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Work As Meditation कार्य ध्यान

कार्य ध्यान

यह कार्यक्रम उन सब के लिये अत्यंत कारगर है जो अपने जीवन में खालीपन महसूस करते हैं। फिर यह खालीपन स्कूल छोड़ने के बाद और कॉलेज जाने से पहले का हो, नौकरी या व्यवसाय बदलने के समय का हो या विवाह के टूटने के बाद का। या यह कार्यक्रम उनके लिये है जो इस प्रश्न में उलझे हैं कि जीवन को सार्थक कैसे बनाया जाये।

इस कार्यक्रम में  व्यक्तिगत कोचिंग के साथ-साथ प्रैक्टीकल ट्रेनिंग कार्यक्रम भी शामिल है।

कार्य ध्यान की पूरी जानकारी के लिए यहां  क्लिक करें।

लिविंग कार्यक्रम के कार्य ध्यान संबंधी ताज़ा जानकारी पाने के लिए यहां  क्लिक करें

कार्यक्रम का सामान्य विवरण

ओशो मल्टीवर्सिटी ध्यान के लिये एक सेतु है। शीघ्र ही आप एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाते है जब बुद्धा हॉल के विधिवत ध्यान आपको सजगता का ऐसा स्वाद देते हैं कि आपके हाथ में भीतर या बाहर जो घट रहा है उसके प्रति जागरूक होने का गुर आ जाता है।

अगला प्रश्न यह उठता है कि क्या में घर लौटकर भी अपने व्यस्त नित्यकर्म में निरंतर सतर्क, सजग और "बोधपूर्ण" रह सकता हूं। ध्यान सभागार में शांत बैठना एक बात है लेकिन ऑफिस में बैठे हुए निर्धारित समय पर कार्य समाप्त करने के तनाव में शांत रहना बिलकुल दूसरी।

कार्य ध्यान कार्यक्रम की संरचना विशेषतया इस प्रकार की गयी है कि बोधपूर्ण होने को सीखने की प्रक्रिया- जिसका अति उत्तम अनुभव शांत, एकांत स्थान पर होता है- और फिर इस बोध को अपने रोज़मर्रा के जीवन में प्रयोग करने के बीच के अंतराल को मिटाना है। यही कसौटी है जानने की कि जो हमने सीखा है वह सही है।

यह कार्यक्रम रोज़ आठ घंटे का होता है: छ: घंटे परिसर में काम करने के और दो घंटे सांध्य ध्यान-सभा के जिसमें आप श्रवण और "अ-कर्ता" होने की कला सीखते हो।

वास्तविक कार्य मैक कंप्यूटर पर डिज़ाईन बनाने से लेकर कॉफी बनाने तक कुछ भी हो सकता है-अनुवाद करना हो, रिज़ॉर्ट में आये आगंतुकों का खयाल रखना हो। कार्य जो हमें चुनौती देता है ताकि हम सजग हो सकें देह और मन के प्रति, विचारों और भावनाओं के ढांचे के प्रति तथा लोगों और परिस्थितियों की ओर प्रतिसंवेदना से व्यवहार करने की बजाय प्रतिक्रिया करने के प्रति।

और शिक्षा का प्रारंभिक केंद्र-बिंदु यह है कि कार्य कार्य न रहकर निजता को पाने का एक अवसर तब बनता है जब गैस्टॉल्ट, परिप्रेक्ष्य, बदलता है और हम समझ पाते हैं कि हम क्या करते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि हम इसे कैसे करते हैं। मौलिक रूप में समझते हम यह हैं कि जीवन का कोई भी अनुभव, कार्य हो या खेल, स्वयं को समझने के लिये एक अवसर हो सकता है।

हमारे रोज़मर्रा के काम में हम अपने समय और ऊर्जा को पैसे से तोलते हैं और निराशा से बचने के लिये स्वयं को यह स्वप्न दिखाने लगते हैं कि हम अपने आप को केवल इसलिये कष्ट दे रहे हैं ताकि बाद में खूब पैसे लुटा सकें और "विश्रांत" हो सकें। "हम इस घड़ी के तनाव को यह सोच कर भुला देते हैं कि कहीं भविष्य में ऐसा समय होगा जब हम आराम से जी सकेंगे। अपने जीवन का एक तिहाई भाग तो हम इस मृगतृष्णा में ही व्यतीत कर देते हैं कि कोई स्वर्णिम भविष्य होगा जो वस्तुत: कभी आता ही नहीं। आता है तो केवल आज।

