ओशो मैडिटेशन रिज़ॉर्ट हंसी ही एक ऐसा गुण है जो मनुष्य को पशु से अलग करता है। केवल वह ही हास्यास्पद और बेतुकापन देख सकता है। केवल उसमें ही यह क्षमता और सचेतनता है कि वह इस अस्तित्व में हो रहे सतत हास-परिहास को पहचान सके। यह कायनात एक लतीफा है, यह कोई गंभीर मामला नहीं।
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