ऑडियोपुस्तकें – चयनित प्रवचन

ओशो ऑडियोबुक - चुने व्यक्तिगत टॉक:  दुख क्यों है? - Dhuk Kyon Hai?  (mp3)

 

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दुख क्यों है? - Dhuk Kyon Hai?

काम का अर्थ समझ लो। काम का अर्थ है: दूसरे से सुख मिल सकता है, इसकी आशा। काम का अर्थ है: मेरा सुख मेरे बाहर है। और ध्यान का अर्थ है: मेरा सुख मेरे भीतर है। बस, अगर ये दो परिभाषाएं ठीक से समझ में आ जाएं, तो तुम्हारी यात्रा बड़ी सुगम हो जाएगी। काम का अर्थ है: मेरा सुख मुझसे बाहर है--किसी दूसरे में है; कोई दूसरा देगा तो मुझे मिलेगा; मैं अकेला सुख न पा सकूंगा; मेरे अकेले होने में दुख है और दूसरे के संग-साथ में सुख है। इसीलिए तो तुम अकेले नहीं होना चाहते। जरा भी अकेले हुए कि तुम डरे; जरा भी अकेले हुए कि तुम बेचैन; जरा भी अकेले हुए कि तुमने अपने को भरा, कूड़ा-करकट कुछ भी मिले। जिस अखबार को तुम सुबह से तीन दफे पढ़ चुके हो, उसी को फिर पढ़ने लगे। जरा अकेले हुए कि कुछ तो भरो, खालीपन अखरता है। रेडियो चला दो, शोरगुल ही होगा, लेकिन ऐसा तो लगेगा कि अकेले नहीं हो। ताश खेलो, होटल में बैठ जाओ, क्लब चले जाओ--कहीं भी, किसी भांति...। ओशो
 
 
ऑडियोपुस्तकें - विवरण ऑडियोपुस्तकें शीर्षक
 
Osho International
 
 
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और आगे ओशो कहते हैं:
काम का अर्थ समझ लो। काम का अर्थ है: दूसरे से सुख मिल सकता है, इसकी आशा। काम का अर्थ है: मेरा सुख मेरे बाहर है। और ध्यान का अर्थ है: मेरा सुख मेरे भीतर है। बस, अगर ये दो परिभाषाएं ठीक से समझ में आ जाएं, तो तुम्हारी यात्रा बड़ी सुगम हो जाएगी। काम का अर्थ है: मेरा सुख मुझसे बाहर है--किसी दूसरे में है; कोई दूसरा देगा तो मुझे मिलेगा; मैं अकेला सुख न पा सकूंगा; मेरे अकेले होने में दुख है और दूसरे के संग-साथ में सुख है। इसीलिए तो तुम अकेले नहीं होना चाहते। जरा भी अकेले हुए कि तुम डरे; जरा भी अकेले हुए कि तुम बेचैन; जरा भी अकेले हुए कि तुमने अपने को भरा, कूड़ा-करकट कुछ भी मिले। जिस अखबार को तुम सुबह से तीन दफे पढ़ चुके हो, उसी को फिर पढ़ने लगे। जरा अकेले हुए कि कुछ तो भरो, खालीपन अखरता है। रेडियो चला दो, शोरगुल ही होगा, लेकिन ऐसा तो लगेगा कि अकेले नहीं हो। ताश खेलो, होटल में बैठ जाओ, क्लब चले जाओ--कहीं भी, किसी भांति...। ओशो
 

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