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Osho Osho On Topics मन के दृष्टा

मन के दृष्टा

मन को देखो और देखो कि वह कहांहै, वह क्याहै। तुम पाओगे कि विचार तैर रहे होंगे और वहां पर अंतराल भी होंगे। और यदि तुम थोड़ी देर देखो, तुम देखोगे अंतराल विचारों से अधिक हैं, क्योंकि प्रत्येक विचार दूसरे विचार से विभक्तहै; सच तो यहहै कि प्रत्येक शब्द दूसरे से विभक्तहै। जितना तुम गहरे जाओगे, तुम उतने ही अधिक से अधिक अंतराल पाओगे, बड़े से बड़े अंतराल। एक विचार तैरताहै और फिर अंतराल आताहै जहां कोई विचार नहीं होता; तब फिर एक और विचार आताहै, एक और अंतराल उसका अनुसरण करताहै।

यदि तुम बेहोश हो तो तुम अंतराल नहीं देख सकते; तुम एक विचार से दूसरे विचार पर छलांग लगाते हो, तुम कभी भी अंतराल नहीं देखते। यदि तुम सचेत होओ तो तुम अधिक से अधिक अंतराल देखोगे। यदि तुम पूरी तरह से सचेत हो जाओ, मीलों लंबे अंतराल तुम पर प्रकट होंगे। और इन अंतरालों में सतोरी घटतीहै। उन अंतरालों में सत्य तुम्हारे द्वार खटखटाताहै।