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Osho Osho On Topics कालातीतता

कालातीतता

मनुष्य यहां पर बहुत लंबे समय से चला आ रहा तीर्थयात्रीहै। यहां कोई भी नया नहींहै। हम सभी यहां बहुत पुराने यात्री हैं। तुमने मानव चेतना के सारे विकास को देखाहै। तुम उसके हिस्से रहे हो। हम हमेशा यहां रहे हैं--अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग शरीरों में, अलग-अलग चीजें करते हुए, लेकिन हम यहां रहे हैं। और हम यहां हमेशा रहने वाले हैं। अस्तित्व से चले जाने का कोई मार्ग नहींहै। अस्तित्व से कुछ भी समाप्त नहीं किया जा सकता और न ही अस्तित्व में कुछ जोड़ा जा सकताहै। अस्तित्व हमेशा ठीक ऐसा हीहै।

यह अंतर्दृष्टि तुम्हें समयातीत ले जातीहै--और समयातीत होना दुखों के पार होनाहै। कालातीत को जानना आनंद के जगत में प्रवेश करनाहै। तुम पुरातन हो, कालातीत हो, अनंत हो। इसलिए छोटी-छोटी बातों के लिए डरने की कोई जरूरत नहींहै, सांसारिक बातों की नाहक चिंता लेने की कोई जरूरत नहींहै। वे आती-जाती रहती हैं। तुम सदा बने रहते हो। ध्यान रहे कि जो सदाहै, वह न तो कभी आताहै, न ही कभी जाताहै। वह अनंतहै, और वह तुम्हारे भीतर ऐसे हीहै जैसे कि सभी के भीतरहै।