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प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न

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प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न

 
 
 
 
यहां रहने से मुझे क्या लाभ हो सकता है?
 
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एक मनमोहक परिवेश में विश्रांति और मस्ती का स्वाद...साथ ही आपके जीवन में जागरूकता जगाने का इससे बेहतर कोई स्थान नहीं है। यदि आप ध्यान के लिये नये हैं तो ओशो ऑडिटोरिअम में होने वाले   ध्यान कार्यक्रम  में से किसी भी विधि पर प्रयोग कर सकते हैं। उदाहरण के लिये सैंकड़ों और लोगों के साथ सुबह छ: बजे ओशो सक्रिय ध्यान करना दिन को प्रारंभ करने का एक अदभुत ढंग है! कार्यक्रम में पारंपरिक विपस्सना से नृत्य ध्यान और ओशो कुंडलिनी तक बहुत सी सक्रिय विधियां हैं।  

या फिर आप ओशो मल्टीवर्सिटी के सैंकड़ों   कोर्स और वर्कशॉप, में भाग ले सकते हैं जो व्यक्ति को मन से अ-मन तल ले जाने में सेतु बनती हैं। दिन का अलौकिक समय है   सांध्य सभाका जिसमे नृत्य, उत्सव और मौन अनुभव करने का एक अदभुत अवसर मिलता है जब आप "बिना प्रयास के जागरूक" हो सकते हैं जो कि ध्यान का सार-सूत्र हैं।

 
 
यहां किस प्रकार के लोग आते हैं?
 
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यहां आये लोगों को किसी वर्ग में रखने का कोई रास्ता नहीं है। वे एक सौ से भी अधिक देशों से आते हैं, हर उम्र के हैं और समाज के हर व्यवसायिक स्तर से। औसत उम्र तीस के आसपास है। हालांकि अधिकतर आगंतुकों के पास यूनिवर्सिटी की डिग्री होती है, लेकिन अ-मन की अवस्था में जाने के लिये इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती। और बेहतर होगा यदि आप जान लें कि आने वालों में पचास प्रतिशत लोग यहां पहली बार आये होते हैं... तो यदि आप सोचते हैं सब एक-दूसरे को जानते हैं, तो ऐसा नहीं है।

 
 
लोग यहां क्यों आते हैं?
 
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कुछ लोग इसलिये आते हैं क्योंकि उन्होने सुना होता है कि रिज़ॉर्ट जीवन का मज़ा लेने का बेहतरीन स्थान है, दूसरे मल्टीवर्सिटी के कोर्स करने आते हैं और बहुत से संयोगवश यहां आ जाते हैं। विश्व का ध्यान और व्यक्तिगत विकास का विशालतम केंद्र होने के कारण यह स्वाभाविक है कि हर प्रकार के लोग यहां खिंचे चले आयें।

नये मनुष्य की दृष्टि पर आधारित ओशो मैडिटेशन रिज़ॉर्ट एक ऐसा स्थान है जहां "ज़ोरबा द बुद्धा" के प्राकृतिक गुणों को पल्लवित करने का एक सुअवसर मिलता है- एक ऐसा व्यक्ति जिसके पांव तो धरती पर हैं लेकिन जो सितारों को छू सकता है, एक ऐसा व्यक्ति जो नृत्य और गीत गाने में अत्यंत रुची रखता है और साथ ही मौन रहने में भी। या टॉम रॉबिन्स के शब्दों में, "वह व्यक्ति जो धन की महत्व भी समझता है और धर्म का भी ।" आप यहां यह दोनों तत्व पायेंगे। और इंद्रधनुष के सब रंग! आप जो कोई भी हों, जो भी हो आपकी रुचि, इस बगिया में आपके लिये स्थान है आनंदित होने का और खुलने, खिलने का। बात है अनुभव की।

 
 
क्या यहां आने के लिये मुझे किसी विशेष अनुभव की आवश्यकता है?
 
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जी नहीं।

 
 
क्या यहां किसी प्रकार की सदस्यता दी जाती है?
 
