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OSHO Times Body Dharma दांतों के संबंध में

दांतों के संबंध में

दांतों के संबंध में

यह मेरा शक है कि जहां भी बहुत ज्यादा क्रोध दबाया गया है, लोगों को दांतों की समस्याएं होती हैं। उनके दांत खराब हो जाते हैं क्योंकि वहां बहुत ऊर्जा है जिसे मुक्त नहीं किया गया है। और जो भी क्रोध का दमन करता है वह ज्यादा खाएगा। क्रोधी व्यक्ति हमेशा ज्यादा खाएंगे क्योंकि दांतों को कुछ व्यायाम चाहिए। क्रोधी व्यक्ति सिगरेट ज्यादा पीएंगे। क्रोधी व्यक्ति ज्यादा बोलेंगे; वे बहुत ज्यादा बोलनेवाले बन सकते हैं क्योंकि, किसी भी तरह जबड़े को व्यायाम चाहिए जिससे कुछ ऊर्जा मुक्त हो सके। क्रोधी व्यक्तियों के हाथों में गांठें होंगी, वे कुरूप होंगे। अगर ऊर्जा मुक्त हो सकती तो ये हाथ सुन्दर बन सकते थे।

अगर तुम कुछ भी दमन करते हो, तो शरीर में कोई न कोई अंग होता है उस भावना से जुड़ा, कोई संबंधित अंग। अगर तुम रोना नहीं चाहते, तुम्हारी आंखें अपनी चमक खो देंगी क्योंकि आंसुओं की आवश्यकता है; वे बहुत सजीव चीज हैं। कभी जब तुम रोते- चिल्लाते हो, सच में, प्रमाणिकता से तुम रोना ही हो जाते हो और तुम्हारी आखों से आंसू ढलकने लगते हैं, तुम्हारी आंखें निर्मल हो जाती हैं, तुम्हारी आंखें फिर ताजी हो जाती हैं, युवा और कुआंरी। .

इसी कारण से स्त्रियों की आंखें अधिक सुन्दर होती है, क्योंकि वे अभी भी रो सकती हैं। पुरुष ने अपनी आंखें खो दी हैं क्योंकि उन्हें गलत ख्याल है कि पुरुष को रोना नहीं चाहिए। अगर कोई भी, एक छोटा लड़का रोता है, तो मां-बाप, और सब लोग कहते हैं यह क्या कर रहा है? क्या तू लड़की है? क्या बकवास, क्योंकि ईश्वर ने पुरुष, स्त्री सबको समान रूप से अश्रु ग्रंथियां दी हैं। अगर पुरुष को रोना ना होता, तो कोई अश्रु ग्रंथि ना होती। साधारण गणित। पुरुष में उसी अनुपात में अश्रु ग्रन्थियां क्यों हैं जितनी कि स्त्रियों में? आंखों को रोने-धोने की जरूरत है, और यह वाकई सुन्दर है अगर तुम दिल खोलकर रो सको।

ध्यान रहे, यदि तुम दिल खोलकर रो नहीं सकते तो तुम हंस भी नहीं सकते, क्योंकि वह उसका विपरीत ध्रुव है। जो लोग हंस सकते हैं वे रो भी सकते हैं; जो लोग रो नहीं सकते वे हंस भी नहीं सकते। और तुमने बच्चों का कभी यह निरीक्षण किया होगा: कि यदि वे जोर से और देर तक हंसते हैं तो वे रोना शुरु कर देते हैं…क्योंकि ये बातें जुड़ी हैं। गांव में मैंने मांओं को बच्चों को कहते सुना है, ज्यादा हंसो मत, नहीं तो तुम रोना शुरु कर दोगे। यह बिल्कुल सच है, क्योंकि यह घटना अलग नहीं है, बस वही ऊर्जा दूसरे ध्रुव पर चली जाती है…

ओशो, योगा: ए न्यू डाइरेक्शन, प्रवचन #7

 

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