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OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
नवम्बर 2 0 1 1
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“तुम पूरब की सीमा नहीं बना सकते बगैर पश्चिम के।और रात नहीं हो सकती बिना दिन के। और गर्मी के बिना ठंड नहीं हो सकती। जीवन को उसकी समग्रता में स्वीकार करना चाहिए। यहां एक लय है, एक ध्रुवीयता है।" ओशो
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मैगज़ीनOमेडिटेशनOमेडिटेशन रिज़ॉर्टOमल्टीवर्सिटीOशॉपOज़ेन टैरो
  ओशो.कॉम O
मैं अकेलेपन से अत्यधिक पीड़ित हूं।
मैं अकेलेपन से अत्यधिक पीड़ित हूं।
मैं इसके बारे में क्या कर सकता हूं?
अकेलेपन के अंधेरे से सीधे नहीं लडा जा सकता। यह सारभूत बिंदु है जिसे प्रत्येक को समझना चाहिए कि कुछ बुनियादी बातें हैं जो बदली नहीं जा सकती। यह बुनियादी बातों में से एक है: तुम अंधेरे से, अकेलेपन से, अलगाव के भय से सीधे नहीं लड सकते। कारण यह है कि ये सब बातें मौज़ूद नहीं हैं; ये सब किसी की अनुपस्थिति हैं, जैसे कि अंधेरा प्रकाश का अभाव है।…
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उपहार
उपहार
शरीर को भलीभांति काम करना चाहिए, अच्छी तरह से। यह एक कला है, यह तप नहीं है। तुम्हें उसके साथ लड़ना नहीं है, तुम्हें उसे केवल समझना है। शरीर इतना बुद्धिमान है ... तुम्हारे मस्तिष्क से बुद्धिमान, ध्यान रहे, क्योंकि शरीर मस्तिष्क से ज्यादा समय जीया है। मस्तिष्क बिल्कुल नया आया है, महज एक बच्चा है।…
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अपने लड़ाकू स्वभाव को स्वीकार करो
अपने लड़ाकू स्वभाव को स्वीकार करो
मैं योद्धा हूं। मुझे युद्ध के सिवाय कुछ नहीं आता और खराब बात यह है कि मुझे वह अच्छा लगता था। भयंकर तूफान के सम्मुख खडा होकर ठहाका मारना मुझे प्यारा लगता है। सूरज की धूप में लेटकर पिघलना मुझे नहीं भाता।

उसमें कोई समस्या नहीं है। यदि तुम्हें लगता है कि तुम योद्धा हो, तुम्हें युद्ध में मज़ा आता है ,इतना ही नहीं, तुम्हें योद्धा होने पर गर्व है तो निश्चिन्त हो जाओ। समग्रता से लड़ो। अपनी लड़ाकू वृत्ति से मत लड़ो। तुम्हारे लिए यही लेट गो, यानी स्वीकार भाव होगा।…
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  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
TARO
तारो
मैं जर्मनी में एक सामाजिक कार्यकर्ता थी और विकलांग बच्चों के लिए काम करती थी। सबसे पहले मैंने ओशो के बारे में सुना वह उनकी मृत्यु की खबर थी। उसके बाद मैंने उनकी किताबें पढ़नी शुरू कीं, और म्युनिक के एक ध्यान केंद्र में ओशो ध्यान करने लगी। एक बार मैं योग सीखने के लिए भारत आई तो उस दौरान पुणे भी आई थी। यह जगह मुझे इतनी प्यारी लगी कि मैं सीधे लिविंग इन कार्यक्रम में दाखिल हुई। यहां काम करते हुए काम के बारे में मेरी जो भी अवधारणाएं थीं वे सब उभरने लगीं। जर्मन होने के नाते गलतियां करना मुझे अपराध बोध से भर देता था लेकिन यहां मैं उसके बारे में रिलैक्स हुई। मैं प्रतिदिन ओशो डायनैमिक मेडिटेशन करती हूं, उससे जिंदगी बहुत सुलझी हुई लगती है।
पहले मुझे अकेले रहना भाता था लेकिन यहां मैंने पाया कि लोगों के बीच रहना कितना सुंदर है। यहां निजी जीवन और कामकाजी जीवन में कोई फर्क नहीं है जिससे आप एकात्म होते हैं।

पता नहीं यह जगह कैसे काम करती है: इतने थोड़े से लोग इतने कम समय के लिए आते हैं लेकिन फिर भी इतने सुव्यवस्थित ढंग से काम होता है। जर्मनी में कोई भी कंपनी इस तरह नहीं चल सकती। यहां कोई बॉस नहीं है जिसका अनुमोदन लेना पड़े। मैं जैसी हूं वैसी ही स्वीकृत हूं , और सतत विकसित हो रही हूं।

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  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
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  संपादक की पसंद BOOK RELEASE
 
Gita Darshan Vol.4
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अनहद में बिसराम

ISBN 978-81-7261-031-9
Size - 5.5" x 8.5"
Paper Back
Pages - 244
Price: ruppes 140/-

जात हमारी ब्रह्म है, माता-पिता है राम।
गिरह हमारा सुन्न में, अनहद में बिसराम।।

दरिया कहते हैं: एक ही बात याद रखो कि परमात्मा के सिवा न हमारी कोई माता है, न हमारा कोई पिता है। और ब्रह्म के सिवाय हमारी कोई जात नहीं। ऐसा बोध अगर हो, तो जीवन में क्रांति हो जाती है। तो ही तुम्हारे जीवन में पहली बार धर्म के सूर्य का उदय होता है। गिरह हमारा सुन्न में।

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Jeevan Hi Hai Prabhu
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सहज आसिकी नाहीं

ISBN 978-81-7261-022-7
Size - 5.5" x 8.5"
Paper back
Pages - 212
Price: ruppes 125/-

क्या है प्रेम? कैसा है प्रेम का मार्ग?
क्या हम सार्थक प्रश्न पूछना जानते हैं?
धर्म क्या है?
क्यों कठिन है सत्य को पचाना?
  
सत्य विश्वास नहीं है, अनुभव है।
सब विश्वास झूठे होते हैं। सब विश्वास अंधे होते हैं।
मानना मत, अगर जानना हो।
जानने के लिए इतनी हिम्मत चाहिए—न मानने की हिम्मत।
खाली रहने की हिम्मत।
अपने को विश्वास के कचरे से नहीं भरेंगे, चाहे कोई भी कीमत चुकानी पड़े।
जीवन छिने तो छिन जाए, मगर अपनी आत्मा नहीं बेचेंगे।
ओशो

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श्रवण शरीर और मन के बीच एक गहन सहभागिता है। और इसीलिए उसे ध्यान की एक सर्वाधिक शक्त विधियों की भांति इस्तेमाल किया गया है। क्योंकि वय दो अनंतताओं को जोड़ता है: भौतिक और आध्यात्मिक।…
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ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, नवम्बर 2011
© 2011 ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन
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