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ओशो
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
जनवरी 2 0 1 0
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"हां", यह सरल सा शब्द संसार के सभी धर्मों को समाहित करता है। उसमें विश्वास है, उसमें प्रेम है, उसमें समर्पण है। उसमें वे सारी प्रार्थनाएं हैं जो कभी की गई थीं, या की जा रही हैं, या कभी की जाएंगी। यदि तुम हृदय की पूरी समग्रता से "हां" कह सको तो तुमने वह सब कह दिया जो कहा जा सकता है। अस्तित्व को "हां" कहने का मतलब है, धार्मिक होना।"
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सभी प्रेम चाहते हैँ फिर भी प्रेम का अकाल क्योँ है?
शरीर और मन दो अलग चीजें नहीं हैं।
"योग का कहना है कि हमारे भीतर शरीर और मन, ऐसी दो चीजें नहीं हैं। हमारे भीतर चेतन और अचेतन, ऐसी दो चीजें नहीं हैं। हमारे भीतर एक ही अस्तित्व है, जिसके ये दो छोर हैं। और इसलिए किसी भी छोर से प्रभावित किया जा सकता है। "
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ध्यान शरीर की आदत नहीं है।
प्रीति रूपांतरकारी रसायन है।
"एक तत्व हमारे भीतर है, जिसको प्रीति कहें। यह जो तत्व हमारे भीतर है--प्रीति, इसी के आधार पर हम जीते हैं। चाहे हम गलत ही जीएं, तो भी हमारा आधार प्रीति ही होता है।
कोई आदमी धन कमाने में लगा है; धन तो ऊपर की बात है, भीतर तो प्रीति से ही जी रहा है--धन से उसकी प्रीति है। कोई आदमी पद के पीछे पागल है; पद तो गौण है, प्रतिष्ठा की प्रीति है। जहां भी खोजोगे, तो तुम प्रीति को ही पाओगे।"
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शिक्षा में क्राँति - दुनिया में ईमानदारी क्योँ नहीं है?
नैतिकता (मॉरेलिटी) की कितनी महत्ता है?
"मैं आपसे कहना चाहूंगा कि मॉरेलिटी तो कोई मार्ग ही नहीं है। नीति तो कोई मार्ग ही नहीं है।
नीति मार्ग नहीं है। नीति मार्ग है इस तरह की बातें हजारों साल से प्रचलित हैं। और लोगों को यह भी खयाल है कि नैतिक हुए बिना कोई धार्मिक नहीं हो सकता, नैतिक होगा तब धार्मिक होगा।
मैं आपसे कहना चाहूंगा, नैतिक होने से कोई कभी धार्मिक नहीं होता है।"
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  ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो 	इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट
ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट
मेरे बचपन से मैं सोच रहा था कि लोग सत्य को कैसे पाते हैं। इसलिए मैं पारंपरिक धर्म का अध्ययन करने के लिए जर्मनी गया। लेकिन वहां जाकर मुझे पता चला कि यह सब दिमागी कसरत है।

तो मैंने कुछ व्यावहारिक करने का फैसला किया और मैं कुकिंग स्कूल में खाना पकाना सीखने के लिए गया। लेकिन वहां भी मैंने पाया कि हर कोई एक जबरदस्त तनाव में था, सब लोग ड्रग्स या शराब ले रहे थे, और एक बहुत बुरा माहौल था।

इसी बीच मैं ओशो को पढ़ने लगा था॥ मैंने ध्यान करना शुरू किया और मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरे बिना कुछ किये चीजें मेरे जीवन में आसान होने लगीं। एक दिन ओशो.कॉम ब्राउज़िंग करते हुए मैंने ध्यान रिसॉर्ट के आवासीय कार्यक्रम के बारे में पढ़ा। मैं इतना प्रभावित हुआ कि मैंने कुकिंग क्लास छोड़ दिया और तीन महीने के लिए जनवरी 2007 में पुणे आने का निर्णय लिया।

आते ही इस जगह से प्यार हो गया। यहां हर दिन कुछ न कुछ नया सीखने मिलता है। मैं खुद पर हैरान हूं कि मैं बार-बार आ रहा हूं और हर बार ज्यादा लंबे समय तक रहता हूं। अब मैं भविष्य में क्या करने वाला हूं इसके बारे में नहीं सोचता, क्योंकि आज क्या हो रहा है यह मेरे लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

