Ami Jharat Bigsat Kanwal--अमी झरत, बिगसत कंवल

 

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Ami Jharat Bigsat Kanwal--अमी झरत, बिगसत कंवल

Track #9 of the Series, Ami Jharat Bigsat Kanwal--अमी झरत, बिगसत कंवल

दस दिशाएं तो तुमने सुनी हैं; एक और भी दिशा है—ग्यारहवीं दिशा। दस दिशाएं बाहर हैं, ग्यारहवीं दिशा भीतर है। एक आकाश तो तुमने देखा है। एक और आकाश है—अनदेखा। जो देखा, वह बाहर है। जो अभी देखने को है, भीतर है। उस ग्यारहवीं दिशा में, उस अंतर-आकाश में अमृत झर रहा है।
 
 
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Osho International
104
 
 
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