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OSHO Times Body Dharma करुणा: कीमिया स्वास्थ्य का

करुणा: कीमिया स्वास्थ्य का

बस मात्र करुणा ही स्वास्थ्य प्रदान करती है, क्योंकि मनुष्य में जो भी बीमार है उसका कारण है प्रेम का अभाव। मनुष्य में जो भी ग़लत है, उसका संबंध कहीं न कहीं प्रेम से है। या तो वह प्रेम कर नहीं पाया या फिर उसे प्रेम मिला नहीं। वह स्वयं को दूसरों के साथ बांट नहीं पाया। यही है दु:ख। यह भीतर  हर प्रकार की ग्रंथियां निर्मित करता है।

 भीतर के वह घाव कई रूपों में उभर आते हैं: वह शारीरिक बीमारी बन सकते हैं, मानसिक बीमारी बन सकते हैं- लेकिन भीतर कहीं गहरे में व्यक्ति प्रेम के अभाव के कारण दु:खी है।  जैसे देह के लिये भोजन की आवश्यकता है, प्रेम की ज़रूरत है आत्मा के लिये। देह भोजन के बिना जीवित नहीं रह सकती, और आत्मा प्रेम के बिना जीवित नहीं रह सकती। सत्य तो यह है कि बिना प्रेम के आत्मा पैदा ही नहीं होती- इसके जीवित होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं।

यही कारण है कि मैं कहता हूं करुणा स्वास्थ्य प्रदान करती है। करुणा है क्या?  करुणा प्रेम का शुद्धतम रूप है। सैक्स प्रेम का निम्नतम रूप है, और करुणा उच्चतम। सैक्स में संपर्क मूलत: शारीरिक होता है, करुणा में यह आध्यात्मिक होता है। प्रेम में करुणा और सेक्स, दोनों मिश्रित हैं, दैहिक और आध्यात्मिक, दोनों मिश्रित हैं। प्रेम सैक्स और करुणा के मध्य में है।

करुणा को तुम प्रार्थना भी कह सकते हो। करुणा को तुम ध्यान भी कह सकते हो। ऊर्जा का उच्चतम रूप है करुणा। अंग्रेज़ी शब्द कम्पैशन सुंदर है: इसमें आधा पैशन(भावातिरेक) है- पैशन इतना शुद्ध हो गया है कि अब यह पैशन नहीं रहा। यह करुणा-कंपैशन-हो गया।

करुणा में तुम बस देते हो। प्रेम में तुम अनुग्रहीत होते हो क्योंकि दूसरे ने तुम्हें कुछ दिया है। करुणा में तुम अनुग्रहीत होते हो क्योंकि दूसरे ने तुमसे कुछ लिया है, क्योंकि दूसरे ने तुम्हारा तिरस्कार नेहीं किया। तुम अपनी ऊर्जा देने आये थे, तुम बहुत से फूल लेकर आये थे, और दूसरे ने तुम्हें स्वीकार किया, दूसरे को लेने में कोई संकोच न था। तुम अनुग्रहीत हो क्योंकि दूसरा ग्रहणशील था।
करुणा प्रेम का उच्चतम रूप है।

जीवन की सबसे बड़ी व्यथा यह होती है जब तुम स्वयं को अभिव्यक्त नहीं कर सकते, जब तुम संवाद नहीं कर सकते, जब तुम कुछ बांट नहीं सकते। वह व्यक्ति अत्यंत ग़रीब है जिसके पास कुछ बांटने को नहीं है या जिसके पास कुछ है लेकिन बांटने की क्षमता एवं कला खो चुका है। ऐसा व्यक्ति दरिद्र है।

कामातुर व्यक्ति अत्यंत दरिद्र है। तुलना में प्रेमपूर्ण व्यक्ति अधिक समृद्ध है। करुणावान व्यक्ति अत्यधिक समृद्ध है- वह जीवन के शिखर पर है। वह कहीं बंधा नहीं है, उसकी कोई सीमा नहीं। वह बस देता है और अपनी राह पर निकल जाता है। वह तो आपके धन्यवाद की भी प्रतीक्षा नहीं करता। वह स्वयं को अत्यंत प्रेमपूर्ण ढ़ंग से बांटता है।

जब तक तुममें करुणा नहीं घटती, मत सोचना कि तुम ठीक जीये हो या जीये भी हो।
करुणा एक खिलावट है। और जब किसी एक व्यक्ति में करुणा घटती है तो लाखों को स्वास्थ्य मिलता है। जो भी उसके नज़दीक आता है, स्वस्थ हो जाता है। करुणा थैराप्यूटिक, स्वास्थ्य प्रदान करती, है।

