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Facilities & Services ज़ेन गार्डन

ओशो तीर्थ 12 एकड़ का एक सुंदर पार्क है जिसका सृजन एक सार्वजनिक, बंजर भूमि पर हुआ है। 

यह केवल सुंदर पार्क ही नहीं अपितु ध्यान से उतरी सहज समझ का दर्पण है: यदि आप स्वयं से प्रेम नहीं कर सकते तो अपने पड़ोसी को कैसे कर सकते हैं; और पेड़ों की तो बात ही छोड़ो।

कभी जो एक पीली धरती का बंजर टुकड़ा हुआ करता था और जिसके मध्य में एक गंदा नाला बहा करता था, आज एक चहकते हुए उद्यान का रूप ले चुका है। जहां हज़ारों सैलानी हर माह आते हैं। यहां हर जगह की अनूठी रूपरेखा ― जो अलग अलग भी है और फिर भी समग्र का अंश ― प्रकृति के संतुलन का अनुभव निर्मित करती है - एकाकीपन, एकात्मकता व परस्पर-निर्भरता के बीच।

यह पार्क एक अद्भुत प्रतिरूप बन चुका है जो यह दर्शाता है कि प्रकृति के ह्रास की दिशा को बदल कर एक स्वस्थ वातावरण व आधुनिक नगर की आवश्यकताओं में संतुलन पैदा करना कितना आसान है। 

यह एक ऐसी परियोजना है जो एक ही समय पर जल-उत्पादन व इसके उपयोग, सिंचाई, स्वास्थ्य, सामाजिक-शिक्षा, भूमि-उपयोग, वनारोपण व सौंदर्यकरण जैसे मुद्दे उठाती है। यह एक छोटा सा बीज एक ऐसे अनेक समुदाय-संबंधी परियोजना की संभावना को पल्लवित कर रहा है। मानवता के आवास की सर्वोत्तम संभावना में इसका अपूर्व योगदान हो सकता है। 

"हमारे गहरे ध्यान व अस्तित्व के प्रति अहोभाव से यह संभव है कि यह धरती और अधिक चेतना, और अधिक फूलों से विकसित होती चली जाये और बैकुंठ बन जाये। 

"तुम यहां एक अतिथि हो। इस धरती को थोड़ा और सुंदर, थोड़ा और मानवीय, थोड़ा और सुवासित छोड़ जाओ उन अनजान अतिथियों के लिये, जो आपके पीछे आयेंगे।" 

ओशो