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सुख और दुख एक ही
अनुभव के नाम |
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“पहले
अपने आपसे
एक
मनुष्य
के अनुभव
में,
प्रतीति
में सुख
और दुख
दो
अनुभूतियां
हैं-गहरी
से गहरी।
अस्तित्व
का जो
अनुभव
है, अगर
हम नाम
को छोड़
दें, तो
या तो
सुख की
भांति
होता है
या दुख
की भांति
होता है।
और सुख
और दुख
भी दो
चीजें
नहीं
हैं। ..” |
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मनुष्य खुद एक
बीमारी है |
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| “ मनुष्य एक बीमारी है। बीमारियां तो मनुष्य पर आती हैं, लेकिन मनुष्य खुद भी एक बीमारी है। मैन इज़ ए डिस-ईज़। यही उसकी तकलीफ है, यही उसकी खूबी भी। यही उसका सौभाग्य है, यही उसका दुर्भाग्य भी। जिस अर्थों में मनुष्य एक परेशानी, एक चिंता, एक तनाव, एक बीमारी, एक रोग है, उस अर्थों में पृथ्वी पर कोई दूसरा पशु नहीं है। .” |
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व्यक्तियों को
वस्तु मत बनाओ |
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हम
वस्तुओं
के जगत
में रहते
हैं। न
तो हम
पदार्थ
के जगत
में रहते
हैं और न
हम
स्वर्ग
के,
चेतना के
जगत में
रहते
हैं। हम
वस्तुओं
के जगत
में रहते
हैं। इसे
ठीक से,
अपने
आस-पास
थोड़ी नजर
फेंक कर
देखेंगे,
तो समझ
में आ
सकेगा।
हम
वस्तुओं
के जगत
में रहते
हैं-वी
लिव इन
थिंग्स।
ऐसा नहीं
कि आपके
घर में
फर्नीचर
है,
इसलिए आप
वस्तुओं
में रहते
हैं;
मकान है,
इसलिए
वस्तुओं
में रहते
हैं;
धन है,
इसलिए
वस्तुओं
में रहते
हैं।
नहीं;
फर्नीचर,
मकान और
धन और
दरवाजे
और
दीवारें,
ये तो
वस्तुएं
हैं ही।
लेकिन इन
दीवार-दरवाजों,
इस
फर्नीचर
और
वस्तुओं
के बीच
में जो
लोग रहते
हैं,
वे भी
करीब-करीब
वस्तुएं
हो जाते
हैं। |
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"यह
स्थान जो
है
वह
कम्यून से परे चला गया
है. कम्यून एक वैकल्पिक
समाज था.
मैंने
कम्यून का विचार छोड़
दिया है.
अब मैं
चाहता हूँ कि यह
जगह बस एक स्वर्ग - एक
हालिडे
रिसॉर्ट
हो जहाँ
तुम आराम कर सकते
हो,
मसाज करवाओ
.. जल्द ही
यहाँ
तरण ताल,
बडे
उद्यान और लॉन हो जाएँगे.
तुम
जब भी चाहो,
किसी
भी समय अपने
साज़ बजा
सकते
हो,
तुम अपनी
मनपसँद
बात कर सकते
हो.
यह एक कम्यून नहीं है,
यह सिर्फ
गैर उपयोगी लोगोँ का
सम्मेलन है
,
जो कहीं और फिट नहीं
हो
सकते.
यहाँ वे
अपना
आदर और सम्मान और गरिमा
को खोये
बगैर
अपने
मिसफिट होने
का
जश्न मना सकते हैं.
ऐसा हो कि यह
जगह
तुम्हारे मन
में
असीम
आनंद,
मौन और सौंदर्य की एक
स्मृति
अँकित करे.
और लोग तुम्हारे साथ
कोई
हस्तक्षेप
नहीँ
कर रहे
होँगे,
वे
तुम्हारी खुशी में खुश
हैं.
न
किसी को ईर्ष्या
है,
न
कोई प्रतिस्पर्धा है. कोई
किसी से
तुलना
नहीँ कर रहा
है.
लेकिन यह सब तुम पर
निर्भर करता है. मैंने
स्थान बनाया है यहाँ. अब
तुम
इसका
कैसे
उपयोग
करते
हो,
यह तुम
पर निर्भर है. "
ओशो,
हिडन स्प्लेंडर,
#
21
इसे
बाँटेँ:
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धीरे से और निश्चित रूप
से साँस की पूरी रेंज से
दोस्ती करेँ और उसके साथ
सांस के माध्यम से
भावनाओं की खोयी हुई
क्षमता की तलाश करेँ :
एक्सप्लोरिँग फीलिँग थ्रू
ब्रैथ
5 - 7 अक्टूबर.
इनर स्किल्स फॉर वर्क
एण्ड लाइफ
: यह आश्चर्यजनक चुलबुला
कोर्स समझ तथा अनुभव
प्रदान करता है और मौलिक
तरीके से आपके कार्य और
जीवन के लिए आँतरिक कौशल
बढ़ाने के उपाय प्रस्तुत
करता है, 12 - 14
अक्टूबर.