यहां वास्तविकता से कोई भाग नहीं सकता। इसके विपरीत, दुनिया तुम्हारी दिशा में जो भी फेंकती है उसका वहीं प्रतिसंवेदन करना होता है। इनर स्किल्स फॉर वर्क एण्ड लाइफ का प्रशिक्षण मेरे लिए बहुत उपयोगी रहा, उससे मुझे एक ही समय जागरूक और विश्रामपूर्ण रहने की कला आयी--जिसका अर्थ हुआ एक साथ पांच लोगों से निपटना जो पांच अलग-अलग चीज़ों के बारे में पूछ रहे हैं, दो लंबित ईमेल पड़े हैं और लगातार फोन बज रहा है, और इस सबके बीच शांत रहना ! हर बात का आधार जागरूकता है, नियंत्रण नहीं है। इसलिए जब आप नये-नये कौशल सीखते हैं, तब आप स्वयं में और अन्य लोगों में सत्ता की ललक, क्रोध, आक्रामकता अनुभव करते हैं। लेकिन लोग उन्हें तुम्हारे खिलाफ ढोते नहीं हैं। यह उन लोगों के बारे में नहीं है, तुम्हारे अपने बारे में है। मुझे लगता है कि संध्या ध्यान इस रिसॉर्ट की कुंजी है। उस ध्यान में सब कुछ धुल जाता है। उस समय आप अपने आप के संपर्क में आते हैं, और इस स्थान के सार तत्व से जुड़ते हैं। आप जान लेते हैं कि जो कुछ भी दिन के समय होता है वह गंभीर नहीं है। यह ईमानदार तो है लेकिन गंभीर नहीं है। अपने आपको जीवन का खेल खेलते हुए देखना इस जगह की सुंदरता है।

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ओशो मल्टीवर्सिटी
  जागरूकता और गहरे विश्राम की तकनीकों के माध्यम से आत्म-उपचार को जानें, 12 से 25 जनवरी के बीच - ट्रांससोमैटिक इल्यूमिनेशन गेस्टाल्ट: प्रारंभिक पाठ्यक्रम में। क्षण-क्षण अपना साक्षात करें, अपनी पेंटिंग कौशल को मजबूत और गहरा बनाते हुए सेल्फ पोर्ट्रेट: मिररिंग आफ योर बीइंग में 15-17 जनवरी तक। या चार दिन की छुट्टी ले लें जनवरी 16 से 19 तक ध्यान में उतरने के लिए, शुरुआती और गहरे ध्यानियों के लिए भी--एकुएनर्जेटिक्स ® --नेशमाह: ओपनिंग टु दि लाइट । अपने अंतस की कई परतें खोलने और साक्षी और ध्यान की नई गहराई को खोजने के लिए बैक टु दि सोर्स- एक्सप्लोर योर हारा 19-23 जनवरी। 20-22 जनवरी - दि आर्ट ऑफ मूवमेंट यह दिखाता है कि मानव शरीर एक चमत्कार है, उसकी क्रियाओं को एक कला में तब्दील किया जा सकता है। ब्लिस बियांड फ़ियर: दि करेज टु लिव इन लव 20-22 जनवरी, यह कोर्स ह्यूमैनिवर्सिटी की उपचार विधियों का उपयोग करता है ताकि आप अपनी भावनात्मक कुंठाओं के बोझे को त्यागकर इतने समर्पित हो जाएं कि उस खाली जगह में प्यार पनप सके जिसके लिए आप तरस गए हैं। और आप सबको भीतर की खुशी उपलब्ध होगी अगर आप इसे 22-26 जनवरी के दौरान फाइव डेज़ ऑफ ट्रांसफार्मेशन में भाग लेकर खोजने के लिए तैयार हैं। 24-27 जनवरी को पैशन फॉर लाइफ: फाइंडिंग योर टैलेण्ट्स एंड ट्रेजर्स के साथ आप अपने भीतर छिपे हुए स्वर्णिम बच्चे की प्रतिभा और खजाने को खोज सकते हैं। आपके भीतर जो घायल बच्चा है उससे हटकर पुन: आश्चर्य, आनन्द, कल्पना, सृजनशीलता, प्रामाणिकता और जीवन के शक्ति स्रोत के साथ अपने आप को तरोताज़ा कर सकते हैं। फरवरी 3 से 10 तक अवेयरनेस इंटेन्सिव: सतोरी आपके अंतस्थ केंद्र की खोज करने के लिए समर्पित है।
 
 
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अमृत कण
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अमृत कण


प्रकाशक: OSHO Media International

आई एस बी एन:  978-81-7261-117-0

आकार - 5.75" x 6.25"

पृष्‍ठ संख्‍या - 224

हार्ड बाउंड


पुस्तक के बारे में:

‘ओशो की अमृत अनुभूति के विराट गंगा-सागर में से कुछ अमृत बूंदें चुन कर इस छोटी सी पुस्तिका में समाहित की गई हैं। ओशो कहते हैं ‘मैं एक गहरे अंधेरे में था, फिर मुझे सूर्य के दर्शन हुए और मैं आलोकित हुआ। मैं एक दुख में था, फिर मुझे आनंद की सुगंध मिली और मैं उससे परिवर्तित हुआ। मैं संताप से भरा था और आज मेरी श्वासों में आनंद के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। मैं एक मृत्यु में था—मैं मृत ही था और मुझे जीवन उपलब्ध हुआ और अमृत ने मेरे प्राणों को एक नये संगीत से स्पंदित कर दिया। आज मृत्यु मुझे कहीं भी दिखाई नहीं देती। सब अमृत हो गया है। और सब अनंत जीवन हो गया है। अब एक ही स्वप्न देखता हूं कि वही आलोक, वही अमृत, वही आनंद आपके जीवन को भी आंदोलित और परिपूरित कर दे, जिसने मुझे परिवर्तित किया है। वह आपको भी नया जन्म और जीवन दे, जिसने मुझे नया कर दिया है।’

 
ओशो
   
गीता-दर्शन भाग एक
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गीता-दर्शन, भाग एक


प्रकाशक: Rebel Publishing House, India

आई एस बी एन:  978-81-7261-062-3

आकार - 7.5" x 8.5"

पृष्‍ठ संख्‍या - 508

हार्ड बाउंड

 

पुस्तक के बारे में:

इस पुस्तक में गीता के प्रथम तीन अध्यायों--विषादयोग, सांख्ययोग एवं कर्मयोग--तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है। कुछ विषय बिंदु:
*विषाद और संताप से आत्म-क्रांति की ओर
*आत्म-विद्या के गूढ़ आयामों का उदघाटन
*निष्काम कर्म और अखंड मन की कीमिया
*मन के अधोगमन और ऊर्ध्वगमन की सीढ़ियां
*परधर्म, स्वधर्म और धर्म

 
ओशो
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फिर अमरित की बूंद पड़ी
फिर अमरित की बूंद पड़ी भारत, जिसे ओशो एक भूखंड नहीं पूरी मनुष्यता का एक सपना, एक अभीप्सा, एक प्यास कहते हैं--उसे इस पुस्तक में वे आमंत्रित करते हैं इक्कीसवीं सदी की दहलीज लांघ कर उन शिखरों पर चलने के लिए जहां कभी इसका बसेरा था।
शीर्षकों में शामिल है:
ध्यान प्रक्रिया है रूपांतरण की
मैं तुम्हें इक्कीसवीं सदी में ले जा सकता हूं
भारतः एक सनातन यात्रा
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जिन-सूत्र, भाग एक
जिन-सूत्र,  भाग एक ओशो द्वारा दिए गए ये अमृत प्रवचन भगवान महावीर के वचनों में छिपे हुए सत्य को 2500 वर्ष पश्चात पुन: उदघाटित ‍करते हैं। जैन धर्म एवं जैन साधना का पुनरावलोकन ओशो ने किया है जिससे हम अध्यात्म के विज्ञान का नए सिरे से अनुशीलन कर सकें। ओशो का आवाहन ‍है, महावीर के निमंत्रण को अनुभव करो। इन प्रवचनों द्वारा ओशो ने गूढ़ से गूढ़ तत्वों को महावीर के सूत्रों द्वारा सरल एवं सुगम बना दिया है।
शीर्षकों में शामिल है:
प्यास ही प्रार्थना है
परम औषधि: साक्षीभाव
उठो, जागो! सुबह करीब है
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Music Tracks पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत ट्रैक
यस टु दि रिवर
च्वांगत्ज़ुस ड्रीम इस सुरीली जलधारा की लहरों पर स्वयं को सवार होने दें। कभी आप हौले से ऊपर-नीचे जाएंगे, कभी एक जोरदार प्रवाह होगा, और आप इन लहराती हुई लहरों से विमुग्ध होंगे।
शीर्षकों में शामिल है:
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चेहरे के तनाव से मुक्ति

माह का ध्यान

"हर रात सोने से पहले अपने बिस्तर पर बैठें और मुंह बनाना शुरू करें। ठीक वैसे ही जैसे छोटे बच्चे करते हैं और उसका आनंद लेते हैं। तरह-तरह के चेहरे: अच्छे, बुरे, सुंदर, कुरूप, ताकि पूरा चेहरा और मांस-पेशियां हिलने लगें। आवाजें निकालें, निरर्थक आवाजें। फिर दस-पंद्रह मिनट के लिए झूमें, शरीर को हिलाएं। और फिर सो जाएं।
सुबह स्नान करने से पहले आईने के सामने खड़े रहें और फिर से मुंह बनाएं।..."
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जहां मौन वहां तीर्थ
I Wonder if This Could Be Love?
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