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इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
जून 2 0 1 0
  "कोई राजनैतिक क्रांति नहीं हो सकती; न सामाजिक क्रांति हो सकती है, न आर्थिक क्रांति। एकमात्र क्रांति है आत्मा की; वह वैयक्तिक क्रांति है। और अगर लाखों व्यक्ति रूपांतरित होते हैं तो परिणामस्वरूप समाज बदलेगा, इससे उल्टा संभव नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता कि तुम पहले समाज को बदलो और फिर व्यक्ति के बदलने की आशा करो।"     ओशो
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आत्मीयता ओशो
आत्मीयता
हम सभी इसे चाहते हैं--और हम सभी इससे बचते हैं। क्यों?
ओशो
"सभी आत्मीयता से डरते हैं। यह बात और है कि इसके बारे में तुम सचेत हो या नहीं। आत्मीयता का मतलब होता है कि किसी अजनबी के सामने स्वयं को पूरी तरह से उघाड़ना। हम सभी अजनबी हैं--कोई भी किसी को नहीं जानता। हम स्वयं के प्रति भी अजनबी हैं, क्योंकि हम नहीं जानते कि हम हैं कौन।...."
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डायनेमिक मेडिटेशन  
डाइनैमिक मेडिटेशन के दूसरे चरण में रेचन करना एक पागलपन प्रतीत होता है।
"आस-पास के लोग अभी भी पागल ही समझते हैं एक-दूसरे को। कहते न होंगे, यह दूसरी बात है। यह पूरी जमीन करीब-करीब मैड हाउस है, पागलखाना है। अपने को छोड़ कर बाकी सभी लोगों को लोग पागल समझते ही हैं। लेकिन अगर आपने हिम्मत दिखाई और इस प्रयोग को किया, तो आपके पागल होने की संभावना रोज-रोज कम होती चली जाएगी। जो पागलपन को भीतर इकट्ठा करता है, वह कभी पागल हो सकता है। जो पागलपन को उलीच देता है, वह कभी पागल नहीं हो सकता। ...."
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प्रेम का मार्ग  
प्रेम का मार्ग कैसे बन सकता है?
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"प्रेम का मार्ग बनाने का एक ही अर्थ होता है कि प्रेम के नैसर्गिक प्रवाह में जो पत्थर डाल दिए गए हैं, वे हटा दो। प्रेम का मार्ग नहीं बनाना होता, सिर्फ बाधाएं हटानी होती हैं। जैसे कि दर्पण है, धूल जमी है। दर्पण नहीं बनाना है, सिर्फ धूल हटा देनी है। दर्पण तो है ही। जैसे पानी का झरना फूटने को तैयार है, मगर एक चट्टान पड़ी है। और झरना नहीं फूट पाता और चट्टान को नहीं तोड़ पाता। चट्टान हटा दो। झरना कहीं से लाना नहीं है, चट्टान के हटते ही झरना बह पड़ेगा।
तो मार्ग बनाने का अर्थ विधायक नहीं है, नकारात्मक है। सिर्फ मार्ग की बाधाएं हटा दो। बाधाओं के हटते ही प्रेम सध जाता है।...."
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ओशो ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो
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ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट
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मैं बहुत दिनों बाद ओशो मेडिटेशन रिजार्ट पुणे आई और यहां हुए बदलाव को देखना एक सुखद आश्चर्य था। मेडिटेशन रिजार्ट के सामने और पीछे वाला रस्ता इतना शांत और सुकून भरा जैसे बहुत पहले हुआ करता था। न कोई ट्रैफिक, न भीड, सिर्फ वही लोग आ-जा रहे हैं जो ध्यान के लिए यहां आते हैं। दोनों तरफ खड़ी पुलिस मानो इस ध्यान स्थली की शांति की रक्षा करती हुई। मेडिटेशन रिजार्ट के भीतर बहुत नवीन निर्माण हो रहा है, खास कर बाशो स्थान जहां स्विमिंग पुल और टेनिस कोर्ट थे वहां एक आलीशान सोना बाथ, जकुज़ी, और इतने शानदार बाथरूम बने हैं कि मैं तो अवाक हो गई। हरी घास के गलीचे, चंपक और रातरानी के पौधे और इनके बीच पारदर्शी स्विमिंग पुल ध्यानियों के ध्यान में सौंदर्य की आभा दे रहा है।

इसी तरह कृष्ण भवन का कायाकल्प, और मीटिंग रूम, नये शीशे की दीवालों में प्रतिबिंबित हरा-भरा परिवेश जादुई लगता है। मैंने यह भी सुना कि अब अगस्त 11 से 15 तक एक मान्सून उत्सव मनाया जाएगा जिसमें देश भर से लोग आएंगे और ध्यान और उत्सव के ओशो संदेश को जीएंगे। मैं तो निश्चित रूप से आ रही हूं।
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ओशो ओशो मल्टीवर्सिटी ओशो
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ओशो 	मल्टीवर्सिटी ओशो
जून 17 - 19: एक्सप्लोर योरसेल्फ थ्रू चक्रा ब्रीदिंग एक अंतर्यात्रा है जिसमें अपने सात प्राथमिक ऊर्जा केन्द्रों के माध्यम से पिछली अवरुद्ध भावनाओं को मुक्त करें। जून 18 - 20 पर आर्ट विथ हार्ट में दिल के माध्यम से अपनी कला में रचनात्मकता को विकसित करें, और फिर 19 जून फास्ट ट्रैक टु योरसेल्फ : स्वयं के करीब आने के चार बिंदुओं शरीर ,होश, विचारों और भावनाओं का उपयोग कर, आप अनुभव करेंगे कि आप इन सभी से परे हैं। ओपनिंग टु फीलिंग ब्रेथ में अपने सांस लेने की पूरी क्षमता जगाएं, और इसकी मदद लेकर अपने जीवन की परिपूर्णता को पाएं23 से - 25 जून ।

