसे किसी भी चीज़ पर विश्वास करने को नहीं कहते। हम उसे केवल यह कहते हैं, 'यह एक विधि है, जिस पर तुम प्रयोग कर सकते हो। यदि तुम्हें लगता है कि तुमने कुछ पाया, तो शुभ है, यदि नहीं, तो इसे छोड़ दो।'

और जिस किसी ने भी ध्यान के लिए प्रयत्न किया है कभी खाली हाथ वापिस नहीं लौटा।



ओशो: प्रैस कान्फ्रेंस

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