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ओशो
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इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
मार्च 2 0 1 0
  "तुम लोगों को देखते हो -- वे दुखी हैं क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है, और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है। वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे लेकिन वे कायर सिद्ध हुए। अपनी नजरों में ही वे गिर गए, उनका आत्म सम्मान खो गया। समझौते से ऐसा ही होता है।"     ओशो
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ओशो ओशो.कॉम ओशो
 
Freedom From and Freedom For ओशो
भावनाओं का निकास कैसे करें ?
जैसे आपने कैथार्सिस या पिलो बीटिंग के जरिए क्रोध-निवृत्ति का प्रयोग बताया, वैसे काम, लोभ, मोह और अहंकार की निवृत्ति के लिए कौन से प्रयोग किए जाए।
ओशो
"काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार! शब्दों से ऐसा प्रतीत होता है, जैसे बहुत सी बीमारियां आदमी के आस-पास हैं। सचाई यह नहीं है। इतनी बीमारियां नहीं हैं, जितने नाम हमें मालूम हैं। बीमारी तो एक ही है। ऊर्जा एक ही है, जो इन सब में प्रकट होती है। अगर काम को आपने दबाया, तो क्रोध बन जाता है। और हम सबने काम को दबाया है, इसलिए सबके भीतर क्रोध कम-ज्यादा मात्रा में इकट्ठा होता है। अब अगर क्रोध से बचना हो, तो उसे कुछ रूप देना पड़ता है। नहीं तो क्रोध जीने न देगा।...."
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स्वास्थ्य अनैतिक है  
स्वास्थ्य अनैतिक है
जो स्वाभाविक है उसका दमन करने से आपकी ऊर्जा केंद्रों में असंतुलन आ जाता है - जो आपके जीवन को प्रभावित करता है- और यहां तक कि आपकी मौत को भी।
"पुरोहित स्वास्थ्य से डरते हैं क्योंकि उनकी नजरों में स्वास्थ्य अनैतिक है। शायद तुमने इस सदी के एक बहुत प्रसिद्ध जर्मन विचारक काउंट कैसरलिंग के बारे में सुना हो। वह एक महान धार्मिक दार्शनिक की तरह जाना जाता था। और उसने अपनी डायरी में लिखा था: स्वास्थ्य सबसे अनैतिक बात है।...."
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प्रेम स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं  
प्रेम स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं
हम सभी चाहते हैं लेकिन हम प्रेम स्वतंत्रता की कीमत पर नहीं चाहते। हमें दोनों कैसे मिल सकते हैं?
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"चूंकि मैं अपनी स्वतंत्रता चाहता हूं, अपनी प्रेयसी को हर संभव स्वतंत्रता देता हूं। लेकिन मैं पाता हूं कि पहले उसका ध्यान रखने का नतीजा यह होता है कि अंततः मैं स्वयं को ही चोट पहुंचाता हूं।...."
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ओशो ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो
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ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन 	रिज़ॉर्ट
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मैं ताइवान से हूं, वहां पर मैंने दस साल तक एक लाइब्रेरियन का काम किया। लेकिन उसके बाद मुझे अपनी जीवन शैली बदलनी थी क्योंकि मैं जिस तरह जी रही थी उससे खुश नहीं थी। मेरी एक मित्र ने मुझे ओशो के बारे में बताया। उसने ओशो की दो किताबें मुझे दीं: फ़्रीडम एण्ड अलोननेस और सेल्फ लव । मुझे उनके विचार इतने अच्छे लगे कि मैं पूना आने के लिए उत्सुक हो गई। मैं ऑक्टोबर 2009 में ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिजॉर्ट पहुंची।

उससे पहले मैंने कभी ध्यान नहीं किया था लेकिन मुझे ओशो सक्रिय ध्यान बहुत आकर्षक लगा। शुरू में अराजकापूर्ण श्वास का पहला चरण मुश्किल तो लगा लेकिन जैसे-जैसे मेरे भावों का रेचन हुआ, तेज श्वास लेना आसान हुआ। ताइवानी संस्कार ऐसे होते हैं कि अपने भावों को दबाये रखो और ऊपर से सब ठीक होने का दिखावा करो। इसे बदलने में मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा।

फिर मैं यहां रेसिडेन्शियल प्रोग्राम के तहत काम करने लगी। इसमें मैंने वाकई बहुत कुछ सीखा। मैं इवेण्ट्स विभाग में काम करती हूं जहां काम की रफ्तार बहुत तेज है। हर रोज नया काम, नई योजना होती है और हम लोग देर रात काम करते हैं क्योंकि रात का कार्यक्रम खत्म होने के बाद हमें पूरी सजावट समेटनी पड़ती है। यहां काम करने के दौरान मुझे अपनी ताइवानी कंडीशनिंग का फिर से सामना करना पड़ा: सफल होना, सबसे ऊपर रहना, कुछ खास होना। लेकिन यहां सब बराबर हैं। यहां हम काम मिल-जुलकर करते हैं । इनर स्किल्स फॉर वर्क एण्ड लाइफ – एक प्रशिक्षण है जिसमें एक पेण्टिंग की विधि है, उसमें हम सब मिलकर एक पेण्टिंग पर काम करते हैं। इससे मेरी आंखें खुल गईं। मैंने देखा कि यहां "मेरा काम" या "तेरा काम " नहीं है, यहां "हमारा काम" है।
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ओशो ओशो मल्टीवर्सिटी ओशो
ओशो
ओशो 	मल्टीवर्सिटी ओशो
सेल्फ हिप्नोसिस फॉर मेडिटेशन में आप 10-16 मार्च को अपने दैनिक जीवन के लिए एक व्यावहारिक उपकरण के रूप में सम्मोहन का उपयोग सीख सकते हैं । और फिर 13-20 मार्च के दौरान संस्कारित मन से परे जाकर चेतना का रहस्य अनुभव कर सकते हैं डायमंड अवेअरनेस एण्ड विटनेसिंग में । 24-26 मार्च तक आपको निमंत्रण है अपने केंद्र की प्राकृतिक क्षमता को तलाशने के लिए ओपनिंग टू योर सेंटर में । जीवन ऊर्जा के स्रोत को हारा के माध्यम से अपने साथ जोड़ने के लिए। फिर 25-28 मार्च तक कोर्स डीहिप्नोसिस, सेल्फ हिप्नोसिस एण्ड मेडिटेशन, ध्यान और सम्मोहन के बीच का अंतर: मन से अमन तक, और कितना आसान है आत्म-सम्मोहन सीखना।

