 |
|
ऑनलाइन संस्करण | सदस्यता लें | किसी मित्र को भेजें | OSHO.com दौरा
|
 |
 |
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
अक्तूबर 2012
|
 |
|
 |
|
|
|
|
| |
कांटे और गुलाब |
|
|
|
|
|
| |
हमारे बेटे की परवरिश करने के बारे में हमारे बीच मतभेद हैं। मेरे पति अधिक सख्त होना चाहते हैं और मैं अधिक प्रेमपूर्ण।
“इसलिए उसे यह करने दो और तुम अपना काम करो; इसमें कोई समस्या नहीं है। बच्चे को दोनों आवश्यक है, क्योंकि जीवन ऐसा ही है: यदि बच्चा केवल प्रेम ही पाए, तो वह दुखी होगा; यदि वह केवल कठोरता पाए, तो वह दुखी होगा। उसे दोनों चाहिए। मां-बाप का यही काम है: मां उसे प्रेम देती रहे…" |
|
|
|
|
| |
और पढ़ें » |
|
|
|
|
| |
|
|
|
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
|
 |
|
| न्यूट्रल गेयर |
|
“मुझे प्रतिदिन काम करते हुए ध्यान करना कठिन लगता है। खूब काम कर लेना, और फिर उसके बाद कुछ समय ध्यान करना आसान लगता है।
तुम इसकी तकनीक नहीं समझते। वास्तव में, हर किसी को लगातार बदलते रहना चाहिए, क्योंकि मस्तिष्क के
|
|
|
|
|
|
|
|
बहुत से केंद्र हैं। उदाहरण के लिए, यदि तुम गणित कर रहे ह`ो, तब मस्तिष्क का एक खास भाग काम कर रहा है और दूसरे भाग आराम कर रहे हैं। जब तुम कविता पढ़ रहे हो: तब वह भाग जो गणित में काम कर रहा था आराम करता ह… |
|
|
|
|
|
और पढ़ें » |
|
|
 |
|
|
|
 |
| |
साक्षात्कार - |
कोहै वादा, जापान |
|
|
 |
|
|
|
|
 |
|
कोहै वादा, जापान
मैं जापान के एक हाईस्कूल में शिक्षक हूं। मैं लगभग बारह घंटे काम करता हूं। जापान में हमें कानूनी तौर पर आठ घंटे काम करना पड़ता है लेकिन करीब-करीब सभी लोग उससे |
|
|
|
|
|
|
ज्यादा ही काम करते हैं। इसलिए मेरा बारह घंटे काम करना कोई खास बात नहीं है।
भारत में ओशो इंटरनैशनल मेडिटेशन रिज़ॉर्ट पुणे… |
|
|
|
|
|
और पढ़ें » |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
 |
 |
|
हैपीनेस: सायकॉलॉजिकल हैलीटोसिस
तुम्हारे दुख से तादात्म्य होने के तमाम कारण हैं। अपने दुख का मात्र अवलोकन करो, निरीक्षण करो और तुम खोजने में समर्थ हो पाओगे कि कारण क्या हैं। और तब उन क्षणों को देखो जब यदा-कदा तुमने आनंदित होने का आनंद लिया था। और फिर देखो, दोनों में क्या फर्क है। यह कुछ चीजें ध्यान में आएंगी…
जब तुम दुखी हो, तुम एक समझौतावादी होते हो। |
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
समाज इसे पसंद करता है, लोग तुम्हारा आदर करते है, तुम अधिक सम्मानित समझे जाते हो, यहां तक कि तुम एक तथाकथित संत भी हो सकते हो;… |
|
|
|
|
|
और पढ़ें>> |
|
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
 |
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
|
 |
|
मसाज ही संदेश है
मैं राजनयिक के रूप में कार्य कर रहा था परंतु सोचता था कि मुझे कुछ मसाज करने का अध्ययन करना चाहिए क्योंकि मुझे हाथ से काम करना पसंद है, और मैं जानता हूं कि यह एक ऐसा काम है जहां व्यक्ति खुला हुआ और ग्रहणशील हो सकता है। |
|
|
|
|
|
|
यह बहुत अच्छा है। हाथ से कुछ करना हमेशा अच्छा है।मस्तिष्क होने की अपेक्षा हाथ होना सदैव अच्छा है।… |
|
|
|
|
|
और पढ़ें>> |
|
|
|
|
 |
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
 |
 |
जीवन संगीत
ध्यान साधना पर प्रवचन
जो वीणा से संगीत के पैदा होने का नियम है, वही जीवन-वीणा से संगीत पैदा होने का नियम भी है। जीवन-वीणा की भी एक ऐसी अवस्था है, जब न तो उत्तेजना इस तरफ होती है, न उस तरफ। न खिंचाव इस तरफ होता है,… |
|
|
|
और पढ़ें >> |
|
 |
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
|
| |
| © |
2012 ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन
कॉपीराइट & ट्रेडमार्क जानकारी
|
|
|
| CONNECT WITH US |
|
|
|
|
|
| |
|
|
|
|
|
| ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, अक्तूबर 2012 |
| ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन, 17 कोरेगांव पार्क, पुना 411001, महाराष्ट्र |
|