Quantcast

Osho Osho On Topics शास्त्र

शास्त्र का सम्यक उपयोग भी है, असम्यक उपयोग भी। शास्त्र को जो अंधे की तरह स्वीकार कर ले, शास्त्र उसके लिए बोझ हो जाता है। शास्त्र को जो समझे, शास्त्र को जो निष्पक्ष होकर विचार करे, शास्त्र को जो जागरूक होकर ध्यान करे, तो शास्त्र से बड़ी सुगंध उठती है, बड़ी मुक्तिदायी सुगंध उठती है। शास्त्र को पकड़ना मत--सोचना। शास्त्र को अंधे की तरह स्वीकार मत करना। अंधे की तरह स्वीकार करने में शास्त्र का अपमान है। आंख खोलकर, शास्त्र में उतरना, शास्त्र को स्वयं में उतरने देना--तो शास्त्र का सम्मान है। कोई भी सदगुरु तुम्हें अंधा नहीं बनाना चाहता है। क्योंकि वस्तुतः तो, तुम्हारी आंख में ही तुम्हारा गुरु छिपा है। तो सभी सदगुरु तुम्हारी आंख खोलना चाहते हैं। उतनी ही देर तुम्हारे साथ होना चाहते हैं कि तुम्हारी आंख खुल जाये, कि तुम्हें अपने भीतर का गुरु मिल जाये।

जिन-सूत्र प्रवचन 11