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जी नहीं। न तो कोई सदस्यता है न किसी के साथ जुड़ने की व्यवस्था। आपने लोगों को "सन्यास" दीक्षा के बारे में बात करते सुना होगा। यह पूर्णतया एक व्यक्तिगत मामला है। सारी ज़िंदगी "माधुरी" नाम से जीने के बाद दूसरे नाम में दीक्षित होना आपकी पुरानी आदत को तो तोड़ता ही है साथ ही देता है सुअवसर स्वयं से प्रतिबद्ध होने का कि अब जीवन की कार्यसूचि में ध्यान सर्वोपरि होगा।  

सन्यास के बारे में ओशो का कहना है," निश्चित ही दीक्षित होने का अर्थ है कि तुमने जोख़िम भरे जीवन में प्रवेश किया। तुमने मुझे अपने अंधकार में एक मित्र की भांति स्वीकार किया और गहन श्रद्धा से अपना हाथ मुझे दे दिया।...लेकिन मैने कभी किसी के जीवन में कोई हस्तक्षेप तक नहीं किया। उत्तरदायित्व केवल तुम्हारा है- मैं पूर्णतया इससे बाहर हूं। तुम्ही दीक्षित हुए हो और अपने जीवन को रूपांतरित करने के लिये अर्पित करना भी तुम्हारी ही पहल है। पर पूरा कृत्य और इसके साथ जुड़ा उत्तरदायित्व तुम्हारा है। ...लेकिन जब तक तुम इतने साहस्स से कदम नहीं उठाते, तुम प्रौड़ न हो पाओगे।"

 
 
क्या मुझे किसी के साथ जुड़ना होगा?
 
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अगर किसी के साथ जुड़ना ही है तो स्वयं से। "किसी के साथ जुड़ना" वस्तुत: उससे पूर्णतया विपरीत है जो यहां घट रहा है। ध्यान का अर्थ ही है अकेले होना सीखना। ओशो का कहना है,  
" सत्य की खोज में अकेलापन तुम्हारा ही मार्ग नहीं है, बल्कि सबका मार्ग है। यही एकमात्र मार्ग है।"  
और:  
"मेरा पूरा कार्य विध्वंस करना है, तुमसे जुड़े सब असत्यों का विनाश करना और कुछ प्रतिस्थापित करने का नहीं बल्कि तुम्हें तुम्हारे अकेलेपन में निपट अकेला छोड़ देने का। मेरे देखे केवल अपने अकेलेपन में ही तुम सत्य पा सकोगे- क्योंकि तुम्हीं सत्य हो। सत्य पाने के लिये तुम्हें कहीं जाना नहीं है। न ही जीसस तुम्हें दे सकते हैं, न ही कृष्ण, न ही बुद्ध, न ही मैं तुम्हें दे सकता हूं। यह कोई वस्तु नहीं है जो कोई तुम्हें दे सकता है।"  

और इसके लिये साहस की आवश्यकता है,सच तो यह है कि यह बहुत भयभीत करने वाला हो सकता है। यह रिज़ॉट एक ऐसा माहौल प्रदान करती है जहां आप घबड़ाते नहीं क्योंकि बहुत से लोग अकेला होना सीख रहे हैं, और "इकट्ठे अकेला" होना राह को सहज भी बना देता है और आनंदपूर्ण भी।

 
 
मरून रोब पहनने का क्या कारण है?
 

��रून रोब दिन में पहने जाते हैं और ध्यान के समय। यह एक एकाग्रता का महौल पैदा करते हैं और सहायक होते हैं ध्यान को बाहर से हटाकर भीतर की ओर ले जाने में। जब एक साथ ध्यान में बैठे बहुत से लोग मरून रंग पहनते हैं तो एक सामूहिक ध्यान उर्जा निर्मित होती है। और सुबह कपड़ों के चुनाव के झंझट से भी छुटकारा! ढीले रोब यहां के गर्म मौसम में ध्यान के लिये अत्यंत सुविधाजनक हैं और आपको बैल्ट तथा टाई इत्यादि नहीं लगानी पड़ती।

 
 
एच.आई.वी./ एड्स टैस्ट क्यों?
 
