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Osho Osho On Topics संप्रदाय

संप्रदाय

बुद्ध-पुरुषों के पास होना सौभाग्य है। लेकिन उनकी लीक पर चल पड़ना दुर्भाग्य है। उनसे तुम बुद्धत्व सीखना, आचरण नहीं। उनके जीवन की बाह्म रूपरेखा को तुम अपने जीवन का नक्शा मत बनाना। क्योंकि एक व्यक्ति के जीवन की बाह्य रूपरेखा दूसरे के लिए कारागृह सिद्ध होती है। क्योंकि तुम पृथक हो, तुम भिन्न हो। तुम बस, तुम ही जैसे हो। तो किसी भी दूसरे के नक्शे से अगर तुमने अपने जीवन का ढांचा बनाया, तो तुम्हारा अपना ढांचा कुंद हो जाएगा। तुम्हारे अपने विकसित होने की संभावनाएं क्षीण हो जाएंगी। वह दूसरा तुम्हारे लिए कारागृह बन जाएगा। और पत्नी क्या कारागृह बनेगी? पति क्या कारागृह बनेंगे? बुद्ध-पुरुषों के पास कारागृह निर्मित कर लेना बहुत आसान है। दुनिया के सभी कीमती कारागृह बुद्ध-पुरुषों के आसपास निर्मित हुए हैं। उनका नाम चाहे इस्लाम हो, चाहे हिंदू हो, बौद्ध हो, चाहे जैन हो। ये जो बड़े-बड़े कारागृह हैं--संप्रदायों के, ये बुद्ध-पुरुषों के पास निर्मित हुए हैं। और बुद्ध-पुरुषों के पास जब कोई कारागृह निर्मित होता है, तो वह करीब-करीब स्वर्ण का है। उसे छोड़ने का मन भी न होगा। उससे तुम चिपटोगे, उसे तुम पकड़ोगे। और इन कारागृहों के बाहर किसी भी संतरी को खड़ा करने की जरूरत नहीं है। तुम खुद ही भागना न चाहोगे। इस बात को स्मरण रखना।

सहज समाधि भली प्रवचन 6