साधारणतया हमें यह सिखाया जाता है कि सफल होने के लिये हमें संघर्ष करना है, प्रयास करना है, एकाग्रचित्त होना है, लक्ष्य निर्धारित करना है… इस मार्ग में समस्या यह है कि जितना हम संघर्ष करते हैं, जितना हम एकाग्र होते हैं उतना ही बढ़ता है हमारा तनाव। और जितना हमारा तनाव बढ़ता है उतनी ही क्षीण होती है हमारी कार्यकुशलता। इस कार्यक्रम में अपनायी गयी वैकल्पिक पद्धति यह सिखाती है कि प्रत्येक पल को समग्रता से जीने के लिये और प्रत्येक पल में आनंदित होने के लिये हमें बोधपूर्ण होने की आवश्यकता है। और बोधपूर्ण होने के लिये हमारा विश्रांत होना आवश्यक है।

इस कार्यक्रम में सीखने वाले अनुभवों में शामिल हैं: 

कि हमारे पास गंभीर होने की बजाय खेलपूर्ण होने का विकल्प है-- गंभीरता जिसे हम अक्सर निष्ठा समझ बैठते हैं!

स्वयं के प्रति सम्मान और समग्र को हमारा अनूठा योगदान

दूसरों के उन्ही गुणों का आदर

समग्रता का मह्त्व और इसका रूपांतरण से संबंध

कल की कल्पना में जीने की बजाय वर्त्मान क्षण में बोधपूर्ण जीने का महत्व

एक अवसर अपने शारीरिक, मानसिक,"ऊंचे" कार्य/"छोटे" कार्य, पदानुक्रम, सत्ता संबंधी मुद्दे,सामूहिक-कार्य तथा गुणतंत्र के बारे में तुम्हारे पूर्वाग्रहों को देखने का…

कि हम सब सृजनात्मक हैं। यह वर्तमान क्षण को विवेकपूर्ण ढंग से जीने का स्वाभाविक परिणाम है

विभिन्न सभ्यताओं और परिप्रेक्ष्यों से आये लोगों के साथ मेलजोल। अपने सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों और पक्षपातों को देखना, हमारी दूसरे के पक्ष को सुनने की असमर्थता, सहजता से और खेलपूर्ण होकर सहमत या असहमत होना, हमारी सहज प्रतिक्रिया करने की बजाय भावुक होकर व्यवहार करने की प्रवृत्ति।

बगैर-आवासी कार्य ध्यान के संबंध में जानकारी
अब मेडिटेशन रिजॉर्ट में मित्र बगैर-आवासी कार्य ध्यान कार्यक्रम में कम से कम दो हफ्ते के लिए सहभागी हो सकते हैं। इसमें आपको अपने आवास का इंतजाम खुद करना होगा, लेकिन इसके अलावा रोज का कार्य ध्यान की रूपरेखा यथावत रहेगी। इसमें प्रशिक्षण की सुविधा केवल पहली बार काम करनेवालों के लिए है। आवासी प्रशिक्षण कार्यक्रम को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय मित्रों के लिए :

फीस 1 नवंबर 2013 से सेकंड फरवरी 2014 तक 

  • दो हफ्ते की सहभागिता के लिए   रु  3,500/-
  • एक महीने की सहभागिता के लिए  रु 7000/-

 इसके लिये अग्रिम आवेदन देने की आवश्यकता नहीं है। जब भी आप मैडिटेशन रिज़ॉर्ट में हों तो बस कार्य ध्यान ऑफिस में आ जायें या संपर्क करें  workmed@osho.net

यदि आप इस कार्यक्रम का गहराई से तथा लंबे समय के लिये अनुभव करना चाहते हैं तो आप यहां से जानकारी ले सकते हैं  "आवासीय कार्यक्रम"।