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Osho Osho On Topics बुद्धिमत्ता

तुम्हारा मन बुद्धिमत्ता नहीं है।
हो सकता है कि यह अजीब लगे लेकिन यह सच है, तुम्हारा मन बुद्धिमत्ता नहीं है। मन बौद्धिक हो सकता है, जो कि बुद्धिमत्ता का बहुत ही गरीब परिपूरक है। बौद्धिकता यांत्रिक है। तुम बहुत बड़े विद्वान बन सकते हो, बहुत महान प्रोफेसर--बस शब्दों के साथ खेलते हो जो कि सभी उधार के हैं, विचारों को व्यवस्थित और पुनः व्यवस्थित करते हैं, उनमें से कोई भी तुम्हारे नहीं है।
बौद्धिकता पूरी तरह से दीवालिया है। उसके पास अपना कुछ भी नहीं है, सब कुछ उधार लिया हुआ है। और बुद्धिमत्ता और बौद्धिकता में यही फर्क है। बुद्धिमत्ता तुम्हारी जन्मजात गुणवत्ता है।