‘इस ईमेल को देखने में परेशानी ? यहा क्लिक करें
Max New York Life Insurance Company Limited
 
  ओशो को ऑनलाइन पाएं,
अधिक जानकारी के लिए दिए हुए किसी चिन्ह पर क्लिक करें
Find us on Facebook Find us on Facebook Find us on Facebook Find us on Facebook Follow us on Twitter Click to reach Newsletter archive Click to reach Newsletter archive  Watch Web Videos Visit Osho Library
    Radio English Radio
Hindi
All about OSHO Facebook Twitter Archive Photo Tour You Tube Library
 
OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
दिसम्बर 2011
O
ओशो उद्धरण: बहुत ज्ञानी होने से स्वयं होकर अज्ञानी होना बेहतर है क्योंकि ज्ञान जो कि तुम्हारा नहीं है, अज्ञान से कहीं अधिक बदतर है।" ओशो
O
मैगज़ीनOमेडिटेशनOमेडिटेशन रिज़ॉर्टOमल्टीवर्सिटीOशॉपOज़ेन टैरो
  ओशो.कॉम O
मैं अकेलेपन से अत्यधिक पीड़ित हूं।
धर्म सम्राट बनने की कला है
मनुष्य के जीवन में इतना दुख है, इतनी पीड़ा, इतना तनाव कि ऐसा मालूम पड़ता है कि शायद पशु भी हमसे ज्यादा आनंद में होंगे, ज्यादा शांति में होंगे। समुद्र और पृथ्वी भी शायद हमसे ज्यादा प्रफुल्लित हैं। रद्दी से रद्दी जमीन में भी फूल खिलते हैं। गंदे से गंदे सागर में भी लहरें आती हैं--खुशी की, आनंद की। लेकिन मनुष्य के जीवन में न फूल खिलते हैं, न आनंद की कोई लहरें आती हैं।
और पढ़ें »
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
उपहार
ध्यान के दौरान दर्द
इसे करते जाओ! यह दर्द चला जाएगा। कारण स्पष्ट हैं। दो कारण हैं। पहला, यह एक जोरदार व्यायाम है और तुम्हारा शरीर इसे करने के लिए अभ्यस्त हो जाना चाहिए। इसलिए तुम्हें तीन या चार दिनों के लिए तो लगेगा कि पूरा शरीर दर्द कर रहा है। किसी भी नए व्यायाम के साथ यह होगा। लेकिन चार दिनों के बाद तुम उससे पार हो जाओगे और तुम्हारा शरीर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत महसूस करेगा।
और पढ़ें »
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
अपने लड़ाकू स्वभाव को स्वीकार करो
भावनाओं के तूफान में

मुझे लगता है जैसे मैं हमेशा भावों के तूफान से घिरा रहता हूं। इससे कैसे उबरूं?

मैंने उन्हें साक्षीभाव से देखने की कोशिश की है लेकिन जैसे ही एक चला जाता है, दूसरा उभरता है।

हर उस भाव को जीयो जिसे तुम महसूस करते हो। वह तुम ही हो। घृणा से भरे, कुरूप, अपात्र –– जो भी हो, उसमें रहो। पहले भावों को एक मौका दो पूरी तरह चेतन मन में आने का। अभी जागरूकता के प्रयास में तुम उन्हें अवचेतन में दबा रहे हो । फिर तुम अपने रोजमर्रा के कामों में उलझ जाते हो और उन्हें जबरदस्ती दबा देते हो। उनसे निजात पाने का यह तरीका नहीं है।

Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
O
  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
TARO
तारो
मैं चिली में एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में लीडरशिप और प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण देने का काम करती थी। इस सिलसिले में कई देशों में घूमी। इस सबके बावजूद मुझे जीवन में कोई सार्थकता नजर नहीं आती थी। एक बार एक मित्र के पास मैंने ओशो की एक पुस्तक देखी, आई ऐम दि गेट। उसे पढ़ते ही मुझे फौरन लगा कि मैं जो खोजती थी वह मुझे मिल गया। मेरे अंदर एक किस्म का विस्फोट हुआ और मेरे आंसू बहने लगे। मैं बाहर बगीचे में चली गई, शरीर में कंपन होने लगा और आंसू बहते रहे, इस ख्याल से कि जिसे मैं खोजती थी वह मौजूद है।
उसके बाद मैंने ओशो की ध्यान विधियां करनी शुरू कीं; अपने काम में भी मैं ओशो ध्यान करवाती थी। उसके बाद मैं पुणे आई और मेडिटेशन रिज़ार्ट में लिविंग इन कार्यक्रम में दाखिल हुई। आज तक मैं दिन में बारह घंटे काम करने की आदी थी, यहां पर सिर्फ छह घंटे काम था। मुझे रिलैक्स करना सीखना पड़ा। फिर कार्य और ध्यान के बीच यहां पर जो संतुलन है वह अपने पास लौट आने का, प्रकृति के साथ और अन्य लोगों के साथ जुड़ने का बेहतरीन तरीका है।

