Max New York Life Insurance Company Limited
 
  ओशो को ऑनलाइन पाएं,
अधिक जानकारी के लिए दिए हुए किसी चिन्ह पर क्लिक करें
Find us on FacebookFollow us on TwitterClick to reach Newsletter archive Click to reach Newsletter archive  Watch Web Videos Visit Osho Library
  FacebookTwitterArchive Photo Tour You TubeLibrary
 
OSHO
इंटरनेशनल न्यूज़लेटर
सितंबर 2 0 1 1
O
“शक्ति तुम्हें दूषित नहीं करती। शक्ति एक तरह से अच्छी है: यह लोगों को उघाड़ देती है। यह एक्स रे की तरह है: यह तुम्हारी वास्तविकता प्रकट कर देती है, तुम्हारा नग्न सत्य। ओशो  ओशो
O
मैगज़ीनOमेडिटेशनOमेडिटेशन रिज़ॉर्टOमल्टीवर्सिटीOशॉपOज़ेन टैरो
  ओशो.कॉम O
अपने लिए करुणा
अपने लिए करुणा
यदि तुम खुद को प्रेम नहीं करते तुम कभी किसी दूसरे को भी प्रेम नहीं कर सकते। यदि तुम खुद के लिए दयालू नहीं हो तो तुम किसी दूसरे के लिए भी दयालू नहीं हो सकते। तुम्हारे कथित साधु जो कि अपने लिए बहुत कठोर हैं सिर्फ बहाना कर रहे हैं कि वे दूसरों के लिए दयालू हैं। यह संभव नहीं है। दिमागी रूप से यह असम्भव है। यदि तुम खुद के लिए दयालू नहीं हो सकते, कैसे तुम दूसरों के लिए दयालू होगे?

जैसे भी तुम खुद के लिए होते हो दूसरों के लिए भी तुम वैसे ही होते हो। इसे एक बुनियादी सिद्धान्त मान लो। यदि तुम खुद से घृणा करते हो तो तुम दूसरों से भी घृणा करोगे – और तुम्हें खुद से घृणा करना सिखाया गया है।…
और पढ़ें »
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
अपने शरीर से दोस्ती
अपने शरीर से दोस्ती
प्रत्येक व्यक्ति, एक प्रकार से स्किज़ोफ्रेनिया की दशा में है –– कम या अधिक; फर्क केवल मात्रा का है। प्रत्येक व्यक्ति विभक्त है, क्योंकि धार्मिक और राजनीतिक दोनों तरह के शोषक इस रणनीति पर निर्भर करते रहे हैं कि व्यक्ति को विभक्त रखो, उसे अखंड मत होने दो, और वह गुलाम बना रहेगा। खुद के खिलाफ विभाजित घर का कमजोर होना स्वाभाविक है। इस प्रकार तुम्हें शरीर के खिलाफ लड़ना सिखाया गया है; तुम्हें विभक्त रखना, विभाजन की मूल रणनीति है। "शरीर से लड़ो, शरीर तुम्हारा दुश्मन है। यह शरीर ही है जो तुम्हें नर्क की तरफ खींच रहा है। लड़ो, हाथ में तलवार लेकर! रात-दिन लड़ो! जन्मों-जन्मों तक लड़ो! केवल तभी, एक दिन, तुम जीत सकोगे।…
और पढ़ें »
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
जीवन दर्शनशास्त्र की पाठशाला नहीं है
जीवन दर्शनशास्त्र की पाठशाला नहीं है
तुम्हारी समस्याओं को हल करने का अर्थ है--तुम्हें एक उत्तर देना जो तुम्हें बौद्धिक स्तर पर संतुष्ट करता हो; और तुम्हारी समस्याओं को समाप्त करने के लिए--तुम्हें एक विधि देना जो तुम्हें स्वयं अवगत करा दे कि समस्या जैसा कुछ है ही नहीं: समस्याएं हमारी स्वयं की कृतियां हैं और उसके लिए किसी उत्तर की आवश्यकता नहीं है।

प्रबुद्ध चेतना के पास कोई उत्तर नहीं है।…
Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
O
  ओशो मेडिटेशन रिज़ॉर्ट OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT OSHO INTERNATIONAL MEDITATION RESORT
पिछले महीने जब मैं डाक्टर के पास गया, मुझे बताया गया कि मेरा ब्लड-प्रेशर बहुत अधिक है। एक एयर लाइन का पायलट होने के नाते यह मेरे लिए आश्चर्य की बात नहीं थी। मेरा व्यवसाय उच्च-कुशलता का होने के कारण, तनाव के साथ विषम समयों में उड़ान करने और कम नींद लेने के कारण, उच्च रक्तचाप स्वाभाविक है। डाक्टर ने मुझे दो विकल्प दिए: दवा का प्रयोग अथवा ध्यान। मैंने दूसरा विकल्प चुना। मैं गूगल सर्च में गया और मेडिटेशन टाइप किया, कुछ मुख्य स्थानों में पूना का ओशो मेडिटेशन रिसार्ट था।

