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OSHO
इंटरनैशनल न्यूज़लैटर
मई 2009 
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" तुम भय या लोभ-वश जो भी करते हो, वह गलत ही होने वाला है क्योंकि भय और लोभ अचेतन अवस्थाएं हैं। भय के कारण तुमने नरक की कल्पना की है, लोभ के कारण तुमने स्वर्ग की कल्पना की है। न कहीं कोई नरक है और न ही कोई स्वर्ग। ये सब तुम्हारी कल्पनाएं हैं। जब तुम सपने देखने बंद कर देते हो, जब तुम्हारी नींद तिरोहित हो जाती है और तुम जाग जाते हो तो न तो फिर कोई स्वर्ग है, न कोई नरक। उस अवस्था को बुद्ध 'मुक्ति' कहते हैं-- लोभ से मुक्ति, भय से मुक्ति।"    ओशो

 

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Joy is Light
प्रमुदिता प्रकाश है
क्या तुमने अनुभव किया है कि तुम अति प्रसन्न थे और साथ ही अपनी भावना को व्यक्त करने में भयभीत भी?
"जो इतनी प्रफुल्लता और आनंद को अपने भीतर संजोता है, वह साधना में गति करता है...."
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Hypnosis: A Powerful Way To Liberate You From Addictions
सम्मोहन: दुर्व्यसनों से छुटकारा पाने का सशक्त उपाय
सम्मोहन में हमारे शरीर और मन को बदलने की असीम संभावना है। यह दुर्व्यसनों के शिकार व्यक्ति की पीड़ा को राहत देने में अत्यंत सहायक हो सकता है।
"कूए ने हजारों लोगों की शराब, सिगरेट, और तरह के दर्ुव्यसन क्षणभर में छुड़ा दिए, क्योंकि भरोसा दिला दिया। मन को गहरे में भरोसा आ जाए, तो शरीर तक परिणाम होने शुरू हो जाते हैं..."
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स्वार्थी बनो और देखो
 हमें दूसरों को प्रेम करने के बारे में तो मालूम है, परंतु स्वयं को? क्या वह दूसरे का काम है? ओशो का स्पष्ट उत्तर है,'नहीं'; प्रेम तुमसे ही शुरू होता है और स्वयं से प्रेम करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि तुम कौन हो।
"स्वार्थ बिलकुल जरूरी है। यह दुनिया ज्यादा सुखी हो जाए, अगर लोग ठीक अर्थों में स्वार्थी हो जाएं...."
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  ओशो इंटरनैशनल मैडीटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
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ओशो इंटरनैशनल मैडीटेशन रिज़ॉर्ट का हर दिन विशिष्ट होता है। मई में रात्रि-आकाश तले आर्ट-फ़िल्मों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय व्यंजनों का लुत्फ़ उठाएं, ओशो गैस्ट-हाउस के अनूठे सप्ताहांतों का आनण्द लें,डायनैमिक मै8डीटेशन बूस्टर में ध्यान की पराकाष्ठा को छुएं या फिर फूलों से लदे पेड़ों से घिरे ताल के पास विश्राम करें।जीवन को पूर्णतया जीने और ध्यान में गहरे जाने का अपूर्व अवसर।

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  ओशो मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
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ध्यान का आनंद बांटें -- ओशो मैडीटेशन ट्रेनिंग -- 8-10 मई

अपनी समस्त ऊर्जाओं को पुनर्जीवित होने दें-- वॉचिंग द फायर --   14-16 मई

यह शिशु-सुलभ होने का समय है-- ओशो बॉर्न अगेन -- 17-23 मई

अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दें व अपने स्वभाव में लौटें--     इक्सप्लोरिंग फ़ीलिंग्ज़ थ्रू ब्रैथ -- 18-20 मई

अपने भीतर के कलाकार को पहचानें-- डिसअपीअर इंटु द पेंटिंग -- 22-24 मई

 अपना चिकित्सक खुद बनें और स्वास्थ्य को संबल दें-- ओशो रिमांइंडिंग योरसैल्फ़ ऑफ द फ़ॉर्गोटन लैंगुएज ऑफ़ टॉकिंग टु योर बॉडी माइंड -- 24-30 मई 

  देखें कि कहां आपकी संवेदना जड़ हुई और जीवन रुक गया-- ओपनिंग टु द हार्ट --  1-3 जून

अपने भीतर की परतें खोलते-खोलते जानें कि आप कौन हैं-- हू इज़ इन? -- 4-7 जून

24 घंटे आप के साथ रहने वाले व्यक्ति का ध्यान कैसे रखें--जो तुम्हीं हो--  ओपनिंग टु सैल्फ लव --8-10 जून 

अभी-अभी पाई स्वतंत्रता का उत्सव कैसे मनाएं--  सैलीब्रेट द न्यू वोमन  --13-14 जून

 
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गीता दर्शन, भाग एक :

"शास्त्र की ऊंची से ऊंची ऊंचाई मनस है। शब्द की ऊंची से ऊंची संभावना मनस है। अभिव्यक्ति की आखिरी सीमा मनस है। जहां तक मन है, वहां तक प्रकट हो सकता है। जहां मन नहीं है, वहां सब अप्रकट रह जाता है।...
गीता ऐसा मनोविज्ञान है, जो मन के पार इशारा करता है। लेकिन है मनोविज्ञान ही। अध्यात्म-शास्त्र उसे मैं नहीं कहूंगा। और इसलिए नहीं कि कोई और अध्यात्म-शास्त्र है। कहीं कोई शास्त्र अध्यात्म का नहीं है। अध्यात्म की घोषणा ही यही है कि शास्त्र में संभव नहीं है मेरा होना, शब्द में मैं नहीं समाऊंगा, कोई बुद्धि की सीमा-रेखा में नहीं मुझे बांधा जा सकता। जो सब सीमाओं का अतिक्रमण कर जाता है, और सब शब्दों को व्यर्थ कर जाता है, और सब अभिव्यक्तियों को शून्य कर जाता है—वैसी जो अनुभूति है, उसका नाम अध्यात्म है।"
ओशो

इस पुस्तक में गीता के प्रथम तीन अध्यायों—विषादयोग, सांख्ययोग एवं कर्मयोग—तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है। कुछ विषय बिंदु:

- विषाद और संताप से आत्म-क्रांति की ओर
- आत्म-विद्या के गूढ़ आयामों का उदघाटन
- निष्काम कर्म और अखंड मन की कीमिया
- मन के अधोगमन और ऊर्ध्वगमन की सीढ़ियां
- परधर्म, स्वधर्म और धर्म
 

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  इस माह का ध्यान MONTHLY MEDITATION
अस्तित्व की आहट पहचानें:
Feel the Presence of Existence
यह विधि आंतरिक संवेदना पर आधारित है।पहले अपनी संवेदन-शक्ति को बढ़ाएं। अपने द्वार बंद कर लें, कमरे में अंधेरा कर लें और मोमबत्ती जला लें। मोमबत्ती के पास प्रेमपूर्वक बैठ जाएं--बल्कि प्रार्थनापूर्ण भाव से। पहले नहा लें, अपनी आंखों पर ठंडा पानी फेंकें, फिर प्रार्थनापूर्ण भाव से मोमबती के सामने बैठें। इसे देखें, शेष सब भूल जाएं। बस इस छोटी सी मोमबत्ती को--मोमबत्ती व उसकी ज्योति को।

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Strange Consequences

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