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 इंटरनैशनल न्यूज़लैटर अप्रैल 2009

 

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"मैं व्यक्तिगत समस्याओं को नहीं सुलझाता। मेरी दृष्टि में रोग लाखों हैं, और उपचार बस एक ही है, और वह उपचार है-- ध्यान।"
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Celebrate Sadness!
उदासी को उत्सव बना लें!
जीवन जो भी लाए उसे उत्सव बनाएं-- सुख या दुख-- और समझो, तुमने अपना स्वर्ग स्वयं ही निर्मित कर लिया।
""दुख के बारे में भी उत्सव की द्रष्टि ही रखें। जैसे कि: तुम उदास हो-- तो उदासी के साथ तादात्म्य न बनाएं…"
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Health, Meditation, and Dreams
स्वास्थ्य, ध्यान और स्वप्न
.होशपूर्ण श्वसन-क्रिया किस प्रकार तुम्हारे शरीर में नयी संवेदनाएं निर्मित करती है और तुम्हारे सपनों को प्रभावित करती है…
"यह सच है कि ध्यान के बाद शरीर हल्का अनुभव करेगा। यह इसलिए कि हमें शरीर का बोध बोझीलेपन का है। जिसे हम बोझीलापन कहते हैं वह कुछ और नहीं अपितु…"
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Your Chief Characteristic
आपकी मुख्य मनोग्रस्ति
मुझे अपने मित्र की मद्यपान की आदत के बारे में बहुत चिंता है।
"वह सब कुछ मत सोचें जिका लेना-देना दूसरों से हो। और तुम वही सोचते रहते हो। निन्यानबे प्रतिशत जो तुम सोचते हो…"
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  ओशो इंटरनैशनल मैडीटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
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पुणे में अप्रैल माह है वसंत और ग्रीष्म ऋतु का। हरियाली से लदे पेड़ों से झांकती सूर्य की किरणें और फुदकते पक्षियों  के गीतों की मधुर ध्वनि…बीच-बीच में कोयल की पुकार प्रफुल्लित भी करती है और प्रेरित भी…
पेड़ों की छाया, स्विमिंग पूल और विचरते साधकों की सजगता गर्मी को भी एक गरिमा दे जाती है।
 एक ऐसा रमणीय स्थान जहां आप पेड़ो से ढकी, संगमरमर से सजी पगडंडियों पर विचर सकते हैं, स्विमिंग-पूल के तट पर बहती शीतल हवा के स्पर्श के साथ रेस्त्रां में दोपहर का भोजन कर सकते हैं और विशाल वातानुकूलित पिरामिड के समाधित माहौल में ध्यान कर सकते हैं. एक पुरानी कहावत है कि हजारों मीलों की यात्रा सदैव एक कदम से प्रारंभ होती है. वह यात्रा आप ओशो मैडिटेशन रिज़ॉर्ट से शुरू करें -आपका पहला ही कदम आपको धरती से स्वर्ग में ले जाएगा

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  ओशो मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
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.आओ, सम्मोहन को ध्यान का सेतु बनाएं-- डीहिप्नोसिस,सेल्फ- हिप्नोसिस व मैडीटेशन -- 9-12 अप्रैल

विधायक हां से अपने जीवन की हर घड़ी का आनंद लें-- ओपन सीक्रेट्स ऑव मैडीटेशन-- 25 अप्रैल

 जीवन ऊर्जा के ध्यानपूर्ण होने की प्रक्रिया में खेलपूर्ण  व आनंदित रहें--तंत्रा-एनर्जी-- 27-29 अप्रैल

अपने वास्तविक स्वरूप का मार्ग ढूंढें--प्राइमल रीबर्थ-- 6-10 मई

ध्यान की अवस्था में स्पर्श की भूली-बिसरी भाषा को पुन: सीखें-- होलिस्टिक थैरापियूटिक मसाज: बैक, नै अंड शोल्डर्ज़-- 7-9 मई

ओशो ध्यान-विधियों को बांटने के लिये आत्म-विश्वास व कौशल निर्मित करें--ओशो मैडीटेशन ट्रेनिंग-- 8-10 मई

अपने दिव्य उन्माद को पुन: जीवंत करने का अवसर दें-- बिहाइंड द मास्क-- 12-13 मई

अपने अंतर के रहस्यों को अनावृत करने के लिये विज्ञा भैरव तंत्र की ध्यान-विधियां आज़माएं-- तंत्रा मैडीटेशन: वॉचिंग द फायर-- 14-16 मई

 
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  पुन:प्रकाशित हिन्दी पुस्तकें BOOK RELEASE
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मैं मृत्‍यु सिखाता हूं

समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता है इस सत्य को कि मैं हूं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं, एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई, मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।

ओशो

मृत्यु से अमृत की ओर ले चलने वाली इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:

 - मृत्यु और मृत्यु-पार के रहस्य
- सजग मृत्यु के प्रयोग
- निद्रा, स्वप्न, सम्मोहन व मूर्च्छा के पार — जागृति
- सूक्ष्म शरीर, ध्यान व तंत्र-साधना के गुप्त आयाम

 

 

 

 
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संभोग से समाधि की ओर

‘जो उस मूलस्रोत को देख लेता है...’ यह बुद्ध का वचन बड़ा अदभुत है: ‘वह अमानुषी रति को उपलब्ध हो जाता है।’ वह ऐसे संभोग को उपलब्ध हो जाता है, जो मनुष्यता के पार है। जिसको मैंने ‘संभोग से समाधि की ओर’ कहा है, उसको ही बुद्ध अमानुषी रति कहते हैं।
एक तो रति है मनुष्य की—स्त्री और पुरुष की। क्षण भर को सुख मिलता है। मिलता है?—या आभास होता है कम से कम। फिर एक रति है, जब तुम्हारी चेतना अपने ही मूलस्रोत में गिर जाती है; जब तुम अपने से मिलते हो।
एक तो रति है—दूसरे से मिलने की।
और एक रति है—अपने से मिलने की। जब तुम्हारा तुमसे ही मिलना होता है, उस क्षण जो महाआनंद होता है, वही समाधि है। संभोग में समाधि की झलक है; समाधि में संभोग की पूर्णता है।

ओशो 
एस धम्मो सनंतनो’ से उद्धृत

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  इस माह का ध्यान MONTHLY MEDITATION
न को हां में बदलने के लिये कल्पना का उपयोग:
Using Imagination to Change Negative to Positive
सुबह उठते ही पहली बात, कल्पना करें कि तुम बहुत प्रसन्न हो। बिस्तर से प्रसन्न-चित्त उठें-- आभा-मंडित, प्रफुल्लित, आशा-पूर्ण-- जैसे कुछ समग्र, अनंत बहुमूल्य  होने जा रहा हो। अपने बिस्तर से बहुत विधायक व आशा-पूर्ण चित्त से, कुछ ऐसे भाव से कि आज का यह दिन सामान्य दिन नहीं होगा-- कि आज कुछ अनूठा, कुछ अद्वितीय तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है; वह तुम्हारे करीब है। 

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