मैंने वेबसाइट पर जाकर लिविंग इन कार्यक्रम से सम्पर्क किया और दो दिनों के भीतर मैं यहां था। जब मैं आया मैं तनावग्रस्त था। उस स्थिति से बाहर आने में मुझे एक सप्ताह लगा। इस स्थान पर शिथिल करने वाली एक ऊर्जा है। मुझे अपने समय को व्यवस्थित करना कठिन हो रहा था क्योंकि यहां कोई सुनिश्चित कार्यक्रम नहीं था। धीरे-धीरे मैं समय को व्यवस्थित करना सीख गया। मुझे यहां ध्यानों की बहुआयामी दावत उपलब्ध थी। विपस्यना,डायनामिक ,कुंडलिनी, नादब्रह्म और इवनिंग मीटिंग में सहभागी होने से मुझे बहुत सुकून मिला। यहां मुझे महसूस हुआ कि अपने लिए अवकाश लेना एक बहुत सुंदर ख्याल है। और आश्चर्य की बात है कि यद्यपि तुम यहां अकेले होते हो, तुम्हें यहां अकेलापन अथवा होम-सिक जैसा नहीं लगता।

अब मैं परिस्थितियों से निपटने में अधिक शांत और कहीं अधिक संतुलित था।

यहां लोग समान उद्देश्य के लिए हैं इसलिए वे मित्रवत और समझदार हैं। तुम अपनी भावनाओं को किसी के भी साथ शेयर कर सकते हो और तुम गलत नहीं समझे जाओगे। एक कमरे में ध्यान करना आसान है, लेकिन जब तुम बाहर आओ तब एक शांत और सहयोगी वातावरण आवश्यक है। और यहां से अधिक शांत वतावरण तुम नहीं पा सकते। यहां का भोजन इतना अच्छा है कि इसके कारण मेरा वजन पांच किलो कम हो गया। जब मैं घर गया तो मेरे बच्चों ने कहा, " डैड, आप अधिक जवान लगने लगे।'

Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
O
  मल्टीवर्सिटी OSHO MULTIVERSITY
OSHO MULTIVERSITY
सितंबर 16 को: फास्ट ट्रैक टू योरसेल्फ: चार प्रवेश विन्दुओं; शरीर, होश, विचारों और भावों का प्रयोग करते हुए, तुम पाओगे कि तुम्हारा होना इनके पार है । सितंबर 24 को: ए डे फार द हर्ट: हृदय के मधुर आकाश में विश्राम करने के लिए और मस्तिष्क की लगातार पीड़ादायी--धारणाओं, आलोचनाओं, संदेहों और आशंकाओं से अवकाश के लिए।

अक्टूबर 6 - 9: तुम वास्तव में कौन हो की खोज में अपनी पूरी उर्जा को केंद्रित करने के लिए अवेयरनेस इनटेंसिव: हू इज इन? अक्टूबर 7 - 9 अपनी इनर स्किल फार वर्क ऐन्ड लाइफ की समझ और अनुभव के लिए और अक्टूबर 10 - 16 को सेल्फ-हिप्नोसिस फार मेडिटेशन का प्रयोग करना सीखना, जो तुम्हारे प्रतिदिन के जीवन के लिए एक महान उपकरण है!

Share It: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
OSHO.com
OSHO.com
OSHO.com
  आडियो बुक BOOK RELEASE
 
 
The essence of meditation is the knack of “witnessing,” “watching,” “observing,” “self‑remembering”… Because the body is the most tangible part of us, almost all the approaches use a bodily/physical phenomenon as the object of this watching, as a way to learn this knack.

Osho takes this ancient play to a whole new level – now using “sounds” as that bodily phenomenon. As Osho explains, “The art of listening is the simplest method of transformation.”
 
 

Here you will find many beautiful hours of sounds, of somebody drawing a painting with words, a painting that is designed to be dissolved in… as if you were listening to the sound of wind through the trees… where the words are like musical notes that contain the eternal message of silence, of harmony…"

 
 
Be Still and Know
In this series of question and answers,..

Read More
The Beloved Vol. 1
Osho introduces the wild, dancing,..

Read More
Returning to the Source
This book is a glorious mixture of no-nonsense...

Read More
Nirvana: The Last Nightmare
Why does Osho say that nirvana,...

Read More
No Water No Moon
Brimming with absurdities and humor,...

