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Osho Osho On Topics स्व नहीं

स्व नहीं

जब विचार रुक जाते हैं, तुम कौन हो? एक संपूर्ण खालीपन, शून्यता, बिना-चीजों के। इसी कारण बुद्ध ने अजीब शब्द का उपयोग किया। उनके पहले कभी किसी को इसका विचार भी आया, या बाद में भी। रहस्यदर्शी हमेशा ही तुम्हारी चेतना के अंतस्थ मर्म के लिए "स्व' शब्द का उपयोग करते रहे। बुद्ध ने "नो-सेल्फ।' स्व-नहीं शब्द का उपयोग किया। और मैं उनके साथ पूरी तरह से राजी हूं। वह अधिक अचूक हैं, सत्य के अधिक करीब। "स्व' शब्द का उपयोग करना अहंकार का अहसास देता रहता है।

बुद्ध आत्मा शब्द का उपयोग नहीं करते, अत्ता--"स्व।' वे इसके ठीक विपरीत शब्द का उपयोग करते हैं:"स्व-नहीं।' अनात्मा, अनत्ता। वे कहते हैं कि जब मन रुक जाता है, तब वहां स्व नहीं बचता। तुम ब्रह्मांड बन गए, तुम अहंकार की सीमाओं से पार हो गए। तुम शुद्ध अवकाश बचे, किसी भी चीज से प्रदूषित हुए बिना। तुम बस आइना हो गए कुछ भी प्रतिबिंबित नहीं करते हुए।