तंत्र का अर्थ है "हाँ "... पूरे जीवन को गले
लगाना. उसका मतलब है समूची जीवन ऊर्जा को जगाना. इस
रहस्य का पता लगाने के लिए आप कर सकते हैं:
तंत्र : ब्रैथ ऑफ लाइफ
12 - 15 अक्टूबर. दिल की खोज आपको अपने दैनिक जीवन
में नए तरीके से सँबँधित होने और अपने आपको व्यक्त
करने के रास्ते बताती है. यह आपके ध्यान को गहराने
का एक आँतरिक सेतु बनता है:
ओपनिँग टू योर हार्ट
16 -17
अक्टूबर. अपनी रचनात्मकता तथा, रचनात्मकता में अपने
विकास के परम फूल को खोजेँ:
क्रियेटिविटी: अवर नेचर
पेँटिँग एण्ड पोएट्री
19 -21 अक्टूबर.
अपने सच्चे अस्तित्व की
ओर वापसी का रास्ता खोजें
और जीवन जीने के
प्राकृतिक प्रवाह को पा
लेँ अपनी अद्वितीय क्षमता
के अनुसार:
प्राइमल रीबर्थ
25 - 31अक्टूबर.ध्यान के
कौशल सीखने और उसे बाँटने
का आत्म विश्वास प्राप्त
करने का आनंद लें
ओशो ध्यान प्रशिक्षण
30 अक्टूबर - 1 नवम्बर.
क्या आप कभी कभी ऐसी स्थिति मेँ होते हैं कि
लोगों से मिलकर लगता है कि आप पहले से ही उन्हें
जानते हैँ या उन स्थानों को पहले कहीँ देखा है ?
रीलिविँग पास्ट लाइव्ज:
2- 4 नवम्बर आपको समय में, पीछे की यात्रा पर ले
जाता है, और फिर हमारी प्रतिभा और रचनात्मकता को
जगाकर सिर्फ हमारे वर्तमान जीवन का जश्न मनाने के
लिए जिम्मेदारी लेना सिखाता है. |
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अनंत की पुकार
प्रकाशक: Rebel
Publishing House, India
आई एस बी एन:
81-7261-151-X
आई एस बी एन: 978-81-7261-151-4
आकार - 5.75" x 8.25"
पृष्ठ संख्या - 200
पैपर बैक
इस पुस्तक के कुछ विषय
बिंदु:
ध्यान-केंद्र की भूमिका
एक एक कदम
‘मैं’ की
छाया है दुख |
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ओशो
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विज्ञान, धर्म और कला
प्रकाशक: Rebel
Publishing House, India
आई एस बी एन:
81-7261-231-1
आई एस बी एन:
978-81-7261-231-3
आकार - 6.5" x 8.5"
पृष्ठ संख्या - 192
हार्ड बाउंड
इस पुस्तक के कुछ विषय
बिंदु:
परमात्मा को कहां खोजें?
क्यों सबमें दोष दिखाई
पड़ते हैं?
जिंदगी को एक खेल और एक
लीला बना लेना
क्या ध्यान और आत्मलीनता
में जाने से बुराई
मिटसकेगी? |
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ओशो
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इस महीने हमने आप के लिए क्या
चुना .... |
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पिछले
महीने के
सर्वाधिक
लोकप्रिय
ऑडियो
पुस्तकें |
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धर्म, संन्यास, ध्यान के रहस्यों का उदघाटन और अंध-श्रद्धा पर कुठाराघात ओशो की इस प्रवचनमाला के प्रमुख स्वर हैं। भारत की सामाजिक एवं धार्मिक मूढ़ताओं ने किस प्रकार इस देश को ध्यान की खुमारी, प्रेम की खुमारी से वंचित रखा है यह ओशो ने अपनी वाणी द्वारा स्पष्ट किया है।
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प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही मंदिर है, प्रेम ही पूजा है, इस सत्य का उदघाटन ओशो ने संत पलटू के वचनों पर बोलते हुए किया है। प्रेम के स्वरूप को समझाते हुए ओशो कहते हैं : ?मैं तो चाहूंगा कि अब प्रेम के मंदिर हों। प्रेम की एक खूबी है कि प्रेम न तो हिंदू होता न मुसलमान होता, न ईसाई होता न जैन होता; न हिंदुस्तानी, न पाकिस्तानी, न अफगानिस्तानी। प्रेम तो बस प्रेम है। प्रेम तो बहुत विराट है, सभी को आत्मसात कर लेता है।
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पिछले
महीने के
सर्वाधिक
लोकप्रिय
संगीत
ट्रैक |
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यहाँ आप पाएँगे मृदु , मर्मभेदी संगीत आपके अँतर्मुखी समय के लिए, आपके अँतरतम की खुली खिड़कियों में प्रवेश के लिए तैयार , ताकि "अस्तित्व एक छोर से दूसरे छोर तक बिना किसी रुकावट के गुजर सके ... " दि अवेकँड वन, दि गेस्ट एण्ड वाटर सांग, कुछ शीर्षक हैं जो इस ध्यानपूर्ण सीडी में आपको रिलैक्स करेँगे.
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ग्रीटिंग
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