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 इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
जुलाई 2 0 1 2
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ओशो.कॉम |
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दि अदर माइसैल्फ  |
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विशिष्ट होने की जरूरत |
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मैं अवसाद व आत्म-निंदा से भरा रहता हूं, हालांकि मुझे मालूम नहीं क्यों…।
" वैसे ही बने रहने का तरीका है यह…यह मन की चालाकी है। बजाय इसके कि समझा जाये, ऊर्जा निंदा की ओर चलना प्रारंभ कर देती है…जबकि बदलाव समझ से आता है, निंदा से नहीं। तो मन अत्यंत चालाक है: जैसे ही तुम कोई सच्चाई देखना शुरू करते हो, मन इसपर हावी हो जाता है और निंदा करनी शुरू कर देता है।…" |
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बॉडी धर्म  |
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स्वास्थ्य के चार स्तंभ |
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"स्वास्थ्य एक शारीरिक घटना ही नहीं है। यह मात्र इसका एक आयाम है, और वह भी ऊपरी आयाम,क्योंकि मौलिक रूप से देह तो मरणधर्मा है। स्वस्थ या अस्वस्थ,यह क्षणभंगुर है। वास्तविक स्वास्थ्य को तो कहीं तुम्हारे भीतर घटित होना है, तुम्हारी अंतरात्मा में,तुम्हारी चेतना में,क्योंकि चेतना का कभी जन्म नहीं होता,मृत्यु नहीं होती। यह शाश्वत है।…" |
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इमोशनल इकोलॉजी  |
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अश्रु |
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"आंसुओं से कभी भी भयभीत मत होना। तथाकथित सभ्यता ने तुम्हें आंसुओं से अत्यंत भयभीत कर दिया है। इसने तुम्हारे भीतर एक तरह का अपराध भाव पैदा कर दिया है। जब आंसू आते हैं तो तुम शर्मिंदा महसूस करते हो। तुम्हें लगता है कि लोग क्या सोचते होंगे? मैं पुरुष होकर रो रहा हूं!यह कितना स्त्रैण और बचकाना लगता है। ऐसा नहीं होना चाहिये। तुम उन आंसुओं को रोक लेते हो… और तुम उसकी हत्या कर देते हो जो तुम्हारे भीतर पनप रहा होता है।…" |
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माह का ध्यान  |
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शिवनेत्र |
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“यह एक घंटे का ध्यान है और इसमें दस-दस मिनट के छह चरण हैं। साधकों के सामने जरा हट कर, थोड़ी ऊंचाई पर, एक नीले रंग का प्रकाश--यानी बिजली का बल्ब जलता है, जो प्रकाश को घटाने-बढ़ाने वाले एक यंत्र के द्वारा, दस मिनट में तीन बार, बारी-बारी धीमा और तेज किया जाता है। उसके सहारे ही यह ध्यान संचालित होता है।…" |
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ओशो इंटरनैशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट साक्षात्कार 
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स्वर्ण के पार |
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“लुडमिला पेटिना, सुनहरे बालों, वाली महिला, बेलारुस से है। वह जिओलॉजिस्ट तथा समाज कार्यकर्ता है। 1919 में जब सोवियत युनियन विलीन हुआ तब बेलारुस जो रशिया का हिस्सा था, स्वतंत्र हुआ और सार्वभौम देश हुआ। लुडमिला एक विद्रोही स्वभाव की महिला है जो महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ती है। वह देश में महिलाओं की जो बदतर स्थिति थी उसे बदलना चाहती थी।.…" |
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इस माह की
पुस्तक  |
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शून्य के पार |
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“न तो ज्ञान ले जाएगा, न भक्ति ले जाएगी, न कर्म ले जाएगा। ज्ञान, भक्ति, कर्म तीनों मन के ही खेल हैं।
इन तीनों के पार जो जाएगा—वही अ-मन, नो-माइंड, वही आत्मा, वही परम सत्य उसकी अनुभूति में ले जाता है।
तब मुझसे मत पूछें कि मार्ग क्या है? सब मार्ग मन के हैं। मार्ग छोड़ें, क्योंकि मन छोड़ना है।.…"
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मल्टीमीडिया |
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Watch OSHO Talks Here  |
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Marriage and Children |
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An excerpt from an interview with Howard Sattler, 6PR Radio, Australia. “Freedom, to me, is the ultimate value. There is nothing higher than freedom.…" |
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Audiobook Series of the Month  |
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The Original Man |
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What’s so original about the original man? Only that on finding him within yourself, according to Osho you find everything worth discovering. But he exhorts the seeker not to take his word for it but experience it for yourself. Osho traces Zen from its beginnings with Bodhidarma in China through a succession of masters and poets.…" |
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E-book of the
Month  |
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The Book of Secrets |
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The Book of Secrets is a tremendous resource for anyone interested in experimenting with meditation. It is much more than just a commentary on an ancient tantra – rather, it is profound and inspired discussion of many different facets of human consciousness, their functions in daily life, and how these 112 techniques may help to bring more awareness and sensitivity into all these different aspects.… |
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