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एड्स को लेकर ओशो की दृष्टि अलग हटकर है। प्रारंभ से ही जब अभी यह प्रमाणित भी नहीं हुआ था कि इस संक्रामक बीमारी का स्रोत वायरल है, ओशो को यह स्पष्ट था कि यह एक "साधारण रोग" से कहीं अधिक है और एक महामारी की तरह फैल सकता है। उन प्रारंभिक दिनों से ही उनका यह मार्ग दर्शन था कि इसका टैस्ट नियमित रूप से होना चाहिये और सुरक्षित सैक्स के लिये सब उपलब्ध उपकरणों को प्रयोग में लाना चाहिये।   ओशो की सैक्स के प्रति दृष्टि  भी असाधारण है।  

एच आई वी/ एड्स टैस्ट आपके आगमन पर स्वागत कक्ष (वैलकम सैंटर) में होते हैं और रिज़ल्ट 15मिनट के भीतर आ जाते हैं। प्रवेश के लिये नैगेटिव रिज़ल्ट आवश्यक है।

 
 
मैं कहां ठहर सकता हूं?
 
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नया   ओशो गैस्ट हाउस  अब खुला है और ठहरने के लिये एक आदर्श स्थान है। रिक्शा या ट्रैफिक की झंझट में बिना उलझे आप परिसर में ही रह सकते हैं सब गतिविधियों के नज़दीक। विकल्प यह भी है कि आप नज़दीक ही किराये पर अपार्टमैंट/ कमरा ले लें। वैलकम सैंटर में इसकी सूचना उपलब्ध है।

 
 
मूल्य?
 

��ैडिटेशन पास से आप प्रात:5:30 से देर रात तक परिसर में रह सकते हैं और ओशो तीर्थ पार्क में विचर सकते हैं। ओशो ऑडिटोरियम में होने वाले सब ध्यान कर सकते हैं और नाईट लाइफ में सम्मिलित हो सकते हैं।

प्रवेश का दर

प्रति दिन के प्रवेश स्टिकर में पूरे दिन का ध्यान कार्यक्रम (आठ ध्यान) और बुद्ध ग्रोव के खुले क्लास शामिल हैं। प्रवेश पास आप या तो एक से दस दिन के लिए या फिर सीधे तीस दिन के लिए खरीद सकते हैं। 

एक या दो दिन के लिए प्रवेश फीस भारतीय व्यक्ति के लिए होगी रु 760/- ।

तीन से दस दिन के लिए प्रवेश स्टिकर खरीदने पर प्रवेश फीस होगी रु 570/- प्रति दिन।

भारतीय व्यक्ति के लिए तीस दिन के इकट्ठे स्टिकर खरीदने पर कीमत होगी रु 570/- प्रति दिन। महीने भर की कीमत होगी रु 13,680/-,

कम कीमत वाले 3,5 और 10 दिन के प्रवेश स्टिकर वेलकम सेंटर पर उपलब्ध हैं और वे उसी दिन से या अगले दिन से लागू होंगे।

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 अब बाशो में एक नई स्पा की सुविधा है जिसमें तैरना, जकुज़ी, सौना,टेनिस इत्यादि उपलब्ध है।उसका शुल्क  
है रु 280/- प्रति दिन
 

  • यहां क्लिक करें आज की विनिमय दर देखने के लिये
    • होटल की कीमतें स्वभावत: अलग अलग होती हैँ। ओशो अतिथिगृह में एक सुसज्जित आधुनिक वातानुकूलित कमरे की कीमत है रुपये 4,900/- 15 दिसम्बर तक।/15 दिसम्बर 2014 से लेकर 28 फरवरी 2015 तक कीमत होगी रुपये 6,400/- जानकारी और आरक्षण के लिए यहाँ क्लिक करें। आसपास के होटल की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करेँ।
      होटल की सँख्या कम है, फिर भी रहने के लिए आपके बजट के अनुसार आवास मिल जाता है। अच्छा होगा कि जल्दी आरक्षण करवाएँ।
      एक अपार्टमेंट में एक कमरे के लिए प्रतिमाह लगभग रुपये 8,000 – 22,000 /अमरीकी डालर 250 – 500 USD / या यूरो 180 -350 होगा। वह कौन सा मौसम है इसके आधार पर तय होता है। सामान्यतया गर्मियों के महीनों के दौरान आवास काफी सस्ता होता है।

      बाहर खाने की कीमत अलग-अलग होती है। दो व्यक्तियोँ का भोजन सामान्य होटल मेँ लगभग रुपये 200 से 400 तक हो सकता है।

      बाहर महीने भर रहना, खाना रुपये 15,000 -25,000 के बीच हो सकता है। इसके अलावा मल्टीवर्सिटी के कोर्सेस और कार्यशालाओं मेँ सहभागी होने की कीमत अलग से होगी।

 
 
ध्यान मेरे जीवन को कैसे प्रभावित कर सकता है?
 
