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About Meditation? मेरा उद्देश्य बहुत अद्वितीय है ...

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'और सिर्फ यहीं नहीं, लेकिन बहुत दूर तक ...
दुनिया में कहीं भी,जहां लोग
वीडियो या ऑडियो सुन रहे होंगे,
वे उसी मौन का अनुभव करेंगे।' i>

मेरा उद्देश्य इतना अद्वितीय है - मैं शब्दों का उपयोग कर रहा हूं बस मौन अंतराल बनाने के लिए। शब्द महत्वपूर्ण नहीं हैं इसलिए मैं कुछ भी कह सकता हूं : विरोधाभासी, बेतुका, असंबंधित, क्योंकि मेरा उद्देश्य सिर्फ अंतराल बनाना है। शब्द गौण हैं, उन शब्दों के बीच का मौन प्राथमिक है।

यह सिर्फ एक उपाय है ध्यान की एक झलक देने के लिए। और एक बार तुम जानते हो हैं कि यह संभव है तुम्हारे लिए, तो तुम अपने ही पास आने की दिशा में बहुत दूर तक यात्रा कर चुके होओगे। दुनिया में अधिकांश लोग नहीं मानते कि मन के लिए मौन होना संभव है। चूंकि उन्हें लगता है कि यह संभव नहीं है, वे कोशिश ही नहीं करते।

मेरे बोलने का मूल कारण यह था कि कैसे लोगों को ध्यान का स्वाद दिया जाए। तो मैं अंतहीन रूप से बोल सकता हूं - इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं क्या कह रहा हूं। सिर्फ यह मायने रखता है कि मैं तुम्हें मौन होने के कुछ मौके दे रहा हूं, जो तुम्हें शुरुआत में अपने बूते पर मुश्किल मालूम हो सकता है।

मैं तुम्हें जबरदस्ती मौन नहीं करा सकता, लेकिन मैं एक उपाय कर सकता हूं जिस में तुम सहज ही मौन हो सकते हो। मैं बोल रहा हूं, और एक वाक्य के बीच में, जब तुम एक और शब्द आने की उम्मीद कर रहे थे, कुछ भी नहीं आता, एक मूक अंतराल आता है। और तुम्हारा मन सुनने के लिए तैयार था, और कुछ आए इसका इंतज़ार कर रहा था, और उसे चूकना नहीं चाहता था - स्वभावत: वह शांत हो जाता है। बेचारा मन क्या कर सकता है? यदि यह अच्छी तरह से पता होता कि किन बिंदुओं पर मैं चुप हो जाऊंगा, तो तुम तैयारी कर सकते थे, तुम मौन नहीं होते। तो फिर तुम्हें पता है: 'यह बिंदु है जहां वह चुप होनेवाले हैं, अब मैं थोड़ा अपने आपसे बातचीत कर लूं।' लेकिन, चूंकि यह बिल्कुल अचानक आता है .... मैं खुद नहीं जानता कि कुछ बिंदुओं पर मैं क्यों रुक जाता हूं।

इस तरह से कुछ भी हो, दुनिया के किसी भी वक्ता में इस बात की निंदा की जाएगी, क्योंकि एक वक्ता अगर बार-बार रुकता है तो इसका मतलब है कि उसने अच्छी तरह से तैयारी नहीं की, उसने होमवर्क नहीं किया है। इसका मतलब है कि उसकी याददाश्त विश्वसनीय नहीं है कि कभी कभी,उसे पता नहीं चलता कि किस शब्द का उपयोग करना है। लेकिन चूंकि यह भाषण नहीं है, मैं उन लोगों के बारे में चिंतित नहीं हूं जो मेरी निंदा करेंगे , मैं तुम्हारे साथ संबंधित हूं। और यह सिर्फ यहाँ पर ही नहीं, लेकिन बहुत दूर तक।।। दुनिया में जहां कहीं भी लोग वीडियो को या ऑडियो को सुन रहे होंगे, वे उसी मौन का अनुभव करेंगे।

मेरी सफलता तुम्हें समझाने में नहीं है, मेरी सफलता है तुम्हें एक असली स्वाद देने में कि तुम विश्वास कर सको कि ध्यान महज एक कल्पना नहीं है, कि अमन की स्थिति एक दार्शनिक विचार नहीं है, यह एक वास्तविकता है; कि तुम उसे अनुभव करने में सक्षम हो, और उसके लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं है। तुम पापी होओ, या तुम एक संत होओ, - उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि पापी मौन हो सकता है,तो वह उसी चेतना को उपलब्ध होगा जैसा कि संत।


ओशो: द इन्विटेशन i>, # 14

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