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प्रेम की
झील में अनुग्रह के फूल:
वंशीरूप जीवन के प्रतीक कृष्ण
रैबल
पब्लिशिंग हाउस,भारत
आई एस बी एन: 81-7261-082-3
पृष्ठ संख्या: 164
सितंबर 1997
पुस्तक आकार : सामान्य संस्करण
ओशो द्वारा उनके प्रियजनों को
लिखे ये 150 पत्र प्रेम की झील में उगे 150
पद्म-पत्र हैं। देश, काल व व्यक्ति की सीमाओं
को लांघ कर ये पत्र शाश्वत हो गए हैं। और इन्हीं
पत्रों पर लगे हैं हमारे अनुग्रह के अदृश्य
कमल। बहन, भाई, मित्र, संबंधी—सभी रिश्तों को
संबोधित ये ‘शब्दहीन संवाद’ पाठक को रिश्तों
के पार ले जाकर अनंत की यात्रा पर ले चलते
हैं। ऊपर-ऊपर से शब्द दिखने वाले ये भाव कभी
किसी फकीर की कहानी बन जाते हैं, कभी किसी के
जन्मदिन पर द्विज हो जाने की शुभकामनाएं, तो
कभी किसी प्रियजन के देह-त्याग पर मर्म को
सहलाता मरहम हो जाते हैं, परंतु सभी शब्दों के
बीच का सूत्र हमें भीतर की मौन झील में उतरने
का संदेश देता है।
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