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Osho on Osho

अब तक किसी ने यह नहीं कहा कि संबोधि के परे भी कुछ है। तभी मैं कहता हूं कि मैं मील - पत्थर हूं। मेरे साथ चेतना के इतिहास में एक और अध्याय जुड़ गया है। संबोधि अब एक शुरुआत होगी न कि अंत। प्रचुरता के सभी आयामों में शुरुआत की एक अनवरत प्रक्रिया।