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OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
अक्टूबर 2 0 1 1
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“इसे हमेशा कसौटी रहने दें: जो भी तुम्हें उत्सवपूर्ण बनाता है, जो भी तुम्हें उत्सव देता है, जो भी तुम्हें नृत्य करने के लिए प्रेरित करता है और उस हद तक कि तुम नृत्य में, तुम्हारे गाने में, तुम्हारे उत्सव में, खो जाते हो … वही केवल सच्चा धर्म है जिसे मैं जानता हूं।   ओशो
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मैगज़ीनOमेडिटेशनOमेडिटेशन रिज़ॉर्टOमल्टीवर्सिटीOशॉपOज़ेन टैरो
  ओशो.कॉम O
प्रेम का भोजन
प्रेम का भोजन
जैसा जीवन है…मैंने इसे तीन भागों में विभाजित किया है: नाश्ता, दोपहर का भोजन, दिन का अंतिम भोजन। बचपन है नाश्ते का समय । और ऐसा होता है यदि तुम्हें आज तुम्हारा नाश्ता नहीं दिया गया है, तुम दोपहर के खाने पर बहुत ज्यादा, सभी अनुपात के बाहर भूख महसूस करोगे। और यदि दोपहर का भोजन भी छूट गया है, तब रात के भोजन के वक्त तुम लगभग पागल हो जाओगे। प्रेम भोजन है – इसीलिए मैने जीवन को तीन भागों में विभाजित किया है: नाश्ता, दोपहर का भोजन, दिन का अंतिम भोजन।…
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खाने की कला
खाने की कला
भोजन करना इतनी सामान्य गतिविधि है कि जब तक कि हम एक डिनर पार्टी या उत्सव की तैयारी नहीं कर रहे हैं, तब तक हम भोजन पर खास ध्यान नहीं देते। लेकिन वास्तव में, हमें भोजन को एक कला के रूप में देखना चाहिए…
जब भी तुम किसी भी काम को आधे मन से करते हो, तो यह लंबे समय तक दिमाग में रेंगता है।…
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मौत से डरने का मतलब आंशिक रुप से जिया गया जीवन
मौत से डरने का मतलब आंशिक रुप से जिया गया जीवन
अक्सर मौत का भय, तीव्रता और मजबूती से उभरता है, और इस सुंदरता, दोस्ती और प्रेम को छोड़ने का भय होता है। मौत की इस निश्चितता का सहज स्वीकार कैसे संभव है?…
पहले, यह सहज स्वीकार केवल तभी संभव है जब मौत निश्चितता है। सहज स्वीकार मुश्किल है जब चीजें अनिश्चित हैं। यदि तुम जानते हो कि आज तुम मरने जा रहे हो, मृत्यु का पूरा डर गायब हो जाएगा। समय बर्बाद करने का क्या फायदा ? तुम्हारे पास जीने के लिए एक दिन है: जितना संभव है उतनी गहनता से जियो, जितना संभव है उतनी संपूर्णता से जियो।…
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  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद मैने पाया कि मेरे दिमाग में उलझन है, अत: यह समझने के लिए कि मैं कौन हूं और मैं क्या चाहता हूं, मैंने ध्यान शुरु करने का फैसला किया। इसे करने का सबसे अच्छा तरीका था ओशो इंटरनेशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट में आना जिसके बारे में मैंने बहुत कुछ सुन रखा था!

कार्य ध्यान के अंतर्गत में लिविंग इन कार्यक्रम में आ कर मैने काम के माहौल के बारे में बहुत कुछ सीखा, साथ ही सायंकालीन ध्यान सभाओं में उपस्थित हो कर खुद को गहराई में खोजा। मैने देखा कि किस किस्म के काम मे मुझे आनंद आता है, साथ ही मैंने ज्यादा केंद्रित होकर काम करना भी सीखा।

ध्यान के साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों के मिश्रण ने मुझे बहुत सुकून और आनंद पहुंचाया। साथ ही दुनिया भर के विलक्षण लोगों से बातचीत करने का मौका मिला, और यह अमूल्य है। इस कार्यक्रम में चित्रकला, वैरायटी शो, और डी जे बनने के माध्यम से मेरा रचनात्मक पक्ष भी उजागर हुआ, ये काम मैं कभी नहीं करता यदि मैं यहां नहीं आता।

घर और प्रियजनों से दूर होने के नाते, मैने सोचा कि यहां रह पाना मुश्किल होगा, लेकिन मैने यहां शांति और आनंद ही पाया। वास्तव में मैने अपना आवास एक महीने के लिए और बढा दिया है। यह मानसून का मौसम लुभावनी हरियाली को ऐसा जादुई बना देता है कि वह सघन अरण्य की तरह लगती है। और स्वछंद विचरते मोरों की आवाज मुझे शांति का भाव देती है जो मुझे हमेशा याद रहेगी।

