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OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
अगस्त 2 0 1 1
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“भगवत्ता तब जीवंत होती है जब तुम जीवंत होते हो। यदि तुम जीवंत नहीं होते, तो तुम्हारी भगवत्ता जीवंत कैसे होगी? तुम्हारी भगवत्ता तुम्हारी है। यदि तुम मुर्दा होगे तो तुम्हारी भगवत्ता मुर्दा होगी; यदि तुम जीवंत होगे तो तुम्हारी भगवत्ता जीवंत होगी।तुम्हारी भगवत्ता तुमसे बड़ी नहीं हो सकती, क्योंकि तुम्हारी भगवत्ता तुम्हारे अंतरतम का गहनतम केंद्र है। तो अगर तुम जानना चाहते हो कि भगवत्ता क्या है, अधिक दिव्य बनो। अगर तुम जानना चाहते हो कि भगवत्ता क्या है तो जानने की कोशिश मत करो, महसूस करने की कोशिश करो। वह हृदय के द्वार से आती है।   ओशो
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मैगज़ीनOमेडिटेशनOमेडिटेशन रिज़ॉर्टOमल्टीवर्सिटीOशॉपOज़ेन टैरो
  ओशो.कॉम O
उपचार जिसे करुणा कहते हैं
उपचार जिसे करुणा कहते हैं
मैंने आपको एक बार कहते हुए सुना है कि "मात्र करुणा ही उपचारक होती है'। कृपया करुणा के बारे में बताएं।
केवल करुणा ही स्वास्थ्य प्रदान करती है। क्योंकि मनुष्य में जो भी अस्वस्थ है वह प्रेम की कमी के कारण है। जो भी मनुष्य के साथ ग़लत है, कहीं न कहीं प्रेम से जुड़ा है। वह प्रेम नहीं कर पाया, या उसे प्रेम नहीं मिल पाया। वह स्वयं को बांट नहीं पाया। सारी व्यथा यह है। इस कारण भीतर बहुत सी ग्रंथियां बन गयीं हैं।…
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दंत समस्याएं
दंत समस्याएं
मानसिक समस्याएं अक्सर दांतों की समस्या के रूप में उभरती हैं, और इसके विपरीत भी होता है: जो दांतों की समस्या लगती है वह मानसिक हो सकती है; और यह भी हो सकता है कि तुम्हारी मानसिक समस्याओं का स्रोत दांतों में हो।
ओशो की अन्तर्दृष्टि है कि दांतों का उपयोग मन-शरीर की स्मृतियों के द्वार खोलने के लिए किया जा सकता है, जो इससे पहले यह द्वार चिकित्सा और रूपान्तरण के लिए अज्ञात था। आपकी गहरी सोच के लिए कुछ बिंदु।

यह मेरा शक है कि जहां भी बहुत ज्यादा क्रोध दबाया गया है, लोगों को दांतों की समस्याएं होती हैं। उनके दांत खराब हो जाते हैं क्योंकि वहां बहुत ऊर्जा है जिसे मुक्त नहीं किया गया है।…
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क्रोध का मनोविज्ञान
क्रोध का मनोविज्ञान
क्रोध का मनोविज्ञान है कि तुम कुछ चाहते थे और किसी ने तुम्हें वह पाने से रोक दिया। कोई राह का रोड़ा बन गया,एक रुकावट के रूप में। तुम्हारी पूरी उर्जा कुछ पाने जा रही था और किसी ने उर्जा को रोक दिया। तुम जो चाहते थे, नहीं पा सके। अब यह कुंठित उर्जा क्रोध बन जाती है... क्रोध उस व्यक्ति के विरुद्ध जिसने तुम्हारी आकांक्षा के पूर्ण होने की सम्भावना को नष्ट कर दिया हो।

तुम क्रोध को नहीं रोक सकते क्योंकि क्रोध एक उपोत्पाद, एक बाइप्रोडक्ट है। लेकिन तुम कुछ और कर सकते हो जिससे यह बाइप्रोडक्ट फिर पैदा न हो। …
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  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
मैं थाईलैंड में सूचना-तकनीक के परामर्शी के रूप में काम करती थी और दस वर्ष एक प्रतिष्टित-संस्थान में बिताए। मेरे काम में मेरे से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं होती थीं जिससे मेरे ऊपर बहुत दबाव होता था, और इसे मैंने सदा गंभीरता से लिया। जब मैं तनाव-पूर्ण होती तो दूसरे भी तनाव-पूर्ण हो जाते थे, इसलिए पिछले वर्ष मैंने अवकाश लेने का निश्चय किया। अवकाश के समय मैं पढ़ना पसंद करती हूं, सो किताब की दूकान में मुझे ओशो के "गोल्ड नगेट्‌स" की एक प्रति मिली। मैंने किताब खोली और "धन और प्रेम' के बारे में एक पंक्ति ने मुझे प्रभावित कर लिया, इस प्रकार मैं और अधिक पढ़ने लगी।

