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| “ध्यान रहे, ऐसा नहीं है कि तुम ही सत्य को खोज रहे हो, सत्य भी तुम्हें खोज रहा है।." ओशो |
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ओशो.कॉम |
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दि अदर माइसैल्फ |
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हम कैसे जानें कि कोई हमसे सचमुच प्रेम करता है? |
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आदमी के व्यक्तित्व के तीन तल हैं: उसका शरीर विज्ञान, उसका शरीर, उसका मनोविज्ञान, उसका मन और उसका अंतरतम या शाश्वत आत्मा। प्रेम इन तीनों तलों पर हो सकता है लेकिन उसकी गुणवत्ताएं अलग होंगी। शरीर के तल .…" |
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बॉडी धर्म  |
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मृत्यु द्वार है |
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मृत्यु के बारे में क्या कहा जाए? मृत्यु के संबंध में कुछ कैसे कहा जा सकता है? कोई शब्द मृत्यु का आशय बताने में सक्षम नहीं है। इस शब्द मृत्यु का क्या अर्थ है? वस्तुत: इसका कोई अर्थ नहीं है। जब तुम शब्द "मृत्यु" को देखते हो तो तुम्हें क्या लगता है?.…" |
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इमोशनल इकोलॉजी  |
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सुखी समाज की ईंटें |
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आज तक का समाज दुख से भरा हुआ समाज है, उसकी ईंट ही दुख की है, उसकी बुनियाद ही दुख की है। और जब दुखी समाज होगा तो समाज में हिंसा होगी, क्योंकि दुखी आदमी हिंसा करेगा। और.…" |
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माह का ध्यान  |
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उदासी को ध्यान बनाएं |
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उदासी एक बहुत समृद्ध अनुभव बन सकता है । तुम्हें उस पर काम करना होगा। तुम्हारी उदासी से भागना आसान है। और सारे संबंध सामान्यतया पलायन होते हैं। व्यक्ति उदासी से बचता रहता है लेकिन वह हमेशा गहरे बनी रहती है, एक अंतर्धारा सी बहती रहती है।.…" |
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ओशो इंटरनैशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट
साक्षात्कार 
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उर्जा |
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“मैं केन्या से हूं और मैं टेक्सस में मनोवैज्ञानिक का काम करती हूं । एक छोटा सा क्लिनिक है जहां परिवार, बच्चे और कॉलेज के स्टुडेण्ट्स का कौंसेलिंग करती हूं। इसमें मैं शिथिलता के लिए तथा तनाव को बाहर फेंकने के लिए कई ओशो विधियों का प्रयोग करती हूं। क्रोध का प्रबंधन करने के लिए ये विधियां बहुत कारगर हैं।.…" |
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इस माह की
पुस्तक  |
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पिव पिव लागी प्यास |
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मन चित चातक ज्यूं रटै, पिव पिव लागी प्यास।
नदी बह रही है, तुम प्यासे खड़े हो; झुको, अंजुली बनाओ हाथ की, तो तुम्हारी प्यास बुझ सकती है। लेकिन तुम अकड़े ही खड़े रहो,.…" |
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मल्टीमीडिया |
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ओशो प्रवचनों को यहां देखें  |
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बीइंग इन लव |
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होश पूर्वक और निर्भय होकर संबंधित कैसे हों?
"प्रेम तुम्हारे जीवन में एक यथार्थ होना चाहिए, न कि महज काव्य। उसे वास्तविक बनाना है। कभी भी पहले प्रेम का अनुभव लिया जा सकता है.…" |
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वोच ईट हीअर » |
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माह की ऑडियो पुस्तक  |
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डैन्ग डैन्ग डोको डैन्ग |
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यह एक ड्रम की आवाज है जिसे शिष्य को सिखाते समय एक ज़ेन सद्गुरु ने बजाया था। यह ज़ेन की काव्यात्म का प्रतीक तो है ही, साथ ही.…" |
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माह की ई पुस्तक  |
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दि ए बी सी ऑफ एनलाइटनमेंट |
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आंतरिक जगत को उसके अपने शब्दकोश की जरूरत होती है। ओशो ने बहुत प्रवीणता के साथ अंतर जगत के अनुभवों को अभिव्यक्त करने के लिए सरल, सहज और स्पष्ट शब्द गढ़े हैं। "ए बी सी ऑफ एनलाइटनमेंट" महज शब्दकोश नहीं है वरन जीवन पर लिखी गई एक किताब है.…" |
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