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तनाव की जड़ है "बनना"। कोई इंगलैंड में पैदा हुआ है और अपना पूरा जीवन एक अच्छा अंगरेज़ बनने में बिता देता है। कोई दूसरा जापान में पैदा हुआ है और पूरा जीवन अपने सम्मज की मान्यताओं, आकांक्षाओं को पूरा करने में व्यतीत कर देता है।  

विश्रांति संभव है मात्र "होने" में न कि "बनने"की कोशिश में। अर्थात वैसा होने में जैसा अस्तित्व ने तुम्हें चाहा है। दूसरे शब्दों में: बस स्वयं हो रहना।  

ध्यान करने से आप अपने समाज द्वारा दिये गये संस्कारों से मुक्ति पा सकते हैं। धीरे-धीरे प्रामाणिक "आप" से आपका साक्षत्कार होता है।  

यदि आप चिकित्सक बनना चाहते हैं तो किसी मैडिकल कॉलेज में जाते हैं,और इंजीनियर बनना चहते हैं तो इंजीनियरिंग कॉलेज जाते हैं। लेकिन यदि स्वयं होना चाहते हैं तो कहां जायेंगे? ओशो मैडिटेशन रिज़ॉर्ट की यही विशेषता है।

 
 
विभिन्न ध्यान विधियों का क्या उद्देश्य है?
 
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प्रत्येक व्यक्ति भिन्न है, किसी दूसरे के समान नहीं बल्कि बेजोड़। और विभिन्न ध्यान विधियां विभिन्न व्यक्तियों के लिये उपयुक्त होती हैं। अंतत: उद्देश्य तो यह है कि कैसे " बिना किसी प्रयास के बोधपूर्ण कैसे हुआ जाये"-चाहे आप किसी बिज़िनैस मीटिंग के तनाव भरे माहौल में हैं अथवा ढलते सूर्य को निहार रहे हैं। और यह तभी संभव है जब आप मौन और अनासक्त स्वयं के भीतर और बाहर जो घट रहा है, उसके प्रति साक्षी हो पायें। इसे कई बार "चुनावरहित सजगता" भी कहा जाता है।  

इस "ग़ुर" को सीखने का सर्वोत्तम ढंग है उस ध्यान को चुन लेना जिसके साथ आप संगीतमय संबंध अनुभव करते हैं,जिसके साथ आप अच्छा अनुभव करते हैं, जो आपको आनंदित करता है। प्रारंभ करने के लिये ओशो ध्यान की सक्रिय विधियां सर्वश्रेष्ठ हैं बजाय इसके कि आप अपने विचारों का अनुसरण करें और बस "बैठ" जायें। फिर आप यहां उपलब्ध ध्यान विधियों की लंबी सूची में से वह ध्यान चुन सकते हैं जो आपके साथ जाता है।  

ध्यान संबंधी प्राय: पूछे जाने वाले और प्रश्न.

 
 
क्या ओशो गुरु हैं?
 
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ओशो गुरु तो हैं ही नहीं बल्कि उनका पूरा प्रयास है "गुरु आडंबर" को मिटा देना।  

उनकी दृष्टि है कि कहीं गहरे में हम सब चाहते हैं कि कोई दूसरा हमें बताये हमें क्या करना चाहिये- "भेड़ें और चरवाहा" संलक्षण। लेकिन बजाए इसके कि हम किसी की प्रतीक्षा करें, किसी मसीहा की जो आये और हमारा उद्धार करे, हर व्यक्ति को यह समझना है कि हमारे जीवन का पूर्ण उत्तरदायित्व हमारा है। और इस पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ ही आती है पूर्ण स्वतंत्रता।  

