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Osho on Osho

स्मरण रहे, मैं तुम्हें कोई दूसरा सपना नहीं दे रहा। तुम इसके पीछे दौड़ते हो। तुम चाहोगे कि मैं तुम्हें एक और सपना दूं लेकिन मैं तुम्हें कोई सपना नहीं दूंगा। तभी तो मेरे साथ होना कठिन व दुष्कर है - क्योंकि मैं तुम्हें जागने के लिये विवश कर रहा हूं। बहुत हो चुका। तुमने बहुत सपने देखे; आदिकाल से तुम सपने देख रहे हो। तुम बस सपनों को बदल रहे हो। जब एक सपने से तुम्हारा मन भर जाता है तो तुम इसे बदलने लगते हो; तब तुम दूसरा सपना देखने लगते हो। मेरा पूरा प्रयास है कि तुम्हें झंझोड़ दूं, तुम्हें झकझोर दूं - ताकि तुम जाग जाओ।