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सभी प्रेम चाहते हैँ फिर भी प्रेम का अकाल क्योँ है? |
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"मैं आपको एक सूत्र की बात कहूं: जिस मनुष्य के पास प्रेम है उसकी प्रेम की मांग मिट जाती है। और यह भी मैं आपको कहूं: जिसकी प्रेम की मांग मिट जाती है वही केवल प्रेम को दे सकता है। जो खुद मांग रहा है वह दे नहीं सकता है।" |
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ध्यान शरीर की आदत नहीं है। |
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"ध्यान इसलिए कठिन मालूम होता है क्योंकि शरीर की बंधी हुई आदतों को तोड़कर उसमें नई व्यवस्था निर्मित करनी होती है । शरीर की बंधी हुई आदतें कौन सी हैं और उन्हें कैसे तोड़ा जा सकता है इस पर पढ़िए ओशो का मार्गदर्शन जो उन्होंने एक ध्यान शिविर में साधकों को किया है।" |
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शिक्षा में क्राँति - दुनिया में ईमानदारी क्योँ नहीं है? |
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"अगर मनुष्य-जाति के लिए कोई भी आपके हृदय में प्रेम है और आप सच में चाहते हैं कि एक नई दुनिया, एक नई संस्कृति और नया आदमी पैदा हो जाए तो यह सारी पुरानी बेवकूफी छोड़नी पड़ेगी, जलानी पड़ेगी, नष्ट करनी पड़ेगी और विचार करना पड़ेगा कि क्या विद्रोह हो, कैसे हो सकता है इसके भीतर से। यह सब गलत है इसलिए गलत आदमी पैदा होता है।" |
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संभोग से समाधि की ओर
प्रकाशक: Rebel Publishing House, India
आई एस बी एन: 81-7261-042-4
आई एस बी एन: 978-81-7261-042-5
आकार - 6.5" x 8.5"
पृष्ठ संख्या -
360
हार्ड बाउंड
पुस्तक के बारे में:
‘जो उस मूलस्रोत को देख लेता है...’ यह बुद्ध का वचन बड़ा अदभुत है: ‘वह अमानुषी रति को उपलब्ध हो जाता है।’ वह ऐसे संभोग को उपलब्ध हो जाता है, जो मनुष्यता के पार है।
जिसको मैंने ‘संभोग से समाधि की ओर’ कहा है, उसको ही बुद्ध अमानुषी रति कहते हैं।
एक तो रति है मनुष्य की—स्त्री और पुरुष की। क्षण भर को सुख मिलता है। मिलता है?—या आभास होता है कम से कम। फिर एक रति है, जब तुम्हारी चेतना अपने ही मूलस्रोत में गिर जाती है; जब तुम अपने से मिलते हो।
एक तो रति है—दूसरे से मिलने की। और एक रति है—अपने से मिलने की।
जब तुम्हारा तुमसे ही मिलना होता है, उस क्षण जो महाआनंद होता है, वही समाधि है।
संभोग में समाधि की झलक है; समाधि में संभोग की पूर्णता है।
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ओशो |
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जिन खोजा तिन पाइयां
प्रकाशक: Rebel Publishing House, India
आई एस बी एन:
81-7261-045-9
आई एस बी एन:
978-81-7261-045-6
आकार - 7.5" x 8.5"
पृष्ठ संख्या - 400
हार्ड बाउंड
पुस्तक के बारे में:
कुंडलिनी-यात्रा पर ले चलने वाली इस अभूतपूर्व पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
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शरीर में छिपी अनंत ऊर्जाओं को जगाने का एक आह्वान
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सात चक्रों व सात शरीरों के रहस्यों पर चर्चा
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आधुनिक मनुष्य के लिए ध्यान की सक्रिय विधियों का जन्म
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तंत्र के गुह्य आयामों से परिचय
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ओशो |
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इस महीने हमने आप के लिए क्या
चुना .... |
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| अष्टावक्र : महागीता--भाग एक |
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अष्टावक्र और राजा जनक के बीच इस अदभुत संवाद की गरिमा को ओशो ने अपनी अमृत वाणी द्वारा उसकी पूर्णता में प्रकट किया है। अष्टावक्र-जनक संवाद एवं प्रश्नोत्तर के माध्यम से ओशो धर्म, साधना, तथा चेतना की अतल गहराई में हमें ले चलते हैं। इस अपूर्व संवाद को महागीता कहकर ओशो ने उसमें अनूठी प्राण-प्रतिष्ठा की है। |
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मृत्यु क्या है? इसे सीखने के लिए जीवन को समझना होगा, उसके हर आयाम को, उसकी हर ॠतु से मैत्री करके। हम जीवन से अपरिचित हैं, इसीलिए मृत्यु से भयभीत हैं। ओशो कहते हैं: जीवन क्या है, मनुष्य इसे भी नहीं जानता है। और जीवन को ही हम न जान सकें, तो मृत्यु को जानने की तो कोई संभावना ही शेष नहीं रह जाती। जीवन ही अपरिचित और अज्ञात हो, तो मृत्यु परिचित और ज्ञात नहीं हो सकती है। |
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