तब मैंने ओशो.कॉम वेब-साइट में खोजा जहां मैंने "लिविंग-इन" कार्यक्रम के बारे में जाना और जिसके कारण मै आज यहां हूं। अब मैं हंसते-खेलते, कम तनाव से कार्य करना सीख रही हूं, और साथ ही लोगों से मृदु व्यवहार भी करती हूं। मैंने अपनी नकारात्मकता को भी कम किया है। ध्यान, शांत प्राकृतिक वातावरण और ध्यानपूर्ण और सहयोगी लोगों का जोड़, स्वयं पर कार्य करने के लिए एक परिपूर्ण पैकेज है। इवनिंग मीटिंग मेरा प्रिय ध्यान है; जिबरिश और लेट-गो मुझे मृत्यु से मित्रवत होना सिखाते हैं। अब मैं मृत्यु से कम भयभीत हूं, मैं संसार में अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हूं। मैं सीखना चाहती थी कि कार्य करते हुए ध्यान-पूर्ण कैसे हुआ जाए और मैं यहां जो अनुभव कर रही हूं, वह मैंने जो सोचा था उससे कई गुना ज्यादा है।

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  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
OSHO MULTIVERSITY
यदि आपको ओशो मिस्टिक रोज़ प्रक्रिया पसंद है और आप अपने अनुभव को गहरा करना और इसे दूसरों को सिखाना चाहते हैं तो ओशो मिस्टिक रोज़ फैसिलिटेटिंग 12 - 31 अगस्त के बीच शामिल हो सकते हैं। 14 अगस्त पर स्टार्ट विद द बॉडी करें जिसमें आप शरीर के साथ जुड़ने और अधिक दृढ़मूल होने की कला सीख सकते हैं। 16 अगस्त को फास्ट ट्रैक टु योरसैल्फ में शरीर, इंद्रियां, विचारों और भावनाओं के चार प्रवेश बिंदुओं का उपयोग करने के बाद आप पाएंगे कि आप इन सब से परे हैं। और 19 - 21 अगस्त तक क्रिएटिविटी: एज़ योर नेचर: विद पेंटिंग एण्ड ऐक्टिंग आपकी चित्रकारी और अभिनय को रचनात्मकता के साथ व्यक्त करें।

सितम्बर 1 - 4 आप जो वास्तव में हैं उसे गहन जागरूकता में खोजने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा केंद्रित करें : अवेयरनैस इंटेन्सिव: हू इज़ इन? में। सितम्बर 7 - 9, कार्य और जीवन को समझने के लिए इनर स्किल्स फॉर वर्क एण्ड लाइफ और सितम्बर 10 से 16 तक सेल्फ ‑ हिप्नोसिस फॉर मैडिटेशन में आत्म सम्मोहन को अपने दैनिक जीवन के लिए एक महान उपकरण की तरह उपयोग करना सीखें।

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  संपादक की पसंद BOOK RELEASE
 
Gita Darshan Vol.4
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Gita Darshan Vol.4

ISBN 978-81-7261-125-5
Hard Back
Size- 7.5" x 8.5"
Pages - 392
Price: ruppes 300/-

कृष्ण अर्जुन से उस क्षण, उस मार्ग, मृत्यु की उस कला की बात इन सूत्रों में करेंगे, जिस कला को जानने वाला, जिस मार्ग को पहचानने वाला, मर कर मरता नहीं, अमृत को उपलब्ध हो जाता है।
ओशो

इस पुस्तक में गीता के आठवें व नौवें अध्याय—अक्षर-ब्रह्म-योग और राजविद्या-राजगुह्य-योग—तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।

कुछ विषय-बिंदु:

मृत्यु का भय क्यों?
योगयुक्त मरण के सूत्र
सृष्टि और प्रलय का वर्तुल
खोज की सम्यक दिशा
स्त्रैणता और पुरुषता का मनोविज्ञान
   
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Jeevan Hi Hai Prabhu
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Jeevan Hi Hai Prabhu

ISBN 978-81-7261-047-0
Size - 5.75" x 8.25"
Paper Back
Pages - 132
Price: ruppes 80/-

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है: सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है। जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है। उस दिन जिंदगी और हो जाती है। उस दिन चोर होना असंभव है। सम्राट कहीं चोर होते हैं! उस दिन क्रोध करना असंभव है। उस दिन दुखी होना असंभव है। उस दिन एक नया जगत शुरू होता है। उस जगत, उस जीवन की खोज ही धर्म है।

