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OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
अक्टोबर 2 0 1 0
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अपने पूरे जीवन तुम मृत्यु से भयभीत रहे हो| तुम अपने आप को व्यस्त रखते हो, ताकि मृत्यु को नजरअंदाज कर सको, जो एक साये की तरह तुम्हारा पीछा कर रही है और कोई नहीं जानता कि अगले पल क्या होने वाला है| लोग ऐसे जीते हैं जैसे वे हमेशा से यहां हैं, और वे यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि कोई यहां हमेशा नहीं रहता| लेकिन ये भयभीत लोग, मृत्यु से, बीमारी से, पराजय से डरे हुए लोग धूर्त लोगों के शिकार हो जाते हैं। ओशो
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श्रद्धा
श्रद्धा
मुझे श्रद्धा की बहुत जरूरत है, मैं चाहता हूं कि विशेष रूप से आपमें श्रद्धा रखने में सक्षम होऊं, और मुझे दुख होता है क्योंकि मैं ऐसा नहीं कर पाता।?
जो लोग स्वयं में श्रद्धा रखते हैं वे दूसरों पर श्रद्धा कर सकते हैं। जो लोग स्वयं पर श्रद्धा नहीं रखते वे किसी पर भी श्रद्धा नहीं कर सकते। आत्म-श्रद्धा से श्रद्धा आती है। यदि तुम स्वयं के प्रति संदेह से भरे हो, तब तुम मेरे में श्रद्धा नहीं कर सकते; तुम किसी पर श्रद्धा नहीं कर सकते। यदि तुम स्वयं पर श्रद्धा नहीं रखते, कैसे तुम अपनी श्रद्धा पर श्रद्धा रख सकते हो? वह तुम्हारी ही श्रद्धा ही होगी। हो सकता है कि तुम मेरे पर श्रद्धा करो, लेकिन वह तुम्हारी श्रद्धा होगी। तुम मुझ पर श्रद्धा करते हो और तुम स्वयं पर श्रद्धा नहीं रखते। इसलिए यह प्रश्न मेरे बारे में नहीं है, यह तुम्हारे बारे में गहरा प्रश्न है।

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ध्यानी का आहार
ध्यानी का आहार
मनुष्य एक अकेली प्रजाति है जिसका आहार अनिश्चित है। अन्य सभी जानवरों का आहार निश्चित है। उनकी बुनियादी शारीरिक ज़रूरतें और उनका स्वभाव फैसला करता है के वे क्या खाते हैं और क्या नहीं; कब वे खाते हैं और कब उन्हें नहीं खाना होता है। किन्तु मनुष्य का व्यवहार बिलकुल अप्रत्याशित है, वह बिल्कुल अनिश्चितता में जीता है। न ही तो उसकी प्रकृति उसे बताती है कि उसे कब खाना चाहिए, न उसकी जागरूकता बताती है कि कितना खाना चाहिए, और न ही उसकी समझ फैसला कर पाती है कि उसे कब खाना बंद करना है|

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व्यक्तित्व के प्रकार
व्यक्तित्व के प्रकार
मुझे महसूस होता है कि मेरे पास आलस्य और पलायनवाद की पूरी विरासत है| या तो मैं अपने भीतर ऊर्जा महसूस नहीं करता, अगर करता भी हूं तो मेरे लिए पूरी तरह लेट गो करना मुश्किल होता है| मैं एक नियंत्रण अनुभव करता हूं |
मुझे लगता है कि कहीं न कहीं यह तुम्हारे जैव कंप्यूटर का हिस्सा बन चुका है। मन एक कंप्यूटर की तरह काम करता है, और हमारा सोचने का ढंग इसके लिए चारे का काम करता है| हमारे विचार इसमें इकट्ठे होते रहते हैं और धीरे-धीरे वे गहराई से जम जाते हैं| व्यक्तित्व को हम दो श्रेणियों में बांट सकते हैं। एक जिसे मनोविज्ञानी टी-व्यक्तित्व कहते हैं, विषैला, और दूसरा जिसे वे एन-व्यक्तित्व कहते हैं, पुष्टिकर।

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  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
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मैं एक ब्राजिली टेलीविजन चैनल में कट्टर समाचार की प्रबंधक थी। मैंने वह नौकरी छोड़ दी क्योंकि मैं बुरे कि बजाय अच्छे समाचार पर काम करना चाहती थी। मैंने आध्यात्मिकता, ध्यान, और शमनिज्म सीखना शुरू कर दिया, और सिर्फ सात दिन के लिए यहां रहने आयी।

मेरी यात्रा के आखिरी दिन ईवनिंग मीटिंग में मैंने ओशो को मृत्यु के बारे में बात करते सुना। मुझे लगा जैसे वह मुझे ही संबोधित कर रहे हैं, क्योंकि मैं मृत्यु से बड़ी भयभीत रहती थी। इसके पश्चात मैंने अपनी वापसी की यात्रा रद्द की और आवासीय कार्यक्रम में शामिल हो गयी।

मैं अंग्रेजी नहीं बोल पाती थी इसलिये प्रारंभिक दिन बड़े कठिन रहे। मैं सिर्फ पोर्तुगीज़ बोल सकती थी। जिस पुस्तक का मुझे अनुवाद करने को कहा गया उसका नाम “The Art of Dying” था, और मैं अपनी पुस्तक के साथ अकेली काम कर बड़ी खुश थी। परन्तु यह स्थान इससे कुछ अधिक निकला। मेरा अंग्रेजी में हाथ तंग होने के बावजूद मुझसे ध्यान और वैल्कम मॉर्निंग संचालित करवाने को कहा गया। मुझे नए लोगों से मिलना अच्छा लगने लगा, जो एक आनंददायक बदलाव था। लोगों का नियमित प्रवाह ही इस जगह का सार है।

