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Osho Osho On Topics तादात्म्य नहीं

तादात्म्य नहीं

इसे अपनी कुंजी बन जाने दो--अगली बार जब क्रोध आए, बस उसे देखो। मत कहो, "मैं क्रोधित हूं।' कहा, "क्रोध यहां है और मैं उसका दृष्टा हूं।' और फर्क देखना! फर्क बहुत बड़ा होगा। अचानक तुम क्रोध की पकड़ से बाहर हो गए। यदि तुम कह सको, "मैं बस देखने वाला हूं, मैं क्रोध नहीं हूं,' तुम उसकी पकड़ से बाहर हो गए। जब उदासी आए, बस एक तरफ बैठ जाओ और कहो, "मैं देखने वाला हूं, मैं उदासी नहीं हूं,' और फर्क देखना। तत्काल तुमने उदासी की जड़ काट दी। वह और अधिक पोषित नहीं हो रही। वह भूख से मर जाएगी। हम इन विभिन्न भावनाओं से तादात्म्य बना कर पोषित करते हैं।

यदि धार्मिकता को एक अकेली बात में सिकोड़ा जा सके, तो वह है तादात्म्य का न होना।