यह एक जादुई जगह है –– बहुत व्यावहारिक और साथ ही एक रहस्य विद्यालय भी। यहां आप अपने भीतर की समस्याओं का सामना करने से बच नहीं सकते। यह आसान नहीं है, लेकिन हर मुश्किल से गुज़रने के बाद जागरूकता और बढ़ जाती है।

Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
O
  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
Tantra Energy
Tantra Energy
Tantra Energy
Tantra Energy
Tantra Energy
Tantra Energy
Book early to reserve your space in the Living-In Program.
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
OSHO.com
OSHO.com
OSHO.com
  संपादक की पसंद BOOK RELEASE
 
The Magic of Self-respect
और पढ़ें »
 
ध्यान विज्ञान

ISBN 978-81-7261-169-9
Size - 6.5" x 8.5"
Paper Back Pages - 192
Price: ruppes 135/-


जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव-प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे भक्ति-प्रार्थना के मार्ग पर चल सकते हैं। जो बुद्धि-प्रवण हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके लिए ध्यान, सजगता, साक्षीभाव उपयोगी हो सकते हैं।

लेकिन मेरी ध्यान की विधियां एक प्रकार से अलग हट कर हैं। मैंने ऐसी ध्यान-विधियों की संरचना की है जो तीनों प्रकार के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा सकती हैं। उनमें शरीर का भी पूरा उपयोग है, भाव का भी पूरा उपयोग है और होश का भी पूरा उपयोग है। तीनों का एक साथ उपयोग है और वे अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग ढंग से काम करती हैं। शरीर, हृदय, मन—मेरी सभी ध्यान विधियां इसी श्र्ृंखला में काम करती हैं। वे शरीर पर शुरू होती हैं, वे हृदय से गुजरती हैं, वे मन पर पहुंचती हैं और फिर वे मनातीत में अतिक्रमण कर जाती हैं। ओशो

इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
 
The Magic of Self-respect
और पढ़ें »
 
विज्ञान, धर्म और कला

ISBN 978-81-7261-231-3
Size - 6.5" x 8.5"
Paper back Pages - 196
Price: ruppes Rs.165/-

विज्ञान, धर्म और कला के अंतर-संबंध को समझाते हुए ओशो कहते है:

'ये तीन बातें मैंने कहीं। विज्ञान प्रथम चरण है। वह तर्क का पहला कदम है। तर्क जब हार जाता है तो धर्म दूसरा चरण है, वह अनुभूति है। और जब अनुभूति सघन हो जाती है तो वर्षा शुरू हो जाती है, वह कला है। और इस कला की उपलब्धि सिर्फ उन्हें ही होती है जो ध्यान को उपलब्ध होते हैं। ध्यान की बाई-प्रॉडक्ट है। जो ध्यान के पहले कलाकार है, वह किसी न किसी अर्थों में वासना केंद्रित होता है। जो ध्यान के बाद कलाकार है, उसका जीवन, उसका कृत्य, उसका सृजन, सभी परमात्मा को समर्पित और परमात्मामय हो जाता है।'


इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
सत्य की खोज, सत्य का अनुभव, सत्य की अभिव्यक्ति
सर्विस अबॅव सेल्फ, सेवा स्वार्थ के ऊपर
क्या हम ऐसा मनुष्य पैदा कर सकेंगे जो समृद्ध भी हो और शांत भी? जिसके पास शरीर के सुख भी हों और आत्मा के आनंद भी?
जीवन क्रांति के तीन सूत्र
धर्म का विधायक विज्ञान
   

इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
OSHO.com
 
OSHO Multiversity Presents
Path of Love
OSHO.com
  मासिक ध्यान मासिक ध्यान
अपनी श्वास का स्मरण रखें
श्रवण
अगर तुम अपनी सांस पर काबू पा सको तो अपनी भावनाओं पर काबू पा सकोगे। अवचेतन सांस की लय को बदलता रहता है, अत: अगर तुम इस लय के प्रति और उसमें होने वाले सतत बदलाव के बारे में होश से भर जाओगे तो तुम अपनी अवचेतन जड़ों के बारे में, अवचेतन की गतिविधि के बारे में सजग हो जाओगे।"
और पढ़ें »
इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
OSHO.com
OSHO Discover the Buddha
O
  फलित ज्योतिष HOROSCOPE
HOROSCOPE
OSHO Guesthouse
अभी बुक करें
O
OSHO ZEN TAROT - iPhone
O
No–Thought for the Day
No-Thought for the Day - Listen Now »Listen Now
OSHO.com
  ओशो वैब टीवीOSHO WEB TV
 वाच ओशो टाक हियर
ओशो वैब टीवी
लव इज़ लाइक ए स्प्रिंग ब्रीज़
ड्रीम्स आर योर अनलिव्ड लाइफ
साइंस एण्ड दि इनर जर्नी
बिहेव एज़ इफ यू आर दि फर्स्ट हियर
OSHO.com
O
सदस्यता प्राप्त करें / सदस्यता खारिज करें | संपर्क करें | ऑडियो ग्रीटिंग भेजें | किसी मित्र को भेजें
O
ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, दिसम्बर 2011
© 2011 ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन
कॉपीराइट & ट्रेडमार्क जानकारी

%commonfooter%