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| विभावन |
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सत्ताईस साल पहले मैं पोर्टलैण्ड, अमेरिका में रहता था। उनचालीस साल की उम्र में मैंने हर अमरीकी का स्वप्न पूरा कर लिया था: परिवार, सफल व्यापार, सुंदर मकान। लेकिन एक रात पूरे चांद की ओर देखकर मैं चिल्लाया, " मैं मृतवत हूं। मेरे भाव मर गए हैं। मेरे पास सब कुछ है और मैं अंदर से खाली हूं।" एक हफ्ते बाद मैंने पहली ओशो पुस्तक पढ़ी और उसके तुरंत बाद भारत में पुणे आ गया। मेडिटेशन रिज़ॉर्ट के द्वार पर आकर स्वागत कक्ष में मैंने पूछा, "यहां क्या होता है?" उत्तर मिला, "ध्यान।" मेरे अगले शब्द मैं कभी नहीं भूलूंगा, मैंने जोर से पूछा " वह क्या होता है?" |
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मेरे लिए ओशो इंटरनैशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट एक प्रयोगशाला है, एक ऐसा स्थान जहां मैं हर साल ध्यान करने और ओशो मल्टीवर्सिटी में कोर्सेस करने और संचालित करने के लिए आता हूं: "फास्ट ट्रैक टु योरसैल्फ" और "इनर स्किल्स फॉर वर्क एंड लाइफ"
"फास्ट ट्रैक" एक अनुपम एक दिवसीय कोर्स है जो सहभागियों को अंतर्जगत की चार पगडंडियों का अनुभव देता है: शरीर, मन, भाव और इंद्रियों को देखना। "
इनर स्किल्स फॉर वर्क एंड लाइफ" ऐसा कोर्स है जिसे मैं चाहूंगा कि दुनिया में जो भी कामकाज करता है और जिसके रिश्ते-नाते हैं वह आए और इसे अनुभव करे।
हर बार जब मैं मेडिटेशन रिज़ॉर्ट छोड़कर वापिस जाकर मेरे परिवार, मेरे कामकाज में लौटता हूं तो अधिक हल्का, कम गंभीर, अधिक रिलैक्स्ड और केंद्रित होता हूं। यह अहसास कि ऐसी जगह इस पृथ्वी पर है, मेरा पोषण करती है। अब मैं ज्यादा जीवंत अनुभव करता हूं बनिस्बत तब के जब मैं बीस साल का था।
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गीता दर्शन vol.7
ISBN 978-81-7261-096-8
Size - 7.5" x 8.5"
Hard Back
Pages - 452
अर्जुन की मनःस्थिति को ठीक से समझ लें, तो फिर कृष्ण का प्रयास समझ में आ सकता है कि कृष्ण क्या कर रहे हैं। अर्जुन उस दुविधा में खड़ा है, जो प्रत्येक मन की दुविधा है। और जब तक मन रहेगा, दुविधा रहेगी।...
गीता एक बड़ा गहन मनो-मंथन है। एक शब्द में भी कृष्ण कह सकते थे कि मुझे पता है भविष्य। तू युद्ध कर। पर कृष्ण की अनुकंपा यही है कि उत्तर न देकर, अर्जुन के मन को गिराने की वे चेष्टा कर रहे हैं। जहां से संदेह उठते हैं, उस स्रोत को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं; न कि संदेह के ऊपर आस्था और श्रद्धा का एक पत्थर रखकर उसको दबाने की।
अर्जुन को किसी तरह समझा-बुझा देने की कोशिश नहीं है। अर्जुन को रूपांतरित करने की चेष्टा है। अर्जुन नया हो जाए, वह उस जगह पहुंच जाए, जहां मन गिर जाता है। जहां मन गिरता है, वहां संदेह गिर जाता है। क्योंकि कौन करेगा संदेह? जहां मन गिरता है, वहां भविष्य गिर जाता है, क्योंकि कौन सोचेगा भविष्य? मन के गिरते ही वर्तमान के अतिरिक्त और कोई अस्तित्व नहीं है। मन के गिरते ही व्यक्ति कर्म करता है, लेकिन कर्ता नहीं होता है। क्योंकि वहां कोई अहंकार नहीं बचता पीछे, जो कहे, मैं। मन ही कहता है, मैं।
ओशो
इस पुस्तक में गीता के चौदहवें, पंद्रहवें व सोलहवें अध्याय—गुणत्रय-विभाग-योग, पुरुषोत्तम योग व दैव-असुर-संपद-विभाग-योग—तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।
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| पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: |
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सिद्धि का अर्थ |
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जीवन के तीन मौलिक तत्व |
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रूपांतरण का सूत्र |
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दैवी व आसुरी जीवन का भेद |
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क्या मनुष्य एक यन्त्र हैं?
ISBN 978-81-7261-261-0
Size - 5.5" x 8.5"
Paper Back
Pages - 100
मनुष्य एक यंत्र है, क्योंकि सोया हुआ है। और जो सोया हुआ है और यंत्र है, वह मृत है। उसे जीवन का केवल आभास है, कोई अनुभव नहीं है। और इस सोए हुए होने में वह जो भी करेगा—चाहे वह धन इकट्ठा करे, चाहे वह धर्म इकट्ठा करे, चाहे वह दुकान चलाए और चाहे वह मंदिर, और चाहे वह यश कमाए और चाहे त्याग करे, इस सोई हुई स्थिति में जो भी किया जाएगा, वह मृत्यु के अलावा और कहीं नहीं ले जा सकता है।
ओशो
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| पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: |
| • | क्या आप अपने विचारों के मालिक हैं? |
| • | वे कौन सी परतंत्रताएं हैं जो मनुष्य के जीवन को सब ओर से घेरे हुए रहती हैं? |
| • | क्या है भय का मनोविज्ञान? |
| • | जाग्रत चित्त सत्य की और स्वयं की खोज का द्वार है |
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जागरूकता क्या है? |
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| अपनी श्वास का स्मरण रखें |
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| अगर तुम अपनी सांस पर काबू पा सको तो अपनी भावनाओं पर काबू पा सकोगे। अवचेतन सांस की लय को बदलता रहता है, अत: अगर तुम इस लय के प्रति और उसमें होने वाले सतत बदलाव के बारे में होश से भर जाओगे तो तुम अपनी अवचेतन जड़ों के बारे में, अवचेतन की गतिविधि के बारे में सजग हो जाओगे।" |
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| | वाच ओशो टाक हियर |  |
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