और ओशो के बारे में? इसे ऐसे समझें: प्रत्येक व्यक्ति अनूठा है।  

हम सब को अपनी यात्रा पर स्वयं चलना है, कोई दूसरा हमरे लिये नहीं चल सकता। यह अंतर्यात्रा है और हमें कोई नहीं मिलने वाला। इस अनोखी यात्रा पर, इस विशेष यात्रा पर पहले कोई नहीं गया और न ही भविष्य में कोई जायेगा। यह अनजानी राह है और संभव है वहां अंधेरा हो, हम अपनी राह भूल जायें। क्या यह शुभ न होगा कि हम दीया जला लें। निश्चित ही। लेकिन दीये को हम ही पकड़ेंगे, दीया हमें नहीं पकड़ेगा। यह हमारे मार्ग में उजाला तो कर सकता है लेकिन हमारा मार्गदर्शन नहीं कर सकता। यह हमने स्वयं सीखना है,जोखिम स्वयं हमने उठाना है। जोखिम भरे जीवन का एक आनंद है।  

ओशो कहते हैं:"तीर्थयात्रा स्वयं में ही लक्ष्य है", और कि," मेरा प्रयास है तुम्हें ध्यान में अकेला छोड़ देना, जहां तुम्हारे और अस्तित्व के बीच कोई मध्यस्त न हो।"

 
 
बच्चों के बारे में क्या पॉलिसी है?
 
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अनुभव से हमने यह जाना है कि जो मां-बाप अपने छोटे बच्चों के साथ यहां आते हैं उनके लिये यह मुश्किल हो जाता है कि ध्यान करें अथवा बच्चों को संभालें। ओशो मैडिटेशन रिज़ॉर्ट वयस्कों के विकास के लिये एक स्थान है जहां बच्चों और नाबालिगों के लिये पर्याप्त सुविधायें नही हैं।

बच्चों और मा-बाप के परिपेक्ष्य में रिज़ॉर्ट को "वयस्क शिक्षा" सुविधा कहा जा सकता है।रिज़ॉर्ट में ध्यान करना, मल्टीवर्सिटी के कार्यक्रमों में भाग लेना और साथ ही बच्चों का ध्यान रखना कठिन है। बेहतर यही है कि बच्चों के बिना आया जाये। तभी आप अपने समय का सदुपयोग कर सकते हैं और अपने विकास करने पर लगा सकते हैं। यह विकास आपके बच्चों के लिये भी लाभदायक हो सकता है।

विस्तृत जानकारी के लिये यहां क्लिक करें

 
 
क्या यह संभव है कि कुछ दिनों के लिये ही कार्यक्रमॉ में सम्मिलित हुआ जा सके?
 
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जी हां, आप जितने दिनों के लिये चाहें आ सकते हैं। मैडिटेशन रिज़ॉर्ट में हो रही गतिविधियों से आपको अवगत करवाने के लिये "स्वागत सुबह" (Welcome Morning) का आयोजन किया गया है। इसमें आपको परिसर का भ्रमण करवाया जाता है, और यहां हो रहे ध्यान विधियों के प्रयोग के बारे में जानकारी दी जाती है। ओशो मल्टीवर्सिटी कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी जाती है और आप व्यक्तिगत रूप में इनका अनुभव भी कर पाते हैं। यह कार्यक्रम मैडिटेशन रिज़ॉर्ट में नियमित रूप से हर रोज़ होता है और यदि आप 9:00 - 9:15 के बीच मैडिटेशन रिज़ॉर्ट में आ जाते हैं तो अपना नाम रजिस्टर करवा के उसी दिन इसमें सम्मिलित हो सकते हैं।

 
 
Can I just come and look around?
 
Y

es, you are welcome to come to see our Osho Multimedia Galleria which you can access from the road near the main gate. It is open from 9am to 1 pm and between 2-4 pm. To actually enter the campus you will need to be a participant. If you wish to participate in the Meditation Resort, then you can come to the Welcome Center between 9-12.30 am or between 2 -3.30 pm so you can register as a participant. You can also visit the Osho Teerth Park without registering at the Welcome Center between 6 am and 9 am and in the afternoon between 3 pm and sunset which is about 6 to 6.30 pm.