1-4 जुलाई अवेयरनेस इंटेंसिव: हू इज़ इन? में सहभागी हों और आप कौन हैं इसकी खोज में अपनी समूची ऊर्जा ध्यान पर केंद्रित करें। 6 - 8 जुलाई इनर स्किल्स फॉर वर्किंग लाइफ के अंतर्गत अनुभव करें अपने कामकाज और जीवन, दोनों में आंतरिक कौशल कैसे विकसित किए जाएं। 10-16 जुलाई सेल्फ हिप्नोसिस फॉर मेडिटेशन में आप अपने दैनिक जीवन के लिए एक व्यावहारिक उपकरण के रूप में आत्म सम्मोहन का उपयोग सीख सकते हैं।
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ओशो पुस्तक विमोचन ओशो
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कहे कबीर दीवाना
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ओशो कहै कबीर दीवाना

प्रकाशक: OSHO Media International
आई एस बी एन: 978-81-7261-113-2
आकार - 6.5" x 8.5"
पृष्ठ संख्या - 560
हार्ड बाउंड


“कबीर अनूठे हैं। और प्रत्येक के लिए उनके द्वारा आशा का द्वार खुलता है।"
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पुस्तक के कुछ विषय-बिंदु:

  • भाव और विचार में कैसे फर्क करें?
  • जीवन में गहन पीड़ा के अनुभव से भी वैराग्य का जन्म क्यों नहीं?

  • समाधान तो मिलते हैं, पर समाधि घटित क्यों नहीं होती?

  • भक्ति-साधना में प्रार्थना का क्या स्थान है?

  • समर्पण कब होता है?

  • कबीर की बातें उलटबांसी क्यों लगती हैं?
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    गीता-दर्शन
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    ओशो गीता-दर्शन भाग तीन

    प्रकाशक: OSHO Media International
    आई एस बी एन: 978-81-7261-120-0
    आकार - 7.5" x 8.5"
    पृष्ठ संख्या - 488
    हार्ड बाउंड


    “कृष्ण जैसे व्यक्ति की करुणा अपरिसीम है। यह जानते हुए कि हम सुनकर भी नहीं समझ पाएंगे, हम देखकर भी नहीं समझ पाएंगे, फिर भी एक असंभव प्रयास कृष्ण जैसे लोग करते हैं। उनकी वजह से जिंदगी में थोड़ा नमक है, उनकी वजह से जिंदगी में थोड़ी रौनक है, जिन्होंने असंभव प्रयास किया। "
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    पुस्तक के कुछ विषय-बिंदु:

  • अंतर्यात्रा का विज्ञान
  • योग का अंतर्विज्ञान

  • दुख-सुख में अविचलित रहने की कला

  • अदृश्य की खोज

  • कार्य-कारण के जाल से मुक्ति
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    प्रेम-पंथ ऐसो कठिन
    1 अन्तर्यात्रा के मूल सूत्र
    2 मन के जाल हजार
    3 अभीप्सा की आगः अमृत की वर्षा
    4 शिष्यत्व महान क्रांति है
    5 प्रार्थना है उत्सव
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    ओशो 5 सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत ट्रैक
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    This! - Commentaries of the Bamboos
    1 ब्लेसिंग्स
    2 बुद्धाफ़ील्ड
    3 क्लाउड्स मूविंग
    4 ड्रिंकिंग फ्रॉम ए माउंटेन स्ट्रीम
    5 जर्नी ईस्ट
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    ओशो 5 सर्वाधिक लोकप्रिय ऑडियो ग्रीटिंग
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    माह का ध्यान
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    स्टॉप!
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    रात्रि पर ध्यान
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    जैसे ही कुछ करने की वृत्ति हो, रुक जाओ।
    तुम कहीं भी इसका प्रयोग कर सकते हो। तुम स्नान कर रहे हो; अचानक अपने को कहो: स्टॉप! अगर एक क्षण के लिए भी यह एकाएक रुकना घटित हो जाए तो तुम अपने भीतर कुछ भिन्न बात घटित होते पाओगे। तब तुम अपने केंद्र पर फेंक दिए जाओगे। और तब सब कुछ ठहर जाएगा। तुम्हारा शरीर तो पूरी तरह रुकेगा ही, तुम्हारा मन भी गति करना बंद कर देगा।
    जब स्टॉप कहो तो उस समय श्वास भी मत लो। सब कुछ रुक जाना चाहिए--श्वास भी, शरीर की गति भी। एक क्षण के लिए भी इस रुकने में स्थित हो जाओ तो तुम पाओगे कि राकेट की गति से अपने केंद्र में अचानक प्रवेश कर गए हो। इसकी एक झलक भी चमत्कारी है, क्रांतिकारी है। यह झलक तुम्हें बदल देगी। फिर धीरे-धीरे इस केंद्र की और भी झलकें तुम्हें मिलेंगी। इसलिए निष्क्रियता का अभ्यास नहीं करना है। विधि का उपयोग आकस्मिकता में है, अनपेक्षित होने में है।
     
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    A Buddha Will Be Misunderstood? (2 of 2)
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