Ami Jharat Bigsat Kanwal--अमी झरत, बिगसत कंवल

 

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Ami Jharat Bigsat Kanwal--अमी झरत, बिगसत कंवल

Track #8 of the Series, अमी झरत, बिगसत कंवल – Ami Jharat Bigsat Kanwal

दस दिशाएं तो तुमने सुनी हैं; एक और भी दिशा है—ग्यारहवीं दिशा। दस दिशाएं बाहर हैं, ग्यारहवीं दिशा भीतर है। एक आकाश तो तुमने देखा है। एक और आकाश है—अनदेखा। जो देखा, वह बाहर है। जो अभी देखने को है, भीतर है। उस ग्यारहवीं दिशा में, उस अंतर-आकाश में अमृत झर रहा है।
 
 
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Osho International
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