Read More
OSHO.com
  संपादक की पसंद BOOK RELEASE
 
Gita Darshan Vol.4
और पढ़ें »
 
Gita Darshan Vol.6

ISBN 978-81-7261-125-5
Hard Back
Size- 7.5" x 8.5"
Pages - 392
Price: ruppes 300/-

कृष्ण अर्जुन से उस क्षण, उस मार्ग, मृत्यु की उस कला की बात इन सूत्रों में करेंगे, जिस कला को जानने वाला, जिस मार्ग को पहचानने वाला, मर कर मरता नहीं, अमृत को उपलब्ध हो जाता है।
ओशो

इस पुस्तक में गीता के आठवें व नौवें अध्याय—अक्षर-ब्रह्म-योग और राजविद्या-राजगुह्य-योग—तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है।

कुछ विषय-बिंदु:

मृत्यु का भय क्यों?
योगयुक्त मरण के सूत्र
सृष्टि और प्रलय का वर्तुल
खोज की सम्यक दिशा
स्त्रैणता और पुरुषता का मनोविज्ञान
  
इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
 
Jeevan Hi Hai Prabhu
और पढ़ें »
 
Mitti Ke Diye

ISBN 978-81-7261-047-0
Size - 5.75" x 8.25"
Paper Back
Pages - 132
Price: ruppes 80/-

ध्यान की गहराइयों में वह किरण आती है, वह रथ आता है द्वार पर जो कहता है: सम्राट हो तुम, परमात्मा हो तुम, प्रभु हो तुम, सब प्रभु है, सारा जीवन प्रभु है। जिस दिन वह किरण आती है, वह रथ आता है, उसी दिन सब बदल जाता है। उस दिन जिंदगी और हो जाती है। उस दिन चोर होना असंभव है। सम्राट कहीं चोर होते हैं! उस दिन क्रोध करना असंभव है। उस दिन दुखी होना असंभव है। उस दिन एक नया जगत शुरू होता है। उस जगत, उस जीवन की खोज ही धर्म है।

इन चर्चाओं में इस जीवन, इस प्रभु को खोजने के लिए क्या हम करें, उस संबंध में कुछ बातें मैंने कही हैं। मेरी बातों से वह किरण न आएगी, मेरी बातों से वह रथ भी न आएगा, मेरी बातों से आप उस जगह न पहुंच जाएंगे। लेकिन हां, मेरी बातें आपको प्यासा कर सकती हैं। मेरी बातें आपके मन में घाव छोड़ जा सकती हैं। मेरी बातों से आपके मन की नींद थोड़ी बहुत चौंक सकती है। हो सकता है, शायद आप चौंक जाएं और उस यात्रा पर निकल जाएं जो ध्यान की यात्रा है।

तो निश्र्चित है, आश्र्वासन है कि जो कभी भी ध्यान की यात्रा पर गया है, वह धर्म के मंदिर पर पहुंच जाता है। ध्यान का पथ है, उपलब्ध धर्म का मंदिर हो जाता है। और उस मंदिर के भीतर जो प्रभु विराजमान है, वह कोई मूर्तिवाला प्रभु नहीं है, समस्त जीवन का ही प्रभु है।
ओशो

इस पुस्तक के कुछ विषय बिंदु:

परमात्मा को कहां खोजें?
क्यों सबमें दोष दिखाई पड़ते हैं?
जिंदगी को एक खेल और एक लीला बना लेना
क्या ध्यान और आत्मलीनता में जाने से बुराई मिट सकेगी?
  
इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
  मासिक ध्यान MONTHLY MEDITATION
अपने विचारों से तादात्म्य तोड़ें
अपने विचारों से तादात्म्य तोड़ें
अपनी आंखें बंद करो, तब उन्हें दोनों भौहों के बीच केंद्रित करो, जैसे कि तुम वहां दोनों आंखों से देख रहे हो। इस पर पूरा ध्यान दो।

सही बिंदु पर, अचानक तुम्हारी आंखें स्थिर हो जाएंगी। और यदि तुम्हारा ध्यान वहां है, तुम्हें एक अनोखा अनुभव होगा: पहली बार तुम अपने विचारों को अपने सामने भागते हुए देखोगे…
और पढ़ें »
इसे बांटें: Facebook Digg Del.icio.us Google Mixx Windows Live Tweet This
O
nomindnip.com NLP Hypnosis Training with Anekant
O
OSHO Discover the Buddha
O
  फलित ज्योतिष HOROSCOPE
HOROSCOPE
OSHO Guesthouse
अभी बुक करें
O
OSHO Zen Tarot
O
No-Thought for the Day
No-Thought for the Day - Listen Now »Listen Now
OSHO.com
  ओशो वैब टीवीOSHO WEB TV
 वाच ओशो टाक हियर
ओशो वैब टीवी
ओशो:एनीबडी हू गिव्स यू ए बिलीफ सिस्टम इज योर इनिमी
ओशो: स्ट्रेन्ज कान्सिक्वेन्सेस
ओशो:एब्सुलुटली फ्री टू बी फनी
ओशो: ह्वाट इज द नीड आफ नेशन्स
O
OSHO HINDI INTERNET RADIO
O
सदस्यता प्राप्त करें / सदस्यता खारिज करें | संपर्क करें | ऑडियो ग्रीटिंग भेजें | किसी मित्र को भेजें
O
ओशो इंटरनेशनल न्यूज़लेटर, सितंबर 2011
© 2011 ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन
कॉपीराइट & ट्रेडमार्क जानकारी

%commonfooter%