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Osho Osho On Topics भीड़

भीड़

मैं दुनिया में किसी तरह की भीड़ नहीं चाहता। तुम चाहे धर्म के लिए इकट्ठे हुए, या देश के नाम पर, या वर्ग के नाम पर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। भीड़ गंदी चीज है, और भीड़ ने दुनिया में बहुत बड़े-बड़े अपराध किए हैं, क्योंकि दुनिया में चेतना नहीं है। यह सामूहिक बेहोशी है।

चेतना तुम्हें निजता देती है--एकांत में देवदार का हवा के साथ नाचना, एकांत में बर्फ से ढंके पहाड़ के ऊंचे शिखर पर चमकता सूरज अपने पूर्ण वैभव और सुंदरता के साथ, अपने महानतम सौंदर्य के साथ अकेले सिंह दहाड़ जो घाटी में गूंजती चली जाती है।