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सितंबर 2005

"यदि चुनाव मस्तिष्क और हृदय के बीच करना हो तो हृदय का ही करना चाहिये, क्योंकि जीवन के सभी सुंदर मूल्य हृदय से ही संबंधित हैं. मस्तिष्क अछा कारीगर, अछा शिल्पी तो  है, परंतु केवल शिल्पी, कारीगर या वैज्ञानिक होने से आपके जीवन में पुलक नहीं आती. मस्तिष्क के पास प्रफुल्लता, आनंदमयता, मौन, निर्दोषता, सौंदर्य़, प्रेम व वह सब जो जीवन को प्रचुर बनाता है- इन सब की गुणवत्ता व क्षमता नहीं है-- यह केवल हृदय के पास ही है. "- ओशो

 

 

 

 

मैगज़ीन ध्यान रिज़ॉर्ट मल्टीवर्सिटी शॉप ज़ेन टैरो
 
ओशो.कॉम
 
ध्यान के बारे में ओशो की अंतर्दृष्टि
ध्यान क्या है?
ध्यान अपने  चित्त से लड़ने की नहीं, चित्त को देखने की प्रक्रिया है.
क्या ध्यान मुघे आनंदित रहने में मदद करेगा?
बहुत से लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि वे अप्रसन्न हैं और वे...
विपस्सना क्या है?
विपस्सना इतनी सुगम सी बात है जिसे छोटा बच्चा भी कर सकता है, यहां तक कि छोटे से छोटा बच्चा भी...
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ध्यान का विवेक से  क्या संबंध है?
विवेक ध्यान का उपफल है. यह किसी अन्य ढंग से नहीं आता...
 
क्या ध्यान का धर्म से कोई संबंध है?
मैने ध्यान के अर्थबोधन को ही समाप्त कर दिया है- हिंदू हिंदू ही रह सकता है और फिर भी...
क्या साधकों के लिये कोई "धर्मादेश" निर्धारित हैं?r
Tप्रथम: स्वतंत्रता, द्वितीय: निजता का अनूठापन...
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  मैडिटेशन रिज़ॉर्ट
 
 द सायलंट ऐक्सप्लोज़न

 डी वी डी का मियूज़िक टुडे द्वारा विमोचन (अंग्रेज़ी)
हिंदी, इटालियन,स्पैनिश, चीनी व जापानी उपशीर्षकों में उपलब्ध

   

एक झलक

 

द सायलंट ऐक्सप्लोज़न मुंबई से होकर पुणे, भारत की यात्रा है जिसका अंतिम पडाव  ओशो इंटरनैशनल मैडीटेशन रिज़ॉर्ट है- एक मरूद्यान- जहां ज़ोरबा की यथार्थवादी विधायक जीवन-शैली तथा गौतम बुद्ध की बोधपूर्ण सौम्यता का संगम देखा जा सकता .मैडीटेशन रिज़ॉर्ट पूरा वर्ष विश्व भर से हज़ारों व्यक्तियों के लिये आकर्षण का केंद्र है. सृजनात्मक कलाओं व देह- मन स्वास्थ्य से लेकर निजी रूपांतरण के लिये यहां विभिन्न कक्षाएं तथा कार्यशालाएं उपलब्ध हैं, साथ ही प्रतिदिन होने वाली ध्यान विधियां भी. अतिरिक्त सुविधाओं में टैनिस कोर्ट, व्यायाम-शाला, सौना, जकूज़ी व प्राकृतिक आकार का ओलम्पिक आकृति का तैरन-ताल भी सम्मिलित हैं. यहां की रसोई में रसायन-रहित खाद से उगाए उत्पादनों से देश-विदेश के शाकाहारी व्यंजन तैयार किए जाते हैं. संगीत, नृत्य  व मित्रों के बीच सितारों तले भोजन-  रात्रि-जीवन में एक समां बांध देते हैं.

और अधिक जानें

   
  मल्टीवर्सिटी
 
ओशो ध्यान-चिकित्साएं

 
ओशो की दृष्टि में चिकित्सा मनुष्य की समस्याओं का अंतिम निवारण नहीं है लेकिन इसे ध्यान की भूमि तैयार करने का उपकरण् बनाया जा सकता है.इस अंतर्दृष्टि को आधार रख कर उन्होंने ध्यान-चिकित्साओं की एक श्रंखला निर्मित की है.जो सहभागी मित्रों को अपने उन तनावो व दमनों  से मुक्त होने का अवसर  प्रदान करती है जो उन्हें शांत होकर बैठने व बाधाएं पैदा करने वाले चित्त्त का निरीक्षण नहीं करने देते.

अद्वितीय रूप से साधारण व प्रभावशाली इन विधियों के दौरान सहभागी मित्र आपस में कम से कम बातचीत करते हैं परंतु ग्रुप की सामूहिक ऊर्जा व्यक्ति को अपनी प्रक्रिया में गहरे जाने में सहायता करती है. किसी "थैरेपिस्ट''(चिकित्साविद) की आवश्यकता नहीं, बस एक फैसिलिटेटर (सहायक), जो स्वयं इस प्रक्रिया में से गुज़रा है और उसने  इसे संचालित करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

 ओशो मिस्टिक रोज़ | ओशो बोर्न अगैन | ओशो नो-माइंड | ओशो रिमाइंडिंग योरसैल्फ ऑव द लैंग्वेज ऑव टोकिंग टु योर माइंड ऐंड बॉडी

  पुस्तक समीक्षा
 

ध्यान विज्ञान

सुबह से रात्रि तक- समय के हर पल को सम्हालने के लिये ओशो द्वारा दी गईं 115 ध्यान-विधियां 
अब खरीदें

प्रकाशक: ताओ पब्लिशिंग प्रा.लि.
आई एस बी एन: 81-7261-169-2
राजसंस्‍‍करण, 192 पृष्‍ठ

विश्‍व की 32 प्रमुख भाषाओं में अनुवादित, 650 पुस्‍तकों में संकलित ओशो के हजारों प्रवचनों में अगर आप जानना चाहें कि उनकी अंतर-धारा क्‍या है, उनकी मूल देशना क्‍या है, तो उसका एक ही सही उत्‍तर है -- ध्‍यान। ओशो के सहज स्‍फूर्त प्रवचनों में ध्‍यान की सरल-सुगम विधियां यत्र-तत्र-सर्वत्र पिरोई हैं। आज के व्‍यस्‍त आधुनिक परिवेश में तनावरहित एवं उल्‍लासपूर्ण जीवन की कला सिखानेवाली 115 ध्‍यान विधियों का यह संकलन ध्‍यान के आनंद लोक में प्रवेश के लिए एक निमंत्रण है।

  मल्टीमीडिया
 
 
  1. जीवन की एकमात्र दीनता: वासना
  2. प्यास और संकल
  3. चित्त-शक्तियों का रूपांतरण
  4. सम्यक रूपांतरण के सूत्र
  5. शरीर-शुद्धि के अंतरंग सूत्र
 
 
  1. Bird's Beat
  2. Dancing Drums
  3. Rhythm of Life
  4. Tymphoon
  5. Tenko Swing
 
 
  1. The Inner Journey
  2. People of the Path
  3. The Alchemy of Yoga
  4. When the Show Fits
  5. Tantra: The Supreme Understanding
   

ओशो प्रैस में

 
  द एशियन एज- हंसने व रोने से व्यक्ति संतुलित हो जाता है.
  भावनात्मक स्वास्थ्य पर ओशो
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  द आफ्टरनून डिस्पैच ऐंड कूरियर- जीयें इस पल!
  समझने की सारी बात यह है कि भविष्य जैसी कोइ चीज़ नहीं है. भविष्य महत्वाकांक्षी चित्त की देन है. भविष्य समय का हिस्सा नहीं...
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  डैक्कन क्रॉनीकल- स्त्रियां सोचती हैं कि उन्हें प्रेम तभी मिलता है जब वे अस्वस्थ होती हैं.
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  आज का अ-विचार
  ओशो टाइम्स का मुद्रित संस्करण
 

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ओशो इंटरनैशनळ न्यूज़लैटर, सितंबर 2005
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