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ओशो
इँटरनेशनल न्यूज़लेटर
नवम्बर 2 0 0 9
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"हर कृत्य के प्रति जागरूक होओ। रास्ते पर चलते हुए पूरे होश से चलो; भोजन करते हुए होश पूर्वक करो। जो भी कर रहे हो उसमेँ अतीत और भविष्य को हस्तक्षेप मत करने दो। वर्तमान मेँ रहो। यही जागरूकता है। " ओशो

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सेक्स एक शक्ति है, उसको समझिए।
सेक्स एक शक्ति है, उसको समझिए।
"हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो बात करने में भयभीत होते हैं। हमने तो सेक्स को इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे वह है ही नहीं, जैसे उसका जीवन में कोई स्थान नहीं है। जब कि सच्चाई यह है कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है। लेकिन उसको छिपाया है, उसको दबाया है। दबाने और छिपाने से मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया। दमन उलटे परिणाम लाया है। ..."
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क्रोध को दबाइए मत!
क्रोध को दबाइए मत !
"शरीर मात्र साधन है। उसके संबंध में कोई दुर्भाव मन में न रखें। ऐसी बहुत-सी बातें प्रचलित हो गयी हैं कि शरीर दुश्मन है, और शरीर पाप है, और शरीर बुरा है, और शत्रु है, और इसका दमन करना है। वे मैं आपको कहूं, गलत हैं। न शरीर शत्रु है, न शरीर मित्र है।..."
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दूसरो से प्रेम ! परंतु स्वयं से ? स्वार्थी बनो
दूसरो से प्रेम ! परंतु स्वयं से ? स्वार्थी बनो
"हमें दूसरों को प्रेम करने के बारे में तो मालूम है, परंतु स्वयं को? क्या वह दूसरे का काम है? ओशो का स्पष्ट उत्तर है,'नहीं'; प्रेम तुमसे ही शुरू होता है और स्वयं से प्रेम करने से पहले यह जानना आवश्यक है कि तुम कौन हो।"
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  ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो 	इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट
ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट
मैंने चार साल पहले ओशो को पढ़ना शुरू किया था। अब मैं 25 साल का हूँ। मैं 12 साल की उम्र से अपने परिवार के कारोबार में काम कर रहा था,और पूरा ध्यान सिर्फ पैसे बनाने पर केंद्रित था जिससे मैँ बेहद थक गया था। मेरे दोस्त और समाज के साथ मेरा जीवन भी सतही था। फिर ओशो.कॉम पर ब्राउज़िंग करते हुए मैं ओशो ध्यान प्रयोग और ओशो मल्टीवर्सिटी के पाठ्यक्रमोँ की ओर आकर्षित हुआ, और विशेष रूप से ध्यान चिकित्सा ओशो बॉर्न अगेन पर मेरी नजर टिकी क्योँकि मैं महसूस कर ही रहा था कि मैं अपने अंदर के बच्चे को खो रहा हूँ। फिर एक दिन मैंने फैसला लिया: मैंने सब कुछ छोड़ दिया और पुणे आ गया।
मैंने यहाँ आकर आवासीय कार्यक्रम के तहत काम करना शुरू किया। यह एक बिल्कुल अलग अनुभव है, हालांकि मैं पहले हफ्ते में ही छोड़ कर भागना चाहता था क्योँकि मेरे सारे के सारे बटन दब गए थे!
मेरी कंपनी में काम करते समय मैं मालिक था, मैं नियंत्रण करता था, लोगों को चलाता था। यहाँ यह सँभव नहीं है क्योंकि इस जगह हम सब बराबर हैँ। इसे पचाना बहुत कठिन है। लेकिन बाद में मैंने बहना शुरू कर दिया, और जो भी आ रहा था उसे स्वीकार किया, उसका मजा लेता रहा, और बस साक्षी बना रहा- - और अब सब कुछ बदल गया। पहले मैं भविष्य के बारे में बहुत सोचता था कि आगे क्या होने जा रहा है , लेकिन अब वर्तमान में रहना सीख रहा हूँ। और ध्यान के माध्यम से पहली दफा मैंने मौन का स्वाद चखा है।
एक
आंतरिक कौशल जिसकी कि मुझे मदद मिली है वह है, किस तरह से नफरत और क्रोध से करुणा और प्रेम मेँ छलांग लगती है। जब मैं उद्विग्न होता हूँ तो गहरी साँस लेकर मेरी ऊर्जा को बदलता हूँ, और फिर दूसरे व्यक्ति को प्यार से छूता हूँ। इससे ऊर्जा बदलने मेँ बहुत मदद मिलती है।

