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Facilities & Services Basho Spa

एक आध्यात्मिक विश्राम-गृह, बीस्तरो(लघु क्लब सुविधा), टैनिस कोर्ट और तैरने के लिये ताल - क्यों नहीं! 

ओशो की दृष्टि में एक पूर्ण मानव वह है जो भौतिक और आध्यात्मिक, दोनों ही जगत में मज़े से है। इस संकल्पना का क्रांतिकारी पहलू है "ज़ोरबा द बुद्धा।" 

ध्येय है एक ऐसा वातावरण निर्मित करना, जहां व्यक्ति पूर्ण हो सके―जहां उसमें धरती पर पांव जमाये हुए भी आकाश के सितारों को छू सकने की क्षमता हो।

"मेरा पूरा प्रयास ज़ोरबा व बुद्ध को समीप, और समीप ले आना है ― इतना समीप कि दोनों बिना किसी विरोध के, एक दूसरे के परिपूरक होकर, एक दूसरे के सहायक होकर, एक दूसरे से बिना संघर्ष किये, एक ही मनुष्य में आकार पा सकें।
"मेरी नये मनुष्य की धारणा यह है कि वह ज़ोरबा द ग्रीक होगा और गौतम बुद्ध भी: ज़ोरबा। वह इंद्रियनिष्ठ भी होगा और आध्यात्मिक भी; शरीर पर केंद्रित, पूर्णतया शरीर पर केंद्रित, देहनिष्ठ, इंद्रियनिष्ठ, देह का आनंद लेते हुए और वह सब जो देह उसे दे सकती है, और फिर भी वह एक महान चेतना, एक महान दृष्टा होगा।

"और ध्यान रहे, यदि मुझे दोनों में से चुनना हो तो मैं बुद्ध नहीं ज़ोरबा को चुनूंगा... क्योंकि ज़ोरबा कभी भी बुद्ध बन सकता है, परंतु बुद्ध अपनी पवित्रता से बंध जाता है। वह ज़ोरबा बन कर डिस्को नहीं जा सकता। और मेरे लिये स्वतंत्रता सबसे अधिक मूल्यवान है; स्वतंत्रता से बढ़कर कुछ भी अधिक महान नहीं, मूल्यवान नहीं।"
ओशो