इन चर्चाओं में इस जीवन, इस प्रभु को खोजने के लिए क्या हम करें, उस संबंध में कुछ बातें मैंने कही हैं। मेरी बातों से वह किरण न आएगी, मेरी बातों से वह रथ भी न आएगा, मेरी बातों से आप उस जगह न पहुंच जाएंगे। लेकिन हां, मेरी बातें आपको प्यासा कर सकती हैं। मेरी बातें आपके मन में घाव छोड़ जा सकती हैं। मेरी बातों से आपके मन की नींद थोड़ी बहुत चौंक सकती है। हो सकता है, शायद आप चौंक जाएं और उस यात्रा पर निकल जाएं जो ध्यान की यात्रा है।

तो निश्र्चित है, आश्र्वासन है कि जो कभी भी ध्यान की यात्रा पर गया है, वह धर्म के मंदिर पर पहुंच जाता है। ध्यान का पथ है, उपलब्ध धर्म का मंदिर हो जाता है। और उस मंदिर के भीतर जो प्रभु विराजमान है, वह कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, समस्त जीवन का ही प्रभु है।
ओशो

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:

परमात्मा को कहां खोजें?
क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं?
जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना
क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी?
   
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  मल्टीमीडिया स्टोर MULTIMEDIA STORE
पांच शीर्ष ऑडियो बुक्स प्रस्तावित ओशो प्रवचन
दि इटर्नल क्वेस्ट दि पाथ ऑफ योग वेदान्त: सेवन स्टेप्स टु समाधि दि गोल्डन फ्युचर आह दिस!
दि इटर्नल क्वेस्ट दि पाथ ऑफ योग वेदान्त: सेवन स्टेप्स टु समाधि दि गोल्डन फ्युचर आह दिस!
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पांच शीर्ष ईबुक्स प्रस्तावित ओशो ई पुस्तकें
गोल्ड नगेट्स जॉय इंडिया माइ लव इन्ट्युशन पावर, पॉलिटिक्स, चेन्ज
गोल्ड नगेट्स जॉय इंडिया माइ लव इन्ट्युशन पावर, पॉलिटिक्स,
चेन्ज
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आयट्यून बेस्ट सेलर्स आय ट्यून पर प्रस्तावित ओशो प्रवचन
इमोशन वैलनैस, एवरी ह्यूमन बी इंग इज़ ए सीकर ऑफ ट्रुथ माइंड एण्ड बॉडी आर नाट टू थिंग्ज़ कम्पैशन, लव एण्ड सैक्स ओशो ज़ेन टैरोट
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पांच शीर्ष यूट्यूब वीडियोज़ यूट्यूब पर प्रस्तावित ओशो वीडियो
ओशो: आय लिव स्पॉन्टेनियसली ओशो: विद मेडिटेशन लाइफ विल बी ए शीयर जॉय ओशो: लव इज़ लाइक ए स्प्रिंग ब्रीज़ ओशो: कम्पैशन- दि अल्टीमेट फ्लावरिंग ऑफ लव ओशो: डोण्ट यूज़ दिस प्लैनेट लाइक ए वैटिंग रूम
ओशो: आय लिव स्पॉन्टेनियसली ओशो: विद मेडिटेशन लाइफ विल बी ए शीयर जॉय ओशो: लव इज़ लाइक ए स्प्रिंग ब्रीज़ ओशो: कम्पैशन- दि अल्टीमेट फ्लावरिंग ऑफ लव ओशो: डोण्ट यूज़ दिस प्लैनेट लाइक ए वैटिंग रूम
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OSHO Monsoon Festival 2011 Aug 11th - 15th
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  इस माह का ध्यान माह का ध्यान
सांस लो और मुस्कराओ
सांस लो और मुस्कराओ
जब भी तुम बैठे हो और कुछ भी नहीं कर रहे हो, अपने निचले जबड़े को शिथिल कर लो और मुंह को थोड़ा सा खोल लो। मुंह से सांस लेना शुरु करो लेकिन बहुत गहरे नहीं। इस प्रकार यह उथली से उथली होती चली जाएगी। और जब तुम महसूस करते हो कि सांस बहुत धीमी हो गई है और मुंह खुला हुआ है और तुम्हारे जबड़े शिथिल हो गए हैं, तुम्हारा पूरा शरीर बहुत शिथिल महसूस करेगा।

उस क्षण में, एक मुस्कराहट महसूस करना शुरू करो -- मात्र चेहरे पर नहीं, बल्कि अपने पूरे आंतरिक अस्तित्व में। यह मुस्कराहट वह नहीं है जो ओठों पर आती है -- यह अस्तित्वगत मुस्कराहट है जो भीतर फैलती है।…
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ओशो: जैलसी- सोसायटीज़ डिवाइस टु डिवाइड एण्ड रूल
ओशो: दि ऑथर - टॉम रॉबिन्स एबाउट दि मिस्टिक ओशो
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ओशो: मेडिटेशन्स फॉर कन्टेम्पररी पीपुल
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