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ओशो ऑडियोबुक - चुने व्यक्तिगत टॉक:  जीने के दो ढंग - Jeene Ke Do Dhang  (mp3)

 

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जीने के दो ढंग - Jeene Ke Do Dhang

जीवन को जीने के दो ढंग हैं। एक मालिक का और एक गुलाम का। गुलाम का ढंग भी कोई ढंग है! जीना हो तो मालिक होकर ही जीना। अन्यथा इस जीवन से मर जाना बेहतर है। कम से कम मर जाना सच तो होगा। यह जीवन तो बिलकुल झूठा है। सपना है। गुलाम के ढंग से तुमने जीकर देख लिया, कुछ पाया नहीं। यद्यपि पाने ही पाने की तलाश रही। अब मालिक के ढंग से जीना देख लो। बस शास्त्र बदलना होगा, सूत्र बदलना होगा। इतना ही फर्क करना होगा। अब तक कल के लिए जीते थे, अब आज ही जीयो। अब तक कुछ होने के लिए जीते थे, अब जो हो वैसे ही जीयो। अब तक मूर्च्छा में जीते थे, अब जागकर जीयो, होश से जीयो। ओशो
 
 
ऑडियोपुस्तकें - विवरण ऑडियोपुस्तकें शीर्षक
 
Osho International
 
 
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और आगे ओशो कहते हैं:
जीवन को जीने के दो ढंग हैं। एक मालिक का और एक गुलाम का। गुलाम का ढंग भी कोई ढंग है! जीना हो तो मालिक होकर ही जीना। अन्यथा इस जीवन से मर जाना बेहतर है। कम से कम मर जाना सच तो होगा। यह जीवन तो बिलकुल झूठा है। सपना है। गुलाम के ढंग से तुमने जीकर देख लिया, कुछ पाया नहीं। यद्यपि पाने ही पाने की तलाश रही। अब मालिक के ढंग से जीना देख लो। बस शास्त्र बदलना होगा, सूत्र बदलना होगा। इतना ही फर्क करना होगा। अब तक कल के लिए जीते थे, अब आज ही जीयो। अब तक कुछ होने के लिए जीते थे, अब जो हो वैसे ही जीयो। अब तक मूर्च्छा में जीते थे, अब जागकर जीयो, होश से जीयो। ओशो
 

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