ए सडन क्लैश ऑव थंडर
इस विषय पर और अधिक अध्ययन करने क लिये, लायब्रेरी में जायें बस मात्र करुणा ही स्वास्थ्य प्रदान करती है, क्योंकि मनुष्य में जो भी बीमार है उसका कारण है प्रेम का अभाव। मनुष्य में जो भी ग़लत है, उसका संबंध कहीं न कहीं प्रेम से है। या तो वह प्रेम कर नहीं पाया या फिर उसे प्रेम मिला नहीं। वह स्वयं को दूसरों के साथ बांट नहीं पाया। यही है दु:ख। यह भीतर हर प्रकार की ग्रंथियां निर्मित करता है।

 भीतर के वह घाव कई रूपों में उभर आते हैं: वह शारीरिक बीमारी बन सकते हैं, मानसिक बीमारी बन सकते हैं- लेकिन भीतर कहीं गहरे में व्यक्ति प्रेम के अभाव के कारण दु:खी है।  जैसे देह के लिये भोजन की आवश्यकता है, प्रेम की ज़रूरत है आत्मा के लिये। देह भोजन के बिना जीवित नहीं रह सकती, और आत्मा प्रेम के बिना जीवित नहीं रह सकती। सत्य तो यह है कि बिना प्रेम के आत्मा पैदा ही नहीं होती- इसके जीवित होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं।

यही कारण है कि मैं कहता हूं करुणा स्वास्थ्य प्रदान करती है। करुणा है क्या?  करुणा प्रेम का शुद्धतम रूप है। सैक्स प्रेम का निम्नतम रूप है, और करुणा उच्चतम। सैक्स में संपर्क मूलत: शारीरिक होता है, करुणा में यह आध्यात्मिक होता है। प्रेम में करुणा और सेक्स, दोनों मिश्रित हैं, दैहिक और आध्यात्मिक, दोनों मिश्रित हैं। प्रेम सैक्स और करुणा के मध्य में है।

करुणा को तुम प्रार्थना भी कह सकते हो। करुणा को तुम ध्यान भी कह सकते हो। ऊर्जा का उच्चतम रूप है करुणा। अंग्रेज़ी शब्द कम्पैशन सुंदर है: इसमें आधा पैशन(भावातिरेक) है- पैशन इतना शुद्ध हो गया है कि अब यह पैशन नहीं रहा। यह करुणा-कंपैशन-हो गया।

करुणा में तुम बस देते हो। प्रेम में तुम अनुग्रहीत होते हो क्योंकि दूसरे ने तुम्हें कुछ दिया है। करुणा में तुम अनुग्रहीत होते हो क्योंकि दूसरे ने तुमसे कुछ लिया है, क्योंकि दूसरे ने तुम्हारा तिरस्कार नेहीं किया। तुम अपनी ऊर्जा देने आये थे, तुम बहुत से फूल लेकर आये थे, और दूसरे ने तुम्हें स्वीकार किया, दूसरे को लेने में कोई संकोच न था। तुम अनुग्रहीत हो क्योंकि दूसरा ग्रहणशील था।
करुणा प्रेम का उच्चतम रूप है।

जीवन की सबसे बड़ी व्यथा यह होती है जब तुम स्वयं को अभिव्यक्त नहीं कर सकते, जब तुम संवाद नहीं कर सकते, जब तुम कुछ बांट नहीं सकते। वह व्यक्ति अत्यंत ग़रीब है जिसके पास कुछ बांटने को नहीं है या जिसके पास कुछ है लेकिन बांटने की क्षमता एवं कला खो चुका है। ऐसा व्यक्ति दरिद्र है।

कामातुर व्यक्ति अत्यंत दरिद्र है। तुलना में प्रेमपूर्ण व्यक्ति अधिक समृद्ध है। करुणावान व्यक्ति अत्यधिक समृद्ध है- वह जीवन के शिखर पर है। वह कहीं बंधा नहीं है, उसकी कोई सीमा नहीं। वह बस देता है और अपनी राह पर निकल जाता है। वह तो आपके धन्यवाद की भी प्रतीक्षा नहीं करता। वह स्वयं को अत्यंत प्रेमपूर्ण ढ़ंग से बांटता है।

जब तक तुममें करुणा नहीं घटती, मत सोचना कि तुम ठीक जीये हो या जीये भी हो।
करुणा एक खिलावट है। और जब किसी एक व्यक्ति में करुणा घटती है तो लाखों को स्वास्थ्य मिलता है। जो भी उसके नज़दीक आता है, स्वस्थ हो जाता है। करुणा थैराप्यूटिक, स्वास्थ्य प्रदान करती, है।

इस विषय पर और अधिक अध्ययन करने क लिये, लायब्रेरी में जायें

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