यहां हर दिन अलग है, निरंतर चहल-पहल और जीवन से भरपूर। मेरे लिए ईवनिंग मीटिंग सबसे महत्वपूर्ण रही है, इसने मेरी उर्जा को बिलकुल बदल के रख दिया। ओशो कहते हैं “कंफ्यूजन इज माय मेथड”, और मेरा अनुभव है कि ये कारगर भी है।

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  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
 
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अपने दैनिक जीवन के कार्य कलापों में अपूर्व वृद्धि करने के तरीक़ों द्वारा, अपनी इनर स्किल्स फॉर वर्क एंड लाइफ का अनुभव कीजिये 19-21 अक्तूबर को।

04-11 नवम्बर को अवेयरनेस इन्टेन्सिव: सतोरी में एक ध्यानपूर्ण खोज में हिस्सा लीजिये और अनुभव कीजिये अपनी साक्ष्य चेतना का । क्या आप शरीर के बुरे लक्षणों, भय, और विकृतियों से परेशान हैं? हर विकृति को दूर कीजिये 8-10 नवम्बर को, हील योरसेल्फ में अपना पूरा ध्यान लगाकर। 10-16 नवम्बर को आपके दैनिक जीवन के लिए एक उपयोगी साधन सेल्फ-हिप्नोसिस फॉर मैडीटेशन का इस्तेमाल करना सीखिए, इसके पश्चात 12-14 नवम्बर को ओशो ध्यान की विधियों से दूसरों को परिचित करवाने के कौशल को सीखने का आनंद लीजिये ओशो मैडीटेशन फेसिलिटेटिंग में।

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  पुस्तक विमोचन BOOK RELEASE
 
 
Mai Dharmikta Sikhata hu Dharm Nahi
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मैं धार्मिकता सिखाता हूं धर्म नहीं

ISBN 81-7261-049-1
ISBN 978-81-7261-049-4
Paper Back
Size : - 5.75" x 8.25"
Pages - 136
Price - Rs.55/-

मेरी दृष्टि में तो धर्म एक गुण है, गुणवत्ता है; कोई संगठन नहीं, संप्रदाय नहीं। ये सारे धर्म जो दुनिया में हैं—और उनकी संख्या कम नहीं है, पृथ्वी पर कोई तीन सौ धर्म हैं—वे सब मुर्दा चट्टानें हैं। वे बहते नहीं, वे बदलते नहीं, वे समय के साथ-साथ चलते नहीं। और स्मरण रहे कि कोई चीज जो स्वयं निष्प्राण है, तुम्हारे किसी काम आने वाली नहीं। हां, अगर तुम उनसे अपनी कब्र ही निर्मित करना चाहो तो अलग बात है, शायद फिर वे पत्थर उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

धार्मिकता तुम्हारे हृदय की खिलावट है। वह तो स्वयं की आत्मा के, अपनी ही सत्ता के केंद्र बिंदु तक पहुंचने का नाम है। और जिस क्षण तुम अपने अस्तित्व के ठीक केंद्र पर पहुंच जाते हो, उस क्षण सौंदर्य का, आनंद का, शांति का और आलोक का विस्फोट होता है। तुम एक सर्वथा भिन्न व्यक्ति होने लगते हो। तुम्हारे जीवन में जो अंधेरा था वह तिरोहित हो जाता है, और जो भी गलत था वह विदा हो जाता है। फिर तुम जो भी करते हो वह परम सजगता और पूर्ण समग्रता के साथ होता है।

ओशो

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Maro he jogi maro
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मरौ हे जोगी मरौ

ISBN 81-7261-158-7
ISBN 978-81-7261-158-3
Hard Back
Size : - 6.5" x 8.5"
Pages - 588
Price - Rs.235/-


इस पुस्तक में गोरख पर बोलते हुए ओशो कहते हैं: ‘गोरख ने जितना आविष्कार किया मनुष्य के भीतर अंतर-खोज के लिए, उतना शायद किसी ने भी नहीं किया है। उन्होंने इतनी विधियां दीं कि अगर विधियों के हिसाब से सोचा जाए तो गोरख सबसे बड़े आविष्कारक हैं।’

गोरख के परम रूपांतरणकारी सूत्रों को आज की भाषा में उजागर करने के साथ-साथ, इस पुस्तक में ओशो द्वारा उत्तरित प्रश्नों में से कुछ:

  • विचार की ऊर्जा भाव में कैसे रूपांतरित होती है।
  • जीवन के सुख-दुखों को हम कैसे समभाव से स्वीकार करें।
  • मैं हर चीज से असंतुष्ट हूं। क्या पाऊं जिससे की संतोष मिले।
  • शरीर के अस्वास्थ्य और परिजन की मृत्यु के अवसर का कैसे उपयोग करें।


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  माह का ध्यान MONTHLY MEDITATION
ज्ञान और अज्ञान, दोनों के पार
Beyond Knowing and Not-knowing
जीवन के विधायक पहलू पर ध्यान करो और फिर ध्यान को नकारात्मक पहलू पर ले जाओ, फिर दोनों को छोड़ दो क्योंकि तुम दोनों ही नहीं हो।

इसे इस तरह देखो: जन्म पर ध्यान दो। एक बच्चा पैदा हुआ, तुम पैदा हुए। फिर तुम बढ़ते हो, जवान होते हो--इस पूरे विकास पर ध्यान दो। फिर तुम बूढ़े हो जाते हो और मर जाते हो। बिलकुल आरंभ से, उस क्षण की कल्पना करो जब तुम्हारे पिता और माता ने तुम्हें धारण किया था और मां के गर्भ में तुमने प्रवेश किया था।

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