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Osho on Osho

मैं तुम्हें झूठे, खोखले व व्यर्थ शब्दों से सांत्वना नहीं देना चाहता और न ही मानवता को प्रेम करने को विवश करना चाहता हूं। तथाकथित धर्मों ने कितनी पीढ़ियों से यही किया है। मैं यहां हूं तुम्हें वास्त्विक व्यक्तियों, अपने आस - पास अपने लोगों को प्रेम देने को प्रेरित करने के लिये - मनुष्यता नहीं अपितु मनुष्य जो तुम्हारे आस -पास रहते और काम करते हैं. मनुष्यता एक शब्द-मात्र है; मात्र एक नाम। तुम्हें मानवता या मनुष्यता कहीं नहीं मिलेगी। और इसीलिये मानवता को प्रेम करना आसान है क्योंकि इसमें बस शब्द-खिलवाड़ से काम चल जाता है।