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इँटरनेशनल न्यूज़लेटर भारत के लिए
सितँबर 2 0 0 9 |
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मेरा कुल
काम यह हैं कि सब तरह के जादू, धर्मशास्त्र, दर्शन,
सांप्रदायिकता और चर्चों से मुक्त होने में तुम्हारी मदद
करूँ ताकि तुम धार्मिक हो सको. लेकिन अब धर्म को धर्मविहीन
होना और ईश्वर को ईश्वरविहीन होना जरूरी है. यह परम
क्रांति है. आदमी लंबे समय से इसके लिए इंतज़ार कर रहा है.
और हम सबसे भाग्यशाली समय में से एक में रह रहे हैं,
क्योंकि वह जो असंभव था, अब संभव है. आदमी ने ऐसी
परिपक्वता प्राप्त कर ली है कि वह यह छलाँग ले सकता है.
अब आदमी बच्चा नहीँ रहा, प्रौढ हो गया है. " ओशो |
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जादू की कुंजी |
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मुस्कुराओ,
और दुनिया तुम्हारे साथ मुस्कुराएगी; रोओ, और तुम
अकेले ही रोओगे.
समाज हमें नकली होना सिखाता है, जिससे दुख ही पैदा
होता है. लेकिन फिर उदासी से कैसे निपटा जाए? |
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“पहले
अपने आपसे एक
हो जाओ. यह युनियो मिस्टिका का पहला कदम है
: और फिर दूसरा और आखिरी कदम है:
अस्तित्व के साथ एक होना. दूसरा आसान है. पहला
इसलिए मुश्किल हो गया है, क्योंकि इतने सारे
(कंडीशनिंग) सँस्कार, इतनी शिक्षा, और सभ्य
होने के इतने सारे प्रयास हो रहे हैँ. पहला
मुश्किल हो गया है..” |
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पूर्णता
स्वास्थ्य है |
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“
पूर्णता
की अभीप्सा हर चीज में निहित है, लेकिन केवल
आदमी में वह सचेत हो गई है.
इसलिए आदमी तनाव में रहता है,
और जब यह आकांक्षा पूरी हो जाती है....”
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| "जब से मैं प्रेम में हूं, मैं अकेलापन और
जरूरतमंद महसूस नहीं करता। इसी समय में एक नये तरह
का एकांत महसूस करता हूं। यह ऐसे लगता है जैसे कि
पोषित कर रहा है। क्या हो रहा है?' |
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प्रेम हमेशा एकांत लाता है। अकेलापन हमेशा
प्रेम लाता है। जब तुम प्रेम में हो, तुम
अकेले नहीं हो सकते। लेकिन जब तुम प्रेम में
होते हो, तुम्हें अकेला होना पड़ेगा।
अकेलापन नकारात्मक दशा है। अकेलेपन का मतलब
होता है कि तुम किसी दूसरे की लालसा रखते
हो। |
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ओशो को ऑनलाइन पाएँ, अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए हुए
किसी चिह्न पर क्लिक करेँ |
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एक बकवास साल के बाद ....
वित्तीय गणित का अध्ययन समाप्त कर
मैंने विश्वविद्यालय छोड़ दिया और बेरोजगार बना रहा.
एक दुखद प्रेम
संबंध के अलावा कुछ नकारात्मक और
परेशान करनेवाले ध्यान अनुभवोँ के कारण मुझे स्वयँ को
स्वीकार करना और अपने आपको सम्हालना मुश्किल मालूम हो
रहा था.
यहाँ आने से पहले,
मैं अधिक रूढ़िवादी थेरवादी
बौद्ध हलकों में पिछले 4
सालों से कुछ विधियाँ कर
रहा था.
धर्मशाला में मैंने ओशो की एक किताब देखी और इंग्लैंड
में वापस आने के बाद भी वह किताब
मेरे दिमाग पर दस्तक देती रही.
तो मैंने इस ध्यान
केंद्र की खोज की इस उम्मीद से कि यहाँ ध्यान होता
होगा, पर यह जगह कुछ और ही थी!
दिन में आप बैठकर धूम्रपान करते हुए पेपर पढ़ सकते हैँ!
हर समय संगीत मेरा ध्यान
विचलित करता,
और मैं हैरान था कि वे शाम को शराब भी देते.
मैंने यहाँ बसने की कोशिश
शुरू की और पता चला कि मैं नहीं जानता कि कैसे इन
लोगों के साथ हुआ जाए.
मेरा मतलब है कि मैं लोगों
को "आध्यात्मिक" और "गैर- आध्यात्मिक,"
के रूप में देखता था, जो कि लँबा चेहरा लिए चुपचाप
फर्श पर देख रहे हैं लेकिन यहाँ एक पूरी अलग
नस्ल थी. वे "आध्यात्मिक" थे और फिर भी वे गपशप करते,
खेलते,
और पार्टी करते!
मुझे समझ मेँ नहीँ आया कि इस सुपर
नस्ल के साथ मैँ क्या करूँ.
तो अभी भी तनाव से भरा ,
मैं कार्य ध्यान मेँ दाखिल हुआ
.मुझे यह देखने का अवसर था कि अपने सभी कार्यों को
सामान्य या "अधार्मिक" के रूप में करना और मेरे अहंकार
को देखना कि यह किस तरह ऐँठ रहा है. वह यह मानना चाहता
था कि मैं कुछ सार्थक कर
रहा हूँ.
काश मेरा अहंकार जीतता!
मैं
प्यारे-प्यारे लोगों के साथ कार्यक्रम (इवेंट्स) विभाग
में काम करने लगा और मेरे लिए वह एक शानदार समय
था.पवित्र कार्य...? किसे फिक्र थी? हम मस्ती से समय
बिता रहे थे,
चित्रकारी,
खेलकूद,
और दिन भर नाचना!
मैं फिर से खुश था
जो कि एक
पूरे साल में नहीं हुआ था. यद्यपि मैं देर रात तक
नाचता रहता था,
चार घंटे की नींद पर
जीता,
और फिर से ओशो डायनैमिक मेडिटेशन के पागलपन के लिए
6
बजे उठता.
इसे बाँटेँ: |
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भजगोविन्दम् मूढ़मते
प्रकाशक: OSHO Media International
आई एस बी एन: 81-7261-122-6
आई एस बी एन: 978-81-7261-122-4
आकार - 6.5" x 8.5"
पृष्ठ संख्या - 218
हार्ड बाउंड
इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
क्षण भंगुर के आकर्षण का कारण क्या है?
प्रार्थना का मनोविज्ञान
क्या है हमारा स्रोत?
क्या है मंजिल? |
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ओशो |
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जीवन ही है प्रभु
प्रकाशक: OSHO Media International
आई एस बी एन:
81-7261-047-5
आई एस बी एन:
978-81-7261-047-0
आकार - 5.75" x 8.25"
पृष्ठ संख्या - 132
पैपर बैक
इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:
परमात्मा को कहां खोजें?
क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं?
जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना
क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिटसकेगी? |
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ओशो |
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| इस महीने हमने आप के लिए क्या चुना .... |
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पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय ऑडियो पुस्तकें |
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प्रेम, ध्यान, धर्म, धार्मिकता जैसे अनेक विषयों को ओशो ने इस प्रश्नोत्तर प्रवचनमाला द्वारा अपने अनूठे ढंग से समझाया है। वे कहते हैं,?और स्मरण रहे कि यह धार्मिकता कोई धारणा नहीं है?यह सत्य की आंतरिक सुवास है।?
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ओशो द्वारा दिए गए विविध प्रश्नों के उत्तर इन अमृत प्रवचनों में संकलित हैं। चाहे वह बोध हो चाहे प्रेम, ध्यान या जीवन के विविध आयाम, ओशो की वाणी हर तल पर झकझोर देती है। इस अर्थ में यह संकलन विशेष महत्वपूर्ण है कि दरियासाहब तथा बुल्लेशाह जैसे बुद्धपुरुषों के वचनों को ओशो ने फिर उजागर किया है। यह प्रश्नोत्तर प्रवचन-माला साहस के मार्ग पर चलने के लिए एक प्यारा आवाहन है।
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पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय संगीत ट्रैक |
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इस सीडी का शीर्षक उस संदर्भ से आता है जिसमेँ ओशो कहते हैँ कि संगीत में जो अंतराल है उसमेँ मौन पैदा होता है. यही विचार इस अल्बम के हिडन मिस्टरी और बैक टु दि सोर्स जैसी सँवेदनशील धुनोँ मेँ प्रतिफलित होता है. इन संगीतमय कविताओं की कोमल लय आप वर्षों तक खजाने की तरह सम्हाल कर रखेँगे..
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पिछले महीने के सर्वाधिक लोकप्रिय ऑडियो ग्रीटिंग |
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