अवेयरनेस इंटेंसिव : हू इज़ इन की संरचना इस तरह की गई है कि आप अपनी कुल ऊर्जा इस खोज में लगाएं कि आप कौन हैं । अप्रैल 1 से अप्रैल 4 तक इसका प्रयोग होगा। फिर 4 अप्रैल को है फास्ट ट्रैक टु योरसेल्फ जिसमें अपने आप को ध्यान के लिए तैयार करें, शरीर, इंद्रियां, भाव और होश, इन चार प्रवेश द्वारों से गुज़रते हुए। अंत में आप पायेंगे कि आप इन सबसे परे हैं।
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ओशो मेडिटेटिव थेरेपीज़ ओशो
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OSHO No-Mind   OSHO Mystic Rose   OSHO Born Again   Osho Talking to Your Body-Mind
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ओशो पुस्तक विमोचन ओशो
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साधना सूत्र
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ओशो साधना सूत्र

प्रकाशक: OSHO Media International
आई एस बी एन: 978-81-7261-099-9
आकार - 6.5" x 8.5"
पृष्‍ठ संख्‍या - 308
हार्ड बाउंड


थोड़े से साहस की जरूरत है और आनंद के खजाने बहुत दूर नहीं हैं। थोड़े से साहस की जरूरत है और नर्क को आप ऐसे ही उतार कर रख सकते हैं, जैसे कि कोई आदमी धूल-धवांस से भर गया हो रास्ते की, राह की, और आ कर स्नान कर ले और धूल बह जाए। बस ऐसे ही ध्यान स्नान है। दुख धूल है। और जब धूल झड़ जाती है और स्नान की ताजगी आती है, तो भीतर से जो सुख, जो आनंद की झलक मिलने लगती है, वह आपका स्वभाव है।"
ओशो


पुस्तक के मुख्य विषय-बिंदु:
  • कैसे दुख मिटे? कैसे आनंद उपलब्ध हो?
  • महत्वाकांक्षा अभिशाप है।
  • जीवन में आत्म-स्मरण की जरूरत कब पैदा होती है?
  • यदि परमात्त्मा सभी का स्वभाव है तो संसार की जरूरत क्या है?
  • ओशो
    निर्वाण उपनिषद
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    ओशो निर्वाण उपनिषद

    प्रकाशक: OSHO Media International
    आई एस बी एन: 978-81-7261-157-6
    आकार - 6.5" x 8.5"
    पृष्‍ठ संख्‍या - 316
    हार्ड बाउंड


    ओशो कहते है:
    ऋषि ऐसी प्रार्थना से शुरू करता है इस निर्वाण उपनिषद को, जिसमें निर्वाण की खोज की जाएगी—उस परम सत्य की, जहां व्यक्ति विलीन हो जाता है और सिर्फ विराट शून्य ही रह जाता है। जहां ज्योति खो जाती है अनंत में, जहां सीमाएं गिर जाती हैं असीम में, जहां मैं खो जाता हूं और प्रभु ही रह जाता है।


    पुस्तक के मुख्य विषय-बिंदु:
  • निर्वाण उपनिषद—अव्याख्य की व्याख्या
  • यात्रा—अमृत की, अक्षय की
  • अजपा गायत्री और विकार-मुक्ति का महत्व
  • आनंद और आलोक की अभीप्सा
  • ओशो
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    The Zen Manifesto: Freedom from Oneself
    1 मंदिर नहीं, मधुशाला
    2 जीवन का सार-सूत्र: ध्यान
    3 सूर्योदय की संभावना
    4 धर्म है कला जीवन की
    5 प्रेम सरिता है, सरोवर नहीं
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    ओशो 5 सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत ट्रैक
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    This! - Commentaries of the Bamboos
    1 ब्लाइंड मान इन द बाज़ार
    2 हिमालयन सेलीब्रेशन
    3 मॉर्निंग रैन
    4 ओरिएंटल एक्सप्रेशन
    5 शेपर्ड'स ड्रीम
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    माह का ध्यान
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    रात्रि पर ध्यान
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    बस अकेले होओ, चुपचाप बैठो, अंधेरे में देखो। अंधेरे के साथ एक हो जाओ, उसमें विलीन हो जाओ। तारों को देखो, उनकी दूरी को महसूस करो, उनका मौन, शून्य -- और अपने ध्यान के लिए रात का उपयोग करो। बिस्तर में बैठकर कुछ भी मत करो....
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     » जहाँ मौन वहाँ तीर्थ
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    मित्रो, यदि आप हमारे इंटरनेशनल सर्वर नेटवर्क के किसी भी हिस्से को धीमा पाते हैँ
    तो इस असुविधा के लिए हमेँ खेद है। इस मसले को हम शीघ्र ही ठीक करेँगे।
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    ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, मार्च 2010
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    © 2010 ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन
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