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  ओशो मल्टीवर्सिटी ओशो मल्टीवर्सिटी
ओशो मल्टीवर्सिटी
  नवंबर 16- 18 , जो आप कौन हैँ , और आप जीवन मेँ कौन सी भूमिकाएँ खेल रहे हैं इन्हेँ अनुभव करेँ: लाइफ इज़ गार्जियस: इंट्युइटिव पेँटिँग। फिर, 20 - 22 नवम्बर को द आर्ट ऑफ सेल्फ - हेल्प एक टूल किट प्रस्तुत करती है जो सेवा भावी पेशे में हैँ उन लोगों के लिए ताकि वे थकान से बचें:  प्रदान करता है। क्या आप सदा कुछ नया करने की कोशिश करना चाहते थे, कि एक जोखिम ले - लेकिन कभी कर नहीं सके ? ठीक है, अब आप कर सकते हैँ। आप के अँदर बदलने की शक्ति है। उसे खोजेँ और जीयेँ 22 - 24 नवंबर को करेज: द जॉय ऑफ रिस्किँग और खुद के साथ प्यार करने की हिम्मत करेँ 26- 28 नवंबर को द जॉय ऑफ लिविँग में।

2 - 4 दिसंबर एक प्रयोग मेँ सहभागी होँ, शरीर की अपनी ही बह रही ऊर्जा, जीवँतता और बल की क्षमता की खोज का हिस्सा बने, हीलिँग योरसेल्फ के साथ। आयुर्वेदिक थेरेप्यूटिक मसाज , एडवांस्ड प्रोग्राम में 3 - 9 दिसंबर , आप शक्तिशाली गहरी मालिश आयुर्वेद के प्राचीन भारतीय विज्ञान के आधार पर काम करना सीखेँगे। 8 - 14 दिसंबर के बीच आनँदपूर्ण साहसिक रोमाँच ले: खुद को और दूसरों को देखते हुए लोगों के साथ काम करने में अपने कौशल को बेहतर बनाएँ चक्र एक्सप्लोरेशन एण्ड एनर्जी रीडिँग, एडवाँस्ड प्रोग्राम में।  अब तैयार हो जाएँ अपने भीतर के जोकर को खोजने और मुक्त करने के लिए 11- 13 दिसंबर को फीलिँग द इनर क्लाउन मुक्त के साथ। हमारे जीवन के पहले सात साल में (अनजाने) हम ब।डे होकर कौन बनेँगे इसका खाका बन जाता है। इस कोर्स प्राइमल रीबर्थ में, हम अपने वास्तविक अँतरतम का रास्ता खोज लेते हैँ 12- 19 दिसंबर।
 
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  पुस्तक विमोचन पुस्तक विमोचन
ध्यान विज्ञान
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ध्यान विज्ञान


प्रकाशक: OSHO Media International

आई एस बी एन:  81-7261-169-2

आई एस बी एन:  978-81-7261-169-9

आकार - 6.5" x 8.5"

पृष्‍ठ संख्‍या - 192

हार्ड बाउंड


पुस्तक के बारे में:

जो लोग शरीर के तल पर ज्यादा संवेदनशील हैं, उनके लिए ऐसी विधियां हैं जो शरीर के माध्यम से ही आत्यंतिक अनुभव पर पहुंचा सकती हैं। जो भाव-प्रवण हैं, भावुक प्रकृति के हैं, वे भक्ति-प्रार्थना के मार्ग पर चल सकते हैं। जो बुद्धि-प्रवण हैं, बुद्धिजीवी हैं, उनके लिए ध्यान, सजगता, साक्षीभाव उपयोगी हो सकते हैं।
लेकिन मेरी ध्यान की विधियां एक प्रकार से अलग हट कर हैं। मैंने ऐसी ध्यान-विधियों की संरचना की है जो तीनों प्रकार के लोगों द्वारा उपयोग में लाई जा सकती हैं।
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ओशो
   
मिट्टी के दीये
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मिट्टी के दीये


प्रकाशक: OSHO Media International

आई एस बी एन:  81-7261-032-7

आई एस बी एन:  978-81-7261-032-6

आकार - 5.75" x 8.25"

पृष्‍ठ संख्‍या - 200

हार्ड बाउंड

 

पुस्तक के बारे में:

कहानियां सत्य की दूर से आती प्रतिध्वनियां हैं—एक सूक्ष्म सा इशारा, एक नाजुक सा धागा। तुम्हें खोजते रहना होगा। तब कहानी धीरे-धीरे अपने खजाने तुम्हारे लिए खोलने लगेगी।
यदि तुम कहानी को वैसे ही लो जैसी वह दिखाई देती है, तुम उसके संपूर्ण अर्थ से ही चूक जाओगे। प्रत्यक्ष वास्तविक नहीं है। वास्तविक छिपा है...बड़े गहरे में छिपा है—जैसे किसी प्याज में कोई हीरा छिपा हो। तुम उघाड़ते जाते हो, उघाड़ते जाते हो: प्याज की परतों पर परतें, और तब हीरा उजागर होता है।

 
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    इस महीने हमने आप के लिए क्या चुना ....
Audio Books पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय ऑडियो पुस्तकें
एस धम्मो सनंतनो--भाग एक
एस धम्मो सनंतनो धम्मपद पर ओशो के प्रवचनों का यह विराट साहित्य 2500 वर्ष के अंतराल के बाद बुद्ध की वाणी को समझने में अत्यंत उपयोगी है। धम्मपद के सूत्र वस्तुत: हमें जगाने के सूत्र हैं। इन सूत्रों को समझा कर ओशो ने हमारी चेतना को जाग्रत करने की ऐसी जीवंत प्रक्रिया का रसीला निरूपण किया है जो व्यक्ति का आमूल रूपांतरण कर दे।
शीर्षकोँ मेँ शामिल है:
आत्मक्रांति का प्रथम सूत्र : अवैर
जागकर जीना अमृत में जीना है
प्रेम है महामृत्यु
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मैं मृत्‍यु सिखाता हूं
मैं मृत्‍यु सिखाता हूं मृत्यु क्या है? इसे सीखने के लिए जीवन को समझना होगा, उसके हर आयाम को, उसकी हर ॠतु से मैत्री करके। हम जीवन से अपरिचित हैं, इसीलिए मृत्यु से भयभीत हैं। ओशो कहते हैं: जीवन क्या है, मनुष्य इसे भी नहीं जानता है। और जीवन को ही हम न जान सकें, तो मृत्यु को जानने की तो कोई संभावना ही शेष नहीं रह जाती। जीवन ही अपरिचित और अज्ञात हो, तो मृत्यु परिचित और ज्ञात नहीं हो सकती है।
शीर्षकोँ मेँ शामिल है:
जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का
स्व है द्वार:सर्व का
मैं मृत्यु सिखाता हूं
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Music Tracks पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत ट्रैक
शैडो ऑफ द पाइन्स
शैडो ऑफ द पाइन्स इस संगीत को तुम्हेँ मौन में ले जाने दो, जहाँ तुम छाया हो जाते हो ...
शीर्षकोँ मेँ शामिल है:
एनशिएण्ट एकोज़
ऐज अबव, सो बिलो
चेंज ऑफ सीज़न्स
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  माह का ध्यान MONTHLY MEDITATION
कल्पना करें कि दौड़ रहे हैं
माह का ध्यान
"जब आप दौड़ते हैँ, आपकी अपने सांस स्वाभाविक रूप से बहुत गहरी जाती है और यह हारा को मसाज करना शुरू देती है कर चल रहे हैं - जो वास्तव में केंद्र है, जहां से ध्यान की ऊर्जा निकलती है।"
"और आप जब दौड़ते हैं, पूरे कार्बन डाइऑक्साइड को आपके फेफड़ों से बाहर फेंक रहे होते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड लोगों को सुस्त, मुर्दा,जाम,बंद कर देता है। वह पेड़ों के लिए अच्छा है और आदमी के लिए बहुत बुरा। जब आप दौड़ रहे हैं ... अपने फेफड़ों में ऑक्सीजन भरे हुए हैं.."
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  मेडिटेटिव थेरपीज़ मेडिटेटिव थेरपीज़

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																कार्यक्रम

ओशो ध्यान उत्सव

त्रिची (तमिलनाडु)
13 - 15 नवम्बर

जलगांव (महाराष्ट्र)
20 - 22 नवम्बर

कोयंबतुर (तमिलनाडु)
ओशो वैलनेस गेट अवे
25-28 दिसँबर
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  ओशो प्रेस मेँ ओशो प्रेस मेँ

ओशो प्रेस मेँ

अहा ज़िँदगी! अक्टूबर 2009
पश्चिम के चिकित्साशास्त्र का नाम है, मेडिकल साइँस. उसका मतलब होता है औषधि विज्ञान। पूरब मेँ हमने जो औषधि-विज्ञान बनाया, उसको नाम दिया है, आयुर्वेद। औषधि का नाम नहीँ दिया, आयु का विज्ञान। और विज्ञान भी नहीँ, वेद! विधायक। औसधि तो नकारात्मक है। बीमारी है तो औषधि का उपयोग है।
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मनुष्य की अद्भुत क्षमता
Don't Use This Planet Like a Waiting Room
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"होना और बनना, इन दो शब्दोँ मेँ तुम्हारा पूरा जीवन समाहित है। होना बुद्धत्व है, बनना अज्ञान है।"  ओशो
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ओशो इंटरनैशनल न्यूज़लैटर, नवम्बर 2009
© 2009 ओशो इंटरनैशनल फाउंडेशन
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