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  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
OSHO MULTIVERSITY
12 का दिन ए डे फौर हार्ट है, दिल की मधुर जगह में सहज होने के लिए, दिमाग की निरंतर सत्ता से कुछ देर को हटने के लिये – निर्णय, आलोचना, संदेह औए भय से। ऊर्जा के कृत्य देखने से यह आनंद की सड़क बन जाती है जो आपकी केंद्रियता की गहरी जगहों तक जाती है और ध्यान, अनुभव ऊर्जा और आनंद का।

1 नवम्बर को फास्ट – ट्रैक टू योरसेल्फ अपने शरीर मे जाने के चार बिंदुओं का इस्तेमाल कर - शरीर, इंद्रियों, विचार और भावनाओं का। आप पायेंगे की आप इनसे आगे स्थित हैं। 3-6 नवम्बर को अवेयरनेस इंटेंसिव: हू इस इन को इस तरह से बनाया गया है कि आप आपकी पूरी ऊर्जा को खोज कर ढ़ूंढ सके कि आप कौन हैं। फिर 7-9 नवंम्बर को अपने कार्य कौशल का अनुभव करने के लिए इनर स्किल फार वर्क एंड लाईफ। फिर 15-17 नवंबर को ओशो के ध्यानों की अपनी समझ को और गहराई तक जाने का आनंद लें, जबकि आप कौशल सीख रहे हैं और विश्वास प्राप्त कर रहे हैं दूसरों को ओशो के ध्यानों का परिचय देते हुए… चाहे तो दोस्तों को बताते हुए या व्यवसायिक माहौल में ओशो मेडिटेशन: इन डेप्थ फैसिलिटेटिंग – 3 दिन।

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  संपादक की पसंद BOOK RELEASE
 
Gita Darshan Vol.4
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Amrit Ki Disha

ISBN 978-81-7261-180-4
Paper Back
Size - 7.5" x 8.25"
Pages - 168
Price: ruppes 60/-

इस पुस्तक में ओेशो हमें एक दिशा देते हैं—साहस की दिशा। साहस—उधार के विश्वासों से मुक्त होने का। साहस—तथ्यों को आर-पार देखने का। साहस—आत्म-जागरण के मार्ग पर चलने का। साहस—आनंदित होने का।

साथ ही चर्चा है मनुष्य-मन के कई प्रश्नों पर:

चित्त कैसे स्वतंत्र हो?
सत्य शास्त्रों में नहीं, तो कहां है?
पाप क्या है? क्या है उसका मूल?
अंतःसंघर्ष को कैसे मिटाएं?
स्त्रैणता और पुरुषता का मनोविज्ञान
  
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Jeevan Hi Hai Prabhu
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Gita Darshan, Vol.5

ISBN 978-81-7261-128-6
Size - 7.5" x 8.5"
Hard back
Pages - 476
Price: ruppes 325/-

अर्जुन को पता हो या न पता हो, ये कृष्ण के वचन जन्मों-जन्मों तक भी वह सुनता रहे, तो भी इनको सुनकर ही संतोष नहीं मिलेगा। इनके अनुकूल रूपांतरित होना पड़ेगा, इनके अनुकूल अर्जुन को बदलना पड़ेगा। और अगर इनके अनुकूल अर्जुन बदल जाए, तो अर्जुन स्वयं कृष्ण हो जाएगा। कृष्ण हो जाए, तो ही संतुष्ट हो सकेगा। उसके पहले कोई संतोष नहीं है। उसके पहले अतृप्ति बढ़ती चली जाएगी। अगर कोई वचनों से ही तृप्त होना चाहे, तो कभी तृप्त न हो सकेगा। चलना पड़ेगा उस ओर, जिस ओर ये वचन इशारा करते हैं, इंगित करते हैं। जहां ये ले जाना चाहते हैं, वहां कोई पहुंचे तो तृप्ति होगी।
ओशो

इस पुस्तक में गीता के दसवें व ग्यारहवें अध्याय--विभूति-योग व विश्वरूप-दर्शन-योग--तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:

निश्चल ध्यानयोग क्या है?
कृष्ण द्वारा विभूतियां कहने का रहस्य
काम-ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन कैसे हो
साधना के चार चरण
  
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OSHO Winter Festival
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  मासिक ध्यान MONTHLY MEDITATION
अपने विचारों से तादात्म्य तोड़ें
अपने विचारों से तादात्म्य तोड़ें
अपनी आंखें बंद करो, तब उन्हें दोनों भौहों के बीच केंद्रित करो, जैसे कि तुम वहां दोनों आंखों से देख रहे हो। इस पर पूरा ध्यान दो।

सही बिंदु पर, अचानक तुम्हारी आंखें स्थिर हो जाएंगी। और यदि तुम्हारा ध्यान वहां है, तुम्हें एक अनोखा अनुभव होगा: पहली बार तुम अपने विचारों को अपने सामने भागते हुए देखोगे…
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ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, अक्टूबर 2011
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