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Osho Osho On Topics देना

देना

प्रेम तब निर्दोष होता है जब उसमें कोई वजह नहीं होती। प्रेम निर्दोष होता है जब यह और कुछ नहीं बस ऊर्जा का बांटना होता है। तुम्हारे पास बहुत अधिक है, इसलिए तुम बांटते हो... तुम बांटना चाहते हो।

और जिसके साथ भी तुम बांटते हो, तुम उसके प्रति अनुग"ह महसूस करते हो, क्योंकि तुम बादल की तरह थे--बरसात की पानी से बहुत भरे हुए--और किसी ने तुम्हें हल्का होने में मदद की। या तुम फूल जैसे थे, खुशबू से भरे हुए, और हवा आकर तुम्हें हल्का कर देती है। या तुम्हारे पास गाने के लिए गीत है और किसी ने ध्यानपूर्वक सुना...इतना ध्यानपूर्वक कि तुम्हेंे गाने का अवसर दिया। इसलिए जो कोई भी तुम्हें प्रेम में बहने में मदद करता है, उसके प्रति अनुग"ह आता है। आत्मसात करने की वह भावना अपनी जीवन शैली बन जाने दो, बिना कुछ लेने की बात सोचे देने की काबिलियत, बेशर्त देने की क्षमता, तुम बस देते हो क्योंकि तुम्हारे पास अधिकता है।