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इंटरनैशनल  न्यूज़लैटर
 
अक्टूबर  2 0 0 7
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“जो भी श्रेष्ठ है, वह सदा उतरता है। जो भी तुम निर्मित करते हो वह सदा छोटा होता है, तुच्छ होता है। वह कभी श्रेष्ठ नहीं होता। जो भी तुम निर्मित करोगे, तुमसे कम होगा। जो भी श्रेष्ठ है, उसे तुम्हें होने देना है। संतुलन तुम्हें खोज लेगा। भगवत्ता तुम्हें खोज लेगी। तुम बस तैयार हो जाओ। और तैयारी, यानि: जो भी होता है उसे स्वीकार कर लेना, उसे अहोभाव से स्वीकार कर लेना। दुख भी, उदासी भी। घाटी भी ... अंधेरी ... ।"

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OSHO.com जीवन में दुख-ही-दुख क्यों हैं? परमात्मा ने यह कैसा जीवन रचा है? 
"जीवन में दुख ही दुख नहीं है। यह तुमसे किसने कहा? हां यहां दुख भी हैं, लेकिन दुख केवल भूमिकाएं हैं सुख की। जैसे फूल के पास कांट? सुख की। जैसे फूल के पास कांटे लगे हैं, वे सुरक्षायें हैं फूल की। कांटे फूलों के दुश्मन नहीं हैं; उनके रक्षक हैं, पहरेदार हैं। कांटे फूलों के सेवक हैं ..."
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OSHO.com बुद्धत्व का क्या अर्थ है?

"बुद्धत्व का अर्थ ऐसे तो सीधा-साधा है। बुद्धत्व का अर्थ होता है, जागा हुआ चित्त। बुद्धत्व का अर्थ होता है, होश। बुद्धत्व का अर्थ होता है, जो उठ खड़ा हुआ। जो अब सोया नहीं है, जिसकी मूर्च्छा टूट गयी।... "

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OSHO.com मुझे ऐसा महसूस होता है मानो मैं किसी गहरी और अंधी खाई में गिरता चला जा रहा हूं। यह मुझे क्या हो रहा है?

"संध्या रात्रि में विलीन हो गई है।
कुछ लोग यहां आ हैं, उनका कहना है:"आप शून्यता सिखाते हैं,लेकिन शून्यता का विचार मात्र हमें आतंकित कर देता है। क्या कुछ
ऐसा नहीं है जिसे हम पकड़ सकें?।..."

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   ओशो इंटरनैशनल मैडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
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OSHO.com घर लौटने का समय आ गया है। नये चेहरे दिखाई देने लगे हैं, उनमें बहुत से तीन माह के आवासीय कार्यक्रम में सहभागी होने आए हैं।यह कार्यक्रम उनके लिये है जो कार्य को हंसते-खेलते अपने व्यक्तिगत विकास, ध्यान और सृजनात्मकता के लिये एक विधि की तरह उपयोग करना चाहते हैं। सावन के बादल भी लौट गए हैं और स्वच्छ हवा में हरियाली अपने यौवन में उभर आई है। सूर्य की रोशनी में नाच रही हैं तितलियां, पक्षी पेड़ों से सगीत लहरियों में पुकार रहे हैं, और चारों ओर दिखाई देते हैं अभिवादन करते मित्र और उनकी खिलखिलाह्ट्। इस सब सक्रियता के पीछे छिपा है वह मौन जो यहां हो रहे सतत ध्यान की संपदा है। सुबह में होता है नृत्य का सत्र बुद्धा ग्रोव में, खूबसूरत बुकशॉप में खोज सकते हैं आप अपनी मन-पसंद पुस्तक, लाभ उठा सकते हैं मल्टीवर्सिटी कोर्सेस से, तथा सहभागी हो सकते हैं ओशो ऑडिटोरियम में होने वाली ध्यान विधियों में। और रात्रि में चाहे आप पार्टी में शरीक हो रहे हैं, फ़िल्म देख रहे हैं, नृत्य कर रहे हैं, कराओके कलाकार बन रहे हैं या प्लाज़ा में होने वाली लोकप्रिय ज़ेन संध्या का मज़ा ले रहे हैं,वह मौन यहां सदैव है। यही है जीवंत ओशो अनुभव….
 
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   मल्टीवर्सिटी MULTIVERSITY
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ओशो मल्टीवर्सिटी- अक्तूबर माह के आकर्षण:

मॉनसून के बादल छट गए हैं! मौसम सुहावना है और ऐसे प्यारे वातावरण में ओशो मल्टीवर्सिटी प्रस्तुत करती है निम्नलिखित कोर्सेस:
 स्वयं से पुन: सपर्क स्थापित करें और अवचेतन मन द्वारा स्वस्थ होने की प्रक्रिया सीखें गरीमो के साथ 24 से 30 अक्टूबर तक ओशो रिमाइंडिंग युअरसैल्फ़ ऑव दि फ़ॉरगौटन लैगुएज ऑव टॉकिंग टु युअर माइंड एंड बॉडि में या 25 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक अमृतो,एम डी के साथ ओशो डी-हिप्नॉसिस एंड सैल्फ़-हिप्नॉसिस में  भाग लें। अपने भीतर के कचरे को बाहर फ़ेंक कर मौन होना चाहते हैं तो साधना के साथ 3 नवंबर से 9 नवंबर तकओशो नो माइंड  में भाग लें। अपने अहंकार से मुक्त होकर सृजनात्मकता की प्रक्रिया में डूबना चाहते हैं तो 9 नवंबर से 12 नवबर तक होने वाले डिस्अपिअर इंटु दि पेंटिंग  में विदेह के साथ.भाग ले।
कार्यक्रम की संपूर्ण सूची के लिये कृपया क्लिक करें www.osho.com/multiversity पर।

 
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   पुस्तक विमोचन BOOK RELEASE
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OSHO.com प्रेम की झील में अनुग्रह के फूल:

वंशीरूप जीवन के प्रतीक कृष्ण

रैबल पब्लिशिंग हाउस,भारत
आई एस बी एन: 81-7261-082-3
पृष्‍ठ संख्‍या: 164
सितंबर 1997
पुस्‍‍तक आकार : सामान्य संस्‍करण

ओशो द्वारा उनके प्रियजनों को लिखे ये 150 पत्र प्रेम की झील में उगे 150 पद्म-पत्र हैं। देश, काल व व्यक्ति की सीमाओं को लांघ कर ये पत्र शाश्वत हो गए हैं। और इन्हीं पत्रों पर लगे हैं हमारे अनुग्रह के अदृश्य कमल। बहन, भाई, मित्र, संबंधी—सभी रिश्तों को संबोधित ये ‘शब्दहीन संवाद’ पाठक को रिश्तों के पार ले जाकर अनंत की यात्रा पर ले चलते हैं। ऊपर-ऊपर से शब्द दिखने वाले ये भाव कभी किसी फकीर की कहानी बन जाते हैं, कभी किसी के जन्मदिन पर द्विज हो जाने की शुभकामनाएं, तो कभी किसी प्रियजन के देह-त्याग पर मर्म को सहलाता मरहम हो जाते हैं, परंतु सभी शब्दों के बीच का सूत्र हमें भीतर की मौन झील में